मुलायम को क्लीन चिट देने वाले मौलाना आये निशाने पर
मुलायम को क्लीन चिट देने वाले मौलाना आये निशाने पर
बेगुनाह खालिद पर से आतंकी का ठप्पा हटवाने की जिम्मेवारी अवाम की,
बड़ी तादाद में शामिल में घेरा डालो-डेरा डालो रिहाई आंदोलन में- मोहम्मद शुऐब
लखनऊ, कानपुर समेत प्रदेश में विभिन जगहों पर
सपा और पुलिस द्वारा फाड़े जा रहे हैं रिहाई मंच के पोस्टर,
प्रोफेसर जीएन साईबाबा की गिरफ्तारी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला
15 सितंबर को रिहाई मशाल जुलूस से आगाज होगा विधानसभा पर घेरा डोला-डेरा डालो आंदोलन का
लखनऊ, 13 सितम्बर 2013, रिहाई मंच धरना का 115 वां दिन। रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा है कि 16 सितंबर से यूपी में विधान सभा सत्र चलने वाला है। यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने वादे के मुताबिक निमेष कमीशन की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखें।
रिहाई मंच 15 सितंबर की शाम को रिहाई मशाल मार्च निकालेगा और 16 सितंबर से भूख हड़ताल करेगा।
श्री शुऐब ने कहा कि हम प्रदेश की अवाम से इंसाफ की इस जंग में अधिक से अधिक तादाद में शिरकत करने की अपील करते हैं। आज जब मौलाना खालिद हमारा बच्चा हमारे बीच नहीं है तब यह जिम्मेदारी हमारी और बढ़ जाती है कि उस बेगुनाह के ऊपर लगे आतंक के ठप्पे को हम हटवायें और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भिजवायें।
रिहाई मंच के प्रवक्ताओं राजीव यादव और शाहनवाज आलम ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, जनवादी बुद्धिजीवी और राजनीतिक कार्यकर्ता जीएन साईबाबा की एनआईए, दिल्ली और महाराष्ट्र पुलिस द्वारा उनके दिल्ली स्थित आवास से माओवादी बताकर की गयी गिरफ्तारी जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर कॉर्पोरेट परस्त सरकारों द्वारा खुलेआम हमला है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी जेएनयू के छात्र और संस्कृतिकर्मी हेम मिश्रा और चर्चित मानवाधिकार नेता, पत्रकार और राजनीतिक बंदियों की रिहाई के लिये काम करने वाले प्रशांत राही को भी इसी तरह जनता के आंदोलनों से सहानुभूति रखने वाले बुद्धिजीवियों की आवाज दबाने के लिये गिरफ्तार किया गया। जिससे सरकारों की जनविरोधी मानसिकता उजागर होती है। रिहाई मंच तत्काल प्रोफेसर साईबाबा, हेम मिश्रा और प्रशांत राही की रिहाई की माँग की।
इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि जिस तरीके से आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट को सदन में रखने की माँग को लेकर लगाये जा रहे रिहाई मंच के पोस्टरों को पूरे प्रदेश में कहीं पुलिस तो कहीं सपा के लोग फाड़ रहे हैं उससे साफ हो गया है कि सपा बेगुनाहों की रिहाई पर वादा खिलाफी और दंगों के चलते खिसकते जनाधार से बौखला गयी है। आखिर जगह-जगह चाहे वो लखनऊ हो या कानपुर में रिहाई मंच के पोस्टरों पर आपत्ति करने वाले पुलिस प्रशासन को यह बताना चाहिये कि सरकार द्वारा गठित एक न्यायाधीश की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की माँग पर वह किस आधार पर आपत्ति कर रही है। सिर्फ इसलिये कि वो किसी मुसलमान लड़के की बेगुनाही का सबूत है। उन्होंने कहा हम यूपी के प्रशासन से कहना चाहेंगे कि वो ज्यादा परेशान न हो, रिहाई मंच का यह आंदोलन उत्तर प्रदेश में सैकड़ों पुलिस वालों को जेल की सलाखों के पीछे भिजवायेगा जिन्होंने आतंकवाद के नाम पर मुसलमानों की फर्जी तरीके से गिरफ्तारी की। आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट ही 35 से अधिक आईपीएस अधिकारियों को जेल की सलाखों के पीछे भिजवा देगी और आईबी के ऐसे बड़े अधिकारियों के चेहरे पर से नकाब हटायेगी जिन्होंने फर्जी तरीके से न सिर्फ खालिद मुजहिद और तारिक कासमी की गिरफ्तारी करवाई बल्कि आईबी के लोगों ने ही प्रदेश में आतंकी वारदातों को अंजाम देने में भी भूमिका निभाई।
धरने के समर्थन में आये जामा मस्जिद उन्नाव के सदर इमाम जमीर अहमद खान ने कहा कि मुजफ्फर नगर ही नहीं पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुकूमत की नाकामी और आपराधिक चुप्पी से मुसलमानों पर जो कहर बरपा किया गया है वह कोई नयी घटना नहीं है इससे पहले भी पूरे उत्तर प्रदेश में चालीस से अधिक बड़े-बड़े दंगों में सपा संरक्षित सांप्रदायिक ताकतों द्वारा मुसलमानों का जो जानी और माली नुकसान हुआ है उसे प्रशानिक चूक और अधिकारियों के सर ठीकरा फोड़कर सरकार अपनी नाकामी नहीं छुपा सकती। कुछ कथाकथित मुस्लिम लीडर और सत्ता परस्त उलेमा अपने जाती फायदे के लिये समाजवादी पार्टी व मुलायम सिंह के गुनाहों को धुलने के लिये अखबारी बयान छपावाकर मुसलमानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। इसी तरह कल्याण सिंह के हिमायत में भी यही ड्रामे बाजी कराई गयी थी। मुलायम सिंह कह रहे हैं कि मुजफ्फर नगर दंगे से हमने सबक सीखा। हम इस मंच से मुलायम से पूछना चाहते हैं कि वो पिछले पौने दो साल के दंगों से क्यों नही सबक ले पाये। आपके इंसाफ का इंतजार कोसी कला, अस्थान, फैजाबाद, प्रतापगढ़, बरेली समेत सैकड़ों जगहों पर हुई सांप्रदायिक हिंसा की वारदातों के बाद मुसलमान मायूस हो गया है। वैसा ही वादा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमानों से किया जा रहा है।
अब्दुल हलीम सिद्दीकी ने कहा कि ऑल इंडिया सुन्नी बोर्ड के सदर मौलाना मुश्ताक को बताना चाहिये कि उन्होंने एसएमए काजमी और दरगाह शाहमीना शाह के सज्जादानशीन पीरजादा राशिद अली मिनाईं के साथ मिलकर मुलायम सिंह के सेक्यूलर होने और मुजफ्फनगर में हुये दंगों पर उन्हें क्लीनचिट देने का काम किन तथ्यों के आधार पर किया और इस झूठ के लिये उन्हें सपा से कितने पैसे मिले हैं और यह पैसा उन्हें चेक से मिला है या नकद।
रिहाई मंच के धरने के समर्थन में बाराबंकी से आए मोहम्मद शाकिर बहलीम ने कहा कि जनता वोट देकर अपना रहनुमा चुनती है लेकिन हुकूमत में बैठे हुये हमारे रहनुमाओं ने इंसाफ करना बंद कर दिया। आज केन्द्र सरकार हो या प्रदेश की सरकार मुसलमानों के साथ कोई भी इंसाफ नहीं कर रहा है। आज आतंकवाद के नाम पर सैकड़ों बेगुनाह नौजवान जेलों में बन्द हैं। जिनको इंसाफ नहीं मिल रहा है। रिहाई मंच ने मजलूमों की जिस लड़ाई को छेड़ रखा है और आज जिसके 115 दिन हो चुके हैं, इसने इंसाफ की लड़ाई में एक नई तारीख रच दी है कि सरमाएदारी की दुनिया में आज भी इंसाफ के लिये लोग जान लगा देंगे। हुकूमतों की बौखलाहट साफ कर रही है कि रिहाई मंच का धरना इंसाफ दिलाकर ही मानेगा।
धरने के समर्थन में आजमगढ़ से आये मुस्लिम मजलिस के नेता शाहआलम शेरवानी ने कहा कि मुलायम सिंह यादव जो मेरठ और मलियाना के 41 मुस्लिम नौजवानों जिन्हें सांप्रदायिक पीएसी ने कत्ल करके नहर में डाल दिया था और जांच कमीशन की रिपोर्ट के हिसाब से उन्होंने जो बेमन से कार्रवाई की उससे उनके साम्प्रदायिक जेहनियत को मुसलमान पहले ही समझ चुका है। जहाँ लगभग सत्रह पीएसी वालों पर 302 का मुकदमा लगा और वो आज भी सर्विस कर रहे हैं और केस कहाँ हैं किस स्थिति में है उसका पता नहीं। जब मुलायम कांग्रेस का पाप धोने में इतने मशगूल हो गये कि उन बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों जिन्हें पीएसी ने कत्ल कर दिया उनको न्याय से वंचित कर दिया तब वो मुजफ्फर नगर में क्या करेंगे इसको समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को भूलना नहीं चाहिये कि उन्होंने अगर वादे के मुताबिक आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में कोई कोताही की और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की और हमारे आजमगढ़ के तारिक कासमी की रिहाई नहीं की तो इसका खामियाजा सपा को भुगतना पड़ेगा।
प्रतापगढ़ से आये शम्स तबरेज खान ने कहा कि प्रतापगढ़ के अजगरा रानीगंज की रामपुर खजूर गांव में मुस्लिम नाबालिग से जिस तरीके से गाँव के सवर्ण जाति के लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया और दोषियों को बचाने के लिये जिस तरह पुलिस ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की उससे साफ हो जाता है कि सपा सरकार सवर्ण और सामंती मानसिकता के लोंगों के साथ है न कि मजलूमों के साथ।
यूपी की कचहरियों में 2007 में हुये धमाकों में पुलिस तथा आईबी के अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से फँसाये गये मौलाना खालिद मुजाहिद की न्यायिक हिरासत में की गयी हत्या तथा आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट पर कार्रवायी रिपोर्ट के साथ सत्र बुलाकर सदन में रखने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को छोड़ने की माँग को लेकर रिहाई मंच का धरना शुक्रवार को 115 वें दिन भी लखनऊ विधानसभा धरना स्थल पर जारी रहा।
धरने में भागीदारी आंदोलन के पीसी कुरील, नेशनल पीस फेडरेशन के हारिश सिद्दीकी, तारिक शफीक, जैद अहमद फारुकी, मो0 शुएब, मोहम्मद सुलेमान, सैयद मोइद अहमद, शाह आलम शेरवानी, मुख्तार अहमद, आमिर महफूज, जमीर अहमद खान, अब्दुल हलीम सिद्दीकी, मो0 इसहाक नदवी, पिछड़ा समाज महासभा के एहसानुल हक मलिक, इशाउल्ला सिद्दीकी, शम्स तबरेज खान, गुफरान सिद्दीकी, शाहनवाज आलम और राजीव यादव शामिल रहे।


