शिकायत दर्ज कराने में वाम कांग्रेस गठबंधन ने कर दी देरी
प्रधानमंत्री को औकात भी बताने लगीं मुख्यमंत्री, लोकतंत्र का नजारा यह भी।
दीदी ने भाजपा को भयानक जाली पार्टी भी कहा।
पुलिस प्रशासन कानून व्यवस्था को नियंत्रण करने के बजाय दीदी की जीत तय करने में लगा है
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
कोलकाता (हस्तक्षेप)। दूसरे चरण के मतदान में फिर वही भूतों का नाच जारी रहने का अंदेशा है क्योंकि शिकायत दर्ज कराने में वाम कांग्रेस गठबंधन ने कर दी देरी कर दी है।
चुनाव आयोग की भूमिका दीदी मोदी गठबंधन के बंदोबस्त के मुताबिक है। अफसरान धांधली के लिए तैनात कर दिये गये हैं और वे बेखौफ अपना काम कर रहे हैं। जबकि भूत बिरादरी दूसरे चरण में जिन 31 सीटों पर मतदान होने जा रहा है, वहां बेहद मजबूत है।
गौरतलब है कि माकपा के राज्य सचिव डॉ सूर्यकांत मिश्रा ने मांग की है कि इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग जांच करे।
मिश्रा ने कहा कि प्रथम चरण के मतदान के दौरान कई बूथों के अंदर राज्य पुलिसकर्मियों को देखा गया।
इसी बीच चिटपुट हिसां की वारदातों के जरिये दहशत का माहौल दमघोंटू बनता जा रहा है। वर्दमान के जिस मंगलकोट में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सत्ता दलके हमले से जान बचाकर धोती उठाये जान बचाने के लिए भागते नजर आये थे, वहां फिर तृणमूली और माकपाई समर्थक भिड़ गये।
वहां आकतुल गांव में शुक्रवार की रात हुई हिंसा में आधा दर्जन लोग जख्मी हो गये हैं। ऐसे मंगलकोट बंगाल के कोने-कोने में दहक रहे हैं और पुलिस प्रशासन कानून व्यवस्था को नियंत्रण करने के बजाय दीदी की जीत तय करने में लगा है और चुनाव आयोग और केंद्रीय वाहिनी सिर्फ तमाशबीन है।
अभी भूत बिरादरी के कारण एडवांटेज ममता बनर्जी को है। वाम कांग्रेस गठबंधन ने चुनाव आयोग से जंगल महल में दिनदहाड़े भूतों के नाच के बारे में शिकायत दर्ज कराने में काफी देर कर दी है, जबकि मतदान के दिन ही हस्तक्षेप ने मतदान में धांधली और जबरदस्ती का खुलासा कर दिया था और संशोधित मतदान आंकड़े जारी होते न होते रपट टांग दी थी।
अब इस देरी की वजह से कमसकम दूसरे चरण के मतदान में फिर वही भूतों का नाच जारी रहने का अंदेशा है।
गठबंधन के मुख्यमंत्री प्रत्याशी सूर्यकांत मिश्र और कांग्रेस के कमसकम दो बड़े नेता मानस भुइयां और ज्ञानसिंह सोहनपाल को हराने के लिए सत्ता गठजोड़ ने मोर्चाबंदी कर ली है।
11 अप्रैल को जंगल महल के ही पश्चिम मेदिनीपुर की तेरह, बांकुड़ा की 9 और बर्दवान की नौ सीटों पर मतदान होना है जहां पहले चरण की तरह धांधली रोकने का कोई पुख्ता इंतजाम न चुनाव आयोग का है और न वाम कांग्रेस गठबंधन का।
इन दो चरणों में हिसाब बराबार हो जाने का अंदेशा भी है लेकिन केंद्र सरकार के मातहत काम करने वाले चुनाव आयोग का रवैया तो समझ में आता है, वाम कांग्रेस गठबंधन की इस चूक का मतलब समझना मुश्किल है।
इसी बीच बंगाल के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को चुनौती दी है कि उनकी हिम्मत है तो वे उन्हें गिरप्तार करके दिखा दें।
जाहिर है कि बंगाल के चुनाव प्रचार अभियान में प्रधानमंत्री के एकतरफा आरोपों का जवाब दिये बिना उनकी साख बचेगी नहीं और गुपचुप गठबंधन का खेल अब उतना छुपा नहीं है तो उन्हें यह चुनौती देनी ही थी।
यह कुल किस्सा गली मोहल्ले में या बस ट्रेन में आम नोंक झोंक का मामला है जिससे कुछ बनता बिगड़ता है नहीं। यह लोकतंत्र के गिरते हुए स्तर का नजारा है, जिस पर अफसोस होना चाहिए।
पहली बात तो यह है कि अगर सचमुच ममता बनर्जी के खिलाफ प्रधानमंत्री जो आरोप लगा रहे हैं, वे सच हैं तो केंद्र सरकार और केंद्रीय एजंसियों के पास उसके सबूत भी होंगे। ऐसे में बेहतर होता कि प्रधानमंत्री और उनकी सरकार इतने गंभीर आरोपों के मद्देनजर ममता बनर्जी के खिलाफ प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई करती। ऐसा न करके उन्होंने ममता बनर्जी को उनकी औकात बताने का मौका दिया है।
मोदी के आरोपों के जबाव में अपने चुनावी भाषण में ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर करारे वार किये। उन्होंने भाजपा को ‘भयानक जाली पार्टी’ का नया नाम देते हुए प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधा और चुनौती दी है कि उनकी अगर औकात है तो वे उन्हें गिरफ्तार करके दिखायें।
आसनसोल में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दीदी ने कहा, ’मैं सिर ऊंचा करके लड़ती हूं। अब तक किसी के सामने नहीं झुकी। प्रधानमंत्री अगर गिरफ्तार करना चाहते हैं तो कर सकते हैं, मुझे इसकी परवाह नहीं।‘
दीदी ने कहा कि भाजपा बड़ी बड़ी बातें करती है। बात करना आसान होता है पर लोगों के लिए काम करना कठिन। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा व प्रधानमंत्री जब भी यहां आए हैं , मुझ पर आरोप लगाते हैं, पर मैं ऐसा नहीं करती हूं। विपक्ष में होते हुए मैं व्यक्तिगत रूप से न तो प्रधानमंत्री की आलोचना करूंगी और न ही बुद्धदेब भट्टाचार्य की।
प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी को अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें संघीय वयवस्था की उचित रूप से रक्षा करनी चाहिए।’
इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी के रेडियो शो ‘मन की बात’ का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि रेडियो पर केवल मोदी के मन की बात सुनना ऐसे लगता है कि मानो, वह कोई भगवान हैं।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तृणमूल कांग्रेस पार्टी को टेरर, मौत और करप्शन कहे जाने के जवाब में बनर्जी ने भाजपा को भयानक जाली पार्टी का संबोधन किया।
दूसरी तरफ, वाम लोकतांत्रिक गठबंधन को लगता है कि चुनाव आसानी से जीत जाने की खुशफहमी हो गयी है। जबकि ऐसा कतई नहीं है। गठबंधन होने से जमीनी हालात रातोंरात बदल नहीं गये हैं। वैसे भी बंगाल में हर चुनाव क्षेत्र में सीधी मुकाबला होता है और हद से हद मुकाबला तिकोणा होता है। बाकी उम्मीदवारों को फालतू वोट नहीं मिलते। वोट बंटने का सवाल ही नहीं होता। वोटबैंक का गणित भी बहुत बदला नहीं है।
इसके बावजूद जैसे आज सुबह हस्तक्षेप पर शेष नारायण जी ने लिखा है, हालात ममता बनर्जी के खिलाफ हैं और हवा भी उन्हीं के खिलाफ है। इस बार सारे आरोप शारदा चिटफंड की तरह रफा दफा नहीं होंगे, क्योंकि जनता के सामने एक विकल्प है और वोटरों को साफ-साफ लगता है कि ममता बनर्जी अपराजेय नहीं हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि मुकाबला कहीं कांटे का नहीं है।
बहरहाल प्रथम चरण के तहत चार अप्रैल को 18 विधानसभा सीटों के लिए हुए मतदान के दौरान सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और चुनाव आयोग की भूमिका पर माकपा ने एक बार फिर सवाल उठाया है। माकपा के राज्य सचिव डॉ सूर्यकांत मिश्रा ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस ने वोट लूट का नया तरीका ढूंढ निकाला है।
माकपा का आरोप है कि कई केंद्रीय बल के जवानों का यूनिफार्म पहन कई सिविक वोलेंटियर मतदान के दौरान सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का कार्य करते देखे गये।
18 सीटों पर हुए मतदान के प्रतिशत में इजाफे को लेकर मिश्रा ने दावा किया कि पहले चरण के तहत हुए मतदान में तृणमूल का सूपड़ा साफ हो गया है। हालांकि शेष मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष हो, यह बात चुनाव आयोग सुनिश्चित करे। करोड़ों रुपये सारधा चिटफंड घोटाले और नारद स्टिंग ऑपरेशन का जिक्र करते हुए माकपा के राज्य सचिव डॉ सूर्यकांत मिश्रा ने आरोप लगाया है कि राज्य में इससे पहले इस तरह की भ्रष्ट सरकार सत्ता में नहीं आयी थी।
सारधा चिटफंड घोटाले से नारद स्टिंग ऑपरेशन तक इस चुनाव में भ्रष्टाचार अन्य प्रमुख मुद्दों में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तृणमूल सरकार पर कटाक्ष किये जाने के मसले पर पूछे जाने पर माकपा नेता ने आरोप लगाया कि तृणमूल और भाजपा की नीति समान है।