सपा सरकार के दबाव में सीबीआई जाँच के लिये डीवोपीटी ने अब तक नहीं जारी किया नोटिफिकेशन- रिहाई मंच
सामाजिक कार्यकर्ता मज़हर आजाद बैठे आज क्रमिक उपवास पर
खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिये छब्बीसवें दिन भी जारी रहा रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना
लखनऊ 16 जून। खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी, आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट पर सरकार द्वारा एक्शन टेकन रिपोर्ट जारी कर दोषी पुलिस व आईबी के अधिकारियों को गिरफ्तार करने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को तत्काल रिहा करने की माँग को लेकर रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना छब्बीसवें दिन भी जारी रहा। आज क्रमिक उपवास पर बस्ती से आये सामाजिक कार्यकर्ता मज़हर आजाद बैठे।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 19 मई को कार्मिक एवम् प्रशिक्षण विभाग (डीवोपीटी) सीबीआई जाँच के लिये पत्र लिखा, परन्तु दिल्ली स्पेशल पुलिस स्टेबलिशमेन्ट एक्ट की उक्त धारा 5 के अन्तर्गत डीवोपीटी द्वारा सीबीआई को अधिसूचना जारी नहीं की गयी, जो की सीबीआई द्वारा जाँच अपने हाथ में लेने के लिये आवश्यक है। यूपी सरकार ने डीएसपीई एक्ट के सेक्शन 6 के अनुसार विवेचना के लिये अपनी सहमति का पत्र दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा सरकार अपनी एजेंसियों से तेजी से जाँच करवाकर दोषियों को बचाना चाहती है और इसी फिराक में डीवोपीटी विभाग ने अब तक नोटिफिकेशन नहीं किया। ऐसे में खालिद के न्याय के लिये तत्काल प्रदेश सरकार द्वारा करायी जा रही जाँच की कार्रवाई तुरन्त समाप्त कर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की जा रही विवेचना को अविलम्ब रोककर सीबीआई द्वारा तुरन्त विवेचना कराया जाना सुनिश्चित किया जाय। शासन एवम् प्रशासन के स्तर पर जनसंचार साधनों के माध्यम से मीडिया ट्रायल करके जाँच को प्रभावित करने की कोशिश बन्द की जाये। न्याय हित में यह आवश्यक है कि उत्तर प्रदेश सरकार सीबीआई को समस्त तथ्यों को प्रेषित करते हुये तत्काल सीबीआई जाँच कराना सुनिश्चित करे।

धरने को सम्बोधित करते हुये इण्डियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि रिहाई मंच का धरना सत्ता द्वारा मुस्लिमों पर नीतिगत स्तर पर किये जा रहे हमलों का एक जवाब है। खुफिया एजेंसियों ने देश में साम्प्रदायिक विभाजन का गन्दा खेल खेला है। अब आईबी समेत सभी खुफिया एजेन्सियों का यह खेल बेनकाब हो गया है। जो एजेन्सी देश की सुरक्षा के लिये बनी हो और वो इसके उलट काम कर रही हो उसे वजूद में रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि आगामी मानसून सत्र में अगर मुस्लिम विधायकों ने खालिद और आरडी निमेष पर सवाल नहीं उठाया तो जनता उनके क्षेत्रों में उनको घेरने का काम करेगी।

फैजाबाद से आये अधिवक्ता नदीम जिन पर पिछले दिनों सपाई व हिन्दुत्वादी संगठनों के गुण्डों द्वारा जान लेवा हमला किया गया था, ने कहा कि यह मामला किसी मुस्लिम-हिन्दू का नहीं है। संघ के गुण्डों ने खालिद के मुकदमे की पैरवी में लगातार अवरोध उत्पन्न किया और प्रशासन चुप्पी साधे रहा। खालिद की हत्या के बाद फैजाबाद में हुये प्रदर्शनों के बाद मुझ पर और मेरे साथियों पर हमला किया गया, हम जिस स्थान पर कोर्ट में बैठते हैं उस स्थान पर तोड़-फोड़ की गयी और फैजाबाद बार एसोसिएशन ने हमारी सदस्यता खत्म कर दी। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता कि जब न्याय के परिसरों में साम्प्रदायिक जेहनियत का बोलबाला हो और उसको प्रशासन का संरक्षण हो तो हमारी हिफाजत कैसे हो सकती है।

धरने को सम्बोधित करते हुये मुस्लिम मजलिस के प्रदेश अध्यक्ष एखलाख अहमद ने कहा कि सपा सरकार जिसने चुनावों में वादा किया था कि अगर उसकी सरकार बनेगी तो वो आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम युवकों को रिहा करेगी, उसकी वादा खिलाफी सिर्फ मुस्लिम समाज से नहीं है बल्कि इस पूरे लोकतान्त्रिक ढाँचे से है।

बरेली से आये मुस्लिम मजलिस के नेता वसी अहमद ने कहा कि इस सरकार में दंगों की बाढ़ आ गयी है और मैं जिस शहर बरेली का रहने वाला हूँ, वहाँ भी इस सपा सरकार के राज में दो-दो बड़े दंगे हो चुके हैं। जहाँ दो-दो दिनों तक शहर जलता रहा पर इस प्रदेश के मुख्यमन्त्री को यह जरूरी नहीं लगा कि वो हमारा हाल ख्याल ले।

धरने को सम्बोधित करते हुये जमात-ए-इस्लामी हिन्द के मौलाना खालिद ने कहा कि सरकार ने खालिद की मौत के बाद आन्दोलन के दबाव में आरडी निमेष रिपोर्ट को आधे अधूरे मन से मजबूरी में स्वीकार कर लिया, लेकिन दोषी पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिये जिस तरह से पैंतरेबाजी कर रही है उससे पता चलता है कि सरकार का नैतिक रूप से कितना पतन हो गया है।

धरने को सम्बोधित करते हुये पिछड़ा महासंघ के अध्यक्ष शिवनारायण कुशवाहा और भारतीय एकता पार्टी के अध्यक्ष सैयद मोईद ने कहा कि रिहाई मंच के इस अनिश्चित कालीन धरने को चन्द दिनों में एक महीना हो जायेगा, जिस तरीके से सरकार ने खालिद के न्याय के सवाल पर जिस तरीके से आपराधिक चुप्पी साध रखी है वो बताता है कि सरकार इस मसले पर जनता के साथ छल कर रही है। पर यह धरना चलता रहेगा हम मई-जून की कड़ी धूप में भी इस विधान सभा धरना स्थल पर बने रहे और अब बरसात में भी बने रहेंगे। जब तक न्याय नहीं मिलता तब तक धरना चलता रहेगा।

धरने का संचालन रिहाई मंच आजमगढ़ के प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने किया। धरने में कौमी एकता दल के तारिक शमीम, योगेन्द्र सिंह यादव, लक्ष्मण प्रसाद, एहसानुल हक मलिक, डॉ. कासिफ सिद्दीकी, वसी अहमद बरेली, कानपुर से मो0 इकबाल, सोशलिस्ट फ्रंट ऑफ इण्डिया से जिया उल्ला सिद्दीकी, आफाक अहमद, जैद फारुकी, आरिफ महफूज, नदीम एडवोकेट, जुबैर जौनपुरी, मो. समी, मोतीलाल पाठक, खुर्शीदुर्रहमान, नसीब रब्बानी, हाफिज अब्दुल जलाल, इशहाक, कमरुद्दीन कमर, राजीव यादव आदि ने शिरकत की।