देवेद्र सुरजन

दस दिन बाद फेसबुक पर लौटा तो पता चला कि भड़ास के सूत्रधार श्री यशवंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है. आरोप भी मामूली और किंचित अविश्वसनीय भी. लेकिन गिरफ़्तारी की खबर दुखी कर गई.यह कदाचित मानने को मन नहीं करता कि जिसे यशवंत जी जानते तक न हों उससे २०००० रुपयों की मदद मांग बैठे और देर होने पर आरोपकर्ता की युवा पत्नी को मां कह डाले. युवा स्त्रियों को उनकी आयु के मुताबिक सम्मान ना देकर या ज़रूरत से ज्यादा सम्मान देना किसी भी युवा पति को खटक सकता है और गिरफ़्तारी के पीछे यह एक बड़ा कारण हो सकता है. कोई चालीस बरस पहले हमारे लंगड़े पंडित जी ने सार्वजनिक नल पर पानी भर रही युवा स्त्री को बुआ जी कह दिया था तो ऐसा बवाल मचा कि पंडित जी की दूसरी टांग जाते जाते बची. पहले पानी भर लेने की जल्दी जब इतना बड़ा गुल खिला सकती है तो किसी सुप्तावस्था युवा महिला को आधी रात जगाकर २०००० रुपयों की मांग करना नींद में खलल डालने से भी बड़ा अपराध बनता है. यशवंत जी के बारे में यह सुन भी रहे थे और एक-दो लेख और फेसबुक टिप्पणियों में वे साफ साफ़ मान रहे थे कि उन्हें पीने का शौक है, एक और वेब पत्रिका जिसका नाम भी भड़ास ————- है में भी यह तारीफ़ १० दिन पहले ही छपी थी कि यशवंत जी मुद्रा प्राप्ति के लिए दिन-रात या चौघडिया का विचार नहीं किया करते. कुछ लेखों में यशवंत जी की तुलना क्रांतिकारियों से की गई है और किसी में महात्मा गांधी से भी. मेरे विचार में उन परलोकवासी हस्तियों से आज की बड़ी से बड़ी हस्ती भी मुकाबला करने के पहले सौ बार सोचेगी सिवाय एक विजय माल्या के जो मानते हैं कि उनकी बनाई शराब को बेचने के लिए गांधी जी के नाम का उपयोग करने में कोई बुराई नहीं है. यह शोध का विषय हो सकता है कि श्री यशवंत जी ने माल्या द्वारा उत्पादित शराब का सेवन करके सी चेनल के कथित संपादक / मालिक और उनकी निद्रालीन पत्नी से रुपये मांगे या फिर उन लोगों ने माल्या की बनाई शराब पीकर इतने उदार हो गए कि मामूली कारण के पुलिस प्रकरण बन जाने से यशवंत भाई की तुलना गांधी और अन्य क्रांतिकारियों से कर बैठे. जो भी हो यशवंत जी के प्रति यह अतिरेक लेखन मीडिया में उनके हितेषियों की बड़ी संख्या को इंगित कर रहा है. भड़ास में नित्यप्रति पत्र कर्मियों के दुःख दर्द को उजागर करने का इतना लाभ उनको मिलना स्वाभाविक ही है. श्री यशवंत जी की गिरफ़्तारी के सन्दर्भ में नीरा राडीया का नाम रोचक ढंग से सामने आया है. लगभग साल भर से जबसे नीरा राडिया का नाम स्पेक्ट्रम दलाली के मध्यस्थ के रूप में सामने आया है तबसे बिना किसी लिंगानुभेद के मैंने हर दलाल को किसी न किसी का नीरा राडिया उसी तरह कहना शुरू कर दिया है जिस तरह हर भ्रष्टाचार को बोफोर्स कहा जाता था. अब नीरा राडिया का पेंच यदि सही है तो इसे सत्य साबित करने और इस पेंच को ढीला करने के लिए बराबरी के स्क्रू ड्राईवर की जरूरत पड़ेगी. मैं नहीं समझता कि मध्यपूर्व में जन्मी यह महत्वाकांक्षी महिला यशवंत सिंह पर हाथ डालेगी लेकिन हड़बड़ी में ऐसा वह वाकई कर गई हो तो पत्रकार बिरादरी को एक होकर इस दलाल औरत का डेरा उखाड़ने लग जाना चाहिए. गैर भारतीय होते हुए भी उसका देश में टिके रहना आश्चर्यजनक तो है ही देश के लिए नए संकट की अग्रिम सूचना भी है. नीरा राडिया जब से एक्सपोज हुई है उसके एक-दो से अधिक फोटो देखने में नहीं आये जिससे ज़ाहिर होता है कि वह कितने गोपनीय तरीके से अपने काम को अंजाम देती है. वैसे यह खुशी की बात है कि रतन टाटा, अनिल अम्बानी, रुईया बंधुओं और दूसरे टेलीकाम दिग्गजों से अपनापा रखने वाली नीरा राडिया अपने यशवंत भाई से भी वास्ता रखती है, भले ही दुश्मनी का.

उक्त आलेख पर फेसबुक पर आई दो टिप्पणियां

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Sandeep Verma
‎Devendra Surjan नीरा राडिया महज एक नाम नहीं है ,एक सम्पूर्ण संश्था है . जब हम नीरा राडिया का नाम लेते हैं तो हमें पूरी संस्था के प्रतिनिधित्व की बात करते हैं . वैसे देखा जाय तो नीरा राडिया ने तो अपनी कम्पनी भी बंद कर दी है और वे हरिद्वार में अम्बुलेंस चलवा कर रोगियों की सेवा कर रही हैं .मगर इससे जिस संस्था को नीरा राडिया ने बंद कर दिया है उस संस्था के कार्य्क्रालाप दुसरे नाम से दुसरे लोग और पुराने मालिकों के साथ कर ही रहे हैं .
2 hours ago · Edited · Like

Devendra Surjan
‎Sandeep Verma jii , लगता है आप नीरा राडिया के विषय में ताज़ा जानकारी रखते हैं.यह तथ्य रुचिकर है कि अपने पति और बच्चों को छोड़कर कभी अपनी स्वयं की विमानन कंपनी स्थापित करने की चाहत रखने वाली नीरा राडिया हरिद्वार में मरीजों की सेवा कर रही है और एम्बुलेंस चलवा रही है. वियोग में तुलसी दास जी जब अचानक ही अपनी पत्नी रत्ना के पास अपनी ससुराल पहुँच गए तो रत्ना ने उन्हें उलाहना देते हुए कहा था कि काश तुम इतना ही आसक्ति भगवान राम से रखते , और वह क्षण था कि तुलसी दास जी का जीवन राममय होने लगा और रामचरित मानस जैसी कृति वे मानव जाति को दे पाए. मैं सोचता हूँ कि नीरा राडिया को भी कोई ऐसा मिलता जो उन्हें समझा पाता कि छल छिद्र से यदि मन भर गया हो तो अपने पति और बच्चों के पास , अपने देश वापिस जाएँ और मरीजों की सेवा का यह थोथा नाटक बंद करें. यह मानना आसान नहीं है कि इतनी महत्वाकांक्षी महिला का ऐसा ह्रदय परिवर्तन होगा कि बड़ों बड़ों की दलाली करने वाली ज़रूरतमंदों को दवा देने का काम करने लग जायेगी. आपका यह कहना ठीक है कि नीरा राडिया दलाली और भ्रष्टाचार का पर्याय हो गई है. इसीलिए मैंने उनकी तुलना बोफोर्स शब्द से की थी . लेकिन श्री यशवंत सिंह की गिरफ्तारी में नीरा राडिया का नाम आना यह इंगित कर रहा है कि वह अपने मूल पेशे से अलग नहीं हुई है और मरीजों की सेवा करना अपनी छवि सुधारने का प्रयास मात्र है. टाटा ,अम्बानी भी एक तरफ बड़े बड़े सौदों को हथियाने नीरा राडिया जैसी हस्तियों की सेवाएं लेते हैं और दूसरी तरफ देश के प्रमुख अस्पतालों का संचालन करते हैं जहाँ असाध्य बीमारियों का इलाज़ किया जाता है.उनकी इतर सामाजिक गतिविधियों को भी इसी के साथ जोड़कर देखा जा सकता है. तो मानव सेवा के मूल में भी बडे कारोबार की मंशा कुलांचें भरती रहती है. नीरा की मति भी इससे अलग नहीं है लेकिन अपने नियोक्ताओं की नक़ल करते देख गंगू तेली वाली कहावत याद आती है हालांकि टाटा बिडला अम्बानी को राजा भोज की संज्ञा देने का मेरा अभीष्ट नहीं है. नीरा राडिया ने अपनी कंपनी बंद कर दी या दूसरों को सौंप दी , इससे क्या फर्क पड़ता है . टाटा सरीखों को तो अपना कारोबार चलाते रहना है और जब तक इन जैसे हैं तब तक नीरा राडिया न सही , कोई और सही.
about an hour ago · Like