मोदी को है जनता से ज्यादा मन्दिर की चिन्ता - अखिलेन्द्र
मोदी को है जनता से ज्यादा मन्दिर की चिन्ता - अखिलेन्द्र
उत्तराखण्ड आपदा के लिये जबाबदेह नीतियों पर मौन है काँग्रेस-भाजपा
लखनऊ 27 जून। फेकू के नाम से मशहूर हो रहे गुजरात के मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा उत्तराखण्ड और हिमाचल के निवासियों और यात्रियों पर आयी आपदा के समय वहाँ केदारनाथ मन्दिर के पुनर्निर्माण करने की घोषणा की जबर्दस्त आलोचना हो रही है।
आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने मोदी को आड़े हाथों लेते हुये कहा है कि यह घोषणा दिखाती है कि वह जनता के प्रति संवेदनहीन है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के वक्त वहाँ की पीडि़त जनता के प्रति संवेदना दिखाने और इस आपदा में अभी भी फँसे हुये हजारों देशवासियों के जीवन की रक्षा और उनके पुनर्वास के लिये सभी संसाधनों का उपयोग करने की जगह मोदी मन्दिर के पुनर्निर्माण की बात उठा रहे हैं जो उनकी जनता के प्रति संवेदनहीनता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि जहाँ तक सवाल केदारनाथ मन्दिर के पुनर्निर्माण का है उसके लिये मोदी जैसों की कोई आवश्यकता नहीं है यह काम तो वहाँ के आस्थावान तीर्थयात्रियों के द्वारा आये चढ़ावे के बदौलत ही हो जायेगा।
अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि वहाँ बुनियादी सवाल है कि भूमफिया, बिल्डरों, कॉरपोरेट, ठेकेदारों और राजनेताओं व नौकरशाहों के गठजोड़ द्वारा बिना किसी पर्यावरण और सुरक्षा मानकों की चिन्ता किये पचहत्तर प्रतिशत इलाको में हाइड्रो पावर प्लांट बना दिये गये, लगातार नदियों के पेटे से बालू का अवैध खनन किया गया और नदियों के किनारे होटल और आरामगृहों का निर्माण किया गया है। प्रकृति के आक्रोश की दिल दहला देने वाली यह त्रासदी पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुँचाने वाली कॉरपोरेट विकास की इसी नीति का ही परिणाम है और इस नीति पर काँग्रेस और भाजपा दोनों के ही नेतागण मौन धारण किये हुये है। इतना ही नहीं ऐसी त्रासदी को रोकने की तैयारी में कमी के सम्बंध में दो माह पूर्व ही सीएजी ने भी अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी थी पर आपराधिक लापरवाही करते हुये उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। यहीं नही दिसम्बर 2007 के बाद आज तक राज्य दैवी आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की बैठक तक नहीं की गयी, जबकि इस दौरान भाजपा और काँग्रेस दोनों की ही सरकारें वहाँ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवेहलना कर जिन लोगों ने पर्यावरण और आम आदमी की ज़िन्दगी के लिये खतरा और इस प्रकार की त्रासदी को पैदा किया है उन लोगों की शिनाख्त कर दण्डित किया जाना चाहिये और जेल भेजा जाना चाहिये। उन्होंने केन्द्र सरकार से तत्काल इस त्रासदी की व्यापकता को देखते हुये इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और जनहितकारी, पर्यावरणपक्षीय नयी खनन व पर्यावरण नीति की घोषणा करने की माँग की।


