महाराष्ट्र एटीएस की साज़िश के तहत बड़ी खूबसूरती से मुस्लिम नौजवानों को फंसाया गया, बचाव के लिए वकील उपलब्ध कराते हुए एटीएस ने अपने पक्ष में कार्रवाई कराई, दिल्ली स्पेशल सेल, बेंग्लोर क्राइम ब्रांच और एनआईए की क्लीन चिट से परिजनों को राहत
रिपोर्ट – मुमताज़ आलम रिज़वी
अनुवाद– मसीहुद्दीन संजरी
नई दिल्ली : जर्मन बेकरी बम धमाके के मामले में हालांकि दिल्ली स्पेशल सेल, बेंग्लोर क्राइम ब्रांच (सीसीबी) और एनआईए ने मिर्जा हिमायत बेग को क्लीन चिट दे दी है, जिससे उसके परिजनों को काफी राहत है। फिर भी हिमायत बेग को अपराधी घोषित करते हुए जिस तरह से पुणे की सेशन कोर्ट ने 6 बार फांसी और 5 बार अजीवन कारावास की सज़ा सुनाई, वह आज भी चर्चा का विषय है। क्योंकि जर्मन बेकरी केस से भी बड़े-बड़े मामले सामने आए हैं, लेकिन इस तरह किसी को भी सज़ा नहीं सुनाई गई।
जमीअतुल उलेमा हिंद के जनरल सेक्रेटरी मौलाना सैयद महमूद मदनी के निर्देश पर जमीअतुल उलेमा महाराष्ट्र लीगल सेल की तरफ से मिर्जा हिमायत बेग की पैरवी करने वाले वचाव पक्ष के वकील तहव्वुर पठान से इंक़लाब ब्यूरो ने विशेष बातचीत की और सबसे पहले पूछा कि हिमायत बेग को 6 बार फांसी और 5 बार अजीवन कारावास की सज़ा क्यों सुनाई गई?
इस सवाल पर एडवोकेट पठान ने कहा कि विस्तार से बताने में काफी समय लगेगा, क्योंकि इस मामले की बोरे के हिसाब से फाइलें हैं। संक्षिप्त विवरण यह है कि हिमायत बेग को पुणे सेशन कोर्ट ने विभिन्न धाराओं में अपराधी माना और उसी हिसाब से विभिन्न धाराओं के अनुसार सज़ा तय की गई। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से 6 बार फांसी और 5 बार अजीवन कारावास का फैसला चौंकाने वाला है, लेकिन यह अलग अलग धाराओं के तहत सुनाया गया है, जो सम्भव है। उन्होंने कहा कि धारा 120, 121, 122, 124 और इसी तरह की अन्य धाराएं हैं जिनके तहत 11 सेक्शन बनते हैं और उसी को आधार बना कर हिमायत बेग को उक्त सज़ाएं सुनाई गई हैं।
एडवोकेट पठान ने कहा कि मेरे हिसाब से यह पूरा मामला ही फर्जी है और हिमायत बेग को झूठे केस में फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि यह बात मैं हवा में नहीं कह रहा हूं, बल्कि इसके तर्क मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहला तर्क यह है कि देश की तीन बड़ी जांच एजेंसियों की तरफ से स्पष्ट रूप से हिमायत बेग को क्लीन चिट दी जा चुकी है। दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, बेंग्लोर क्राइम ब्रांच और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) ने अपनी रिपोर्ट में माना है कि जर्मन बेकरी बम धमाके में मिर्जा हिमायत बेग शामिल नहीं था।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इन रिपोर्टों के आने से पहले पुणे सेशन कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया था यह एक अलग बहस है और शायद इसी वजह से अब हाईकोर्ट में हमारे केस को अब सुना जा रहा है। उन्होंने कहा कि दूसरा बड़ा तर्क यह है कि महाराष्ट्र एटीएस के दबाव में हिमायत बेग के जिन दोस्तों ग़ौस और रेहान ने झूठी गवाही दी थी, अब खुद उन्होंने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है और यह बात कही है हम पर दबाव था। हमें डराया धमकाया गया था, जिसकी वजह से हमने झूठी गवाही दी थी।
एडवोकेट पठान ने कहा कि हिमायत बेग और जमीअतुल उलेमा हिंद को बड़ी कामयाबी मिली है कि दो नौजवान अपनी दी गई गवाही के खिलाफ कोर्ट में गए हैं। उन्होंने कहा कि इन नौजवानों ने कोर्ट से सुरक्षा दिए जाने की भी अपील की थी, लेकिन उस पर अभी तक सुनवाई नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इन नौजवानों को खतरा है कि कहीं सच बोलने की वजह से उन पर दोबार हमला न कर दिया जाए।
एडवोकेट पठान ने कहा कि तीसरा तर्क यह है कि जब पुणे बार असोसिएशन ने सर्वसम्मति से हिमायत बेग का मुकदमा लेने से इनकार कर दिया तो एटीएस ने बड़ी खूबसूरती से हिमायत बेग को बचाव के लिए वकील उपलब्ध करवाया और पुरी सुनवाई को संदिग्ध तरीके से अति शीघ्र पूरी कर ली गई। उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही के बिना मुकदमा केवल शपथपत्र के आधार पर पूरा कर दिया गया, जो ग़लत है।
साभार ‘रोज़नामा इंक़लाब’ उर्दू लखनऊ

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