हिंसा का खात्मा हिंसा से नहीं होगा, दिल की दरियादिली से होगा और वह है गांधी का रास्ता, संदर्भ मणिपुर
म्यामार में (जैसा कि सरकार कह रही है ) अपने सैनिकों ने मणिपुर के सात आतंकियों को मारा है। गिरोह और सरकार इस एक घटना को ऐसे प्रचारित कर रहे हैं जैसे वो किसी दुश्मन को मार आये हैं। अयोध्या मथुरा और काशी तक का ही भूगोल जानने वाले यह नहीं जानते कि मणिपुर भी भारत है, उनकी अपनी समस्याएं हैं। उन समस्याओं को समझना और उसका निराकरण करना केन्द्र सरकार की जिम्मेवारी है। अगर मणिपुर, मिजोराम, अरुणाचल के लोग अपने को देश की मुख्यधारा से कटा हुआ समझ रहे हैं, तो इसकी वजह भी होगी! अगर वे कहते हैं कि उनकी आवश्यकता की पूर्ति के लिए जो कुछ भी दिल्ली से चलता है उसे राजनीति और नौकरशाही बीच में ही खा जा रही है तो केन्द्र को उनकी बात पर गौर करना चाहिए। यह बातचीत का रास्ता है। भारत सरकार अब तक इस रास्ते पर चलती रही है, उसने बातचीत का रास्ता कभी भी बंद नहीं किया। बातचीत चलाइए और जहां अति हो जाय आप सैनिक कार्यवाही करिये, लेकिन तमीज तो मत तोड़िये। अपने ही नागरिक मार कर जश्न मनाना बेहूदी हरकत होती है।
गिरोहबाजों एक वाकया सुना रहा हूँ। सुन लो अकल आ जायेगी। जगमोहन तुम्हारे साथ है, उससे दरियाफ्त कर लेना। कश्मीर के अलगाववादियों के सवाल पर जम्मू में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गयी थी। जगमोहन वहाँ के गवर्नर थे। वी पी की सरकार थी। देवीलाल उप प्रधानमंत्री थे। साथ में कांग्रेस की ओर से राजीव गांधी पहुँचे थे। जगमोहन ने राजीव गांधी को जिस तरह तरजीह दिया, उसे देखते हुए जार्ज फर्नांडीस हत्थे से उखड़ गए और जगमोहन को उन्होंने जो कुछ अंगरेजी में दिया वह उन्हें याद होगा। जार्ज ने कहा था प्रोटोकोल का ख़याल रखो, देवीलाल जी यहाँ मौजूद हैं।
बहरहाल अगला वाकया सुनिए। अभी यह बैठक चल ही रही थी कि जगमोहन ने बताया कि फलां मस्जिद में तमाम आतंकवादी बैठे मीटिंग कर रहे हैं। जार्ज मीटिंग छोड़ कर चल दिये और चुपचाप अकेले उस मस्जिद में पहुँच गए, जहाँ आतंकी लोग मीटिंग कर रहे थे। जार्ज और आतंकवादियों के बीच तकरीबन एक घंटे तक वार्ता चली। इधर जार्ज को लेकर पूरा प्रशासन परेशान। जार्ज की मीटिंग में आतंकवादियों ने कहा आप जिस तरह हमसे बात करते हैं, यहाँ तक बे खौफ आये, दूसरे नेता क्यों नहीं आते ? और वो लोग जार्ज को छोड़ने वहाँ तक आये जहाँ कि जार्ज पर कोई ख़तरा हो सकता है।
इस पूरी घटना पर सबसे उम्दा बात राजीव जी ने कही थी - हमारे पास ऐसे नेता क्यों नहीं हैं ?
दोस्त ! यह सबसे बड़ा सवाल है जो आज देश को खाए जा रहा है। हिंसा का खात्मा हिंसा से नहीं होगा, दिल की दरियादिली से होगा और वह है गांधी का रास्ता जिसे तुमने गोली से उड़ा दिया था लेकिन वह आज तक लोगों के दिलों में ज़िंदा है। जमीन पर फ़ैल रही बारूद को वही अकेले साफ़ करेगा। सारी दुनिया उसे खोज रही है।
चंचल
चंचल। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, चित्रकार व समाजवादी आंदोलन के कर्णधार हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे चंचल जी रेल मंत्रालय के सलाहकार भी रहे हैं।