मोसाद जैसी कुख्यात इजायली खुफिया एजेंसियाँ बना रही हैं देश की सुरक्षा नीतियाँ
मोसाद जैसी कुख्यात इजायली खुफिया एजेंसियाँ बना रही हैं देश की सुरक्षा नीतियाँ
आजादी की 66 वीं वर्षगांठ पर आतंकवाद के नाम पर पीड़ित व प्रदेश के दंगा पीड़ित पहुंचेंगे लखनऊ विधानसभा- रिहाई मंच
वरुण गांधी और तोगड़िया को बचाकर सपा ने पहले ही साफ कर दिया है अपना मुस्लिम विरोधी चेहरा
लखनऊ 12 अगस्त 2013। मौलाना खालिद के हत्यारों की गिरफ्तारी और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई सवाल से भाग रही सरकार मानसून सत्र बुलाने की हिम्मत नहीं कर पा रही है।
यह बात कहते हुये रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि पड़ोस के जिले कानपुर, सीतापुर समेत प्रदेश में बहुत से ऐसे मुस्लिम युवक हैं जो आतंकवाद के झूठे आरोपों में फँसाए गये थे, जो सालों साल जेलों में रहने के बाद बरी हुये हैं पर आज तक सरकार ने उनके मुआवजे और पुनर्वास की सुध नहीं ली और इधर सरकार के प्रवक्ता हैं रोज सरकार की उपलब्धियों के तीर छोड़ते नजर आते हैं। सपा सरकार हो या कोई सरकार इस बात को जान लेना चाहिए कि इंसाफ के बिना लोकतंत्र नहीं स्थापित किया जा सकता।
रिहाई मंच के प्रवक्ता राजीव यादव ने बताया कि मौलाना खालिद को न्याय दिलाने व आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई के लिये रिहाई मंच के धरने के 86 वें दिन आजादी की 66 वीं वर्षगांठ 15 अगस्त को आतंकवाद के नाम पर पीड़ित और दंगा पीड़ित अपने सवालों के साथ विधान सभा पर पहुंचेगे। उन्होंने बताया कि 23 नंवबर 2007 यूपी कोर्ट ब्लास्ट, 31 दिसम्बर 2007 तथा 1 जनवरी 2008 के बीच की रात रामपुर में हुये कथित आतंकी हमले, सहकारिता भवन लखनऊ में 15 अगस्त 2000 को हुये धमाके, श्रमजीवी एक्सप्रेस बम काण्ड, बाबरी मस्जिद/ राम मंदिर परिसर में हुआ कथित आतंकी हमला, वाराणसी में संकटमोचन-कैंट स्टेशन-दश्वाश्वमेध घाट धमाका, राहुल गांधी पर 2007 में हुये कथित आतंकी हमले, जून 2007 में लखनऊ में कथित आतंकी वारदात के नाम पर की गयी मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी, 23 दिसम्बर 2007 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती को मारने के नाम पर चिनहट लखनऊ में हुये आतंकवाद के नाम पर कथित एनकाउंटर, गोरखपुर में हुये सीरियल धमाकों समेत अन्य आतंकी वारदातों के सवाल को प्रमुखता से उठाया जायेगा कि सरकार अगर इंसाफ करना चाहती है तो प्रदेश में हुयी समस्त आतंकी घटनाओं की जाँच एनआईए से कराये।
प्रवक्ता ने कहा कि सपा के लोग जो बार-बार कहते हैं कि उनके शासन में कोई गिरफ्तारी नहीं हुयी थी तो हम 15 अगस्त को सपा सरकार में 13 मई 2012 को एटीएस द्वारा उठाये गये सीतापुर के निवासी शकील समेत चार और अन्य मामलों समेत पिछली मुलायम सरकार में इलाहाबाद के वलीउल्ला और मेरठ के डॉ. इरफान, मो. नसीम, शकील अहमद, मो. अजीज के सवालों को भी उठायेंगे। इसके अलावा प्रदेश में हुये दंगों के पीड़ित भी उस दिन शामिल होंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण प्रसाद और इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि जिस तरीके से कंवल भारती का बयान आया है कि सपा सरकार के मंत्री आजम खान और उनके लोग इतना परेशान कर दिये हैं कि वो आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं, इस बात के लिये सपा की जितनी निंदा की जाये वो कम है। उन्होंने कहा कि जब-जब पीलीभीत में मुसलमानों को बीमारी कहने वाले वरुण गांधी का सवाल आता है, जिसने कहा था कि चुनाव बाद मुसलमानों की कमल गर्दन काटेगा तो आजम का मुंह सिल जाता है और वरुण को बचाने में पीलीभीत से आने वाले सपा के मंत्री रियाज अहमद की भी भूमिका तहलका के स्टिंग ऑपरेशन में सामने आ गयी। इसी तरह प्रतापगढ़ के अस्थान गांव में रघुराज प्रताप सिंह के पिता उदय प्रताप सिंह के रचे गये षडयंत्र में प्रवीण तोगड़िया आता है और अस्थान में दंगे के बाद लुटे-पिटे घरों को फिर से जलवा देता है, जिसकी रिहाई मंच लंबे समय से सीबीआई जाँच की माँग कर रहा है। पर अपने को मुस्लिम हितैषी होने का सबूत देने वाली सपा सरकार तोगड़िया पर एफआईआर दर्ज नहीं होने देती है। पर जब बात किसी दलित लेखक की आती है जिसने आजम खान जैसे लोगों की कारस्तानी जग जाहिर कर दी तो सरकार द्वारा उसका उत्पीड़न शर्मनाक है। रिहाई मंच के इस मंच से माँग हैं कि कंवल भारती पर से तत्काल मुकदमा वापस लिया जाये और उनकी जो भी किताबें और कम्प्यूटर या अन्य उनकी बौद्धिक सम्पदा सामग्री को अराजक पुलिस उठा ले आई है उसे तत्काल कंवल भारती के सुपुर्द किया जाये।
रिहाई मंच के नेता अनिल आजमी और बब्लू यादव ने सभा को संबोधित करते हुये कहा कि आज पीपी पाण्डे जैसा खूनी गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद नाटकीय तरीके से अस्पताल से गायब हो जाता है। हम जानते हैं कि पूरे गुजरात में आज पुलिस की सांप्रदायिक जहनियत न केवल मोदी के एजेंट की तरह काम करने की है बल्कि वह उनके कृपापात्रों को कानून से ऊपर उठकर संरक्षण देती है। आज जब यह साफ है अपने कुकृत्यों पर फंस जाने पर पीपी पाण्डे जैसे हत्यारे कानून से डरकर फरार हो रहे हैं यह मोदी सरकार की जिम्मेदारी है कि उन्हे तुरन्त खोजकर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जाय। लेकिन जब उसे भगाने में ही मोदी जेसे लोग शामिल हों तो फिर इशरत जहां को न्याय कैसे मिल सकेगा। मोदी की सरकार इशरत जहां के हत्यारों का संरक्षण कर रही है। पीपी पाण्डे की न्यायिक हिरासत से फरारी इसी का परिणाम है।
इस अवसर पर पत्रकार फैजान मुसन्ना ने कहा कि सरकार रिहाई मंच के 83 दिन से चल रहे धरने से इतनी घबरा गयी है कि उसकी हिम्मत ही मानसून सत्र बुलाने की नही पड़ रही है। इससे यह साबित हो जाता है कि रिहाई मंच का यह धरना किस तरह से आम जनता के बीच अपनी पैठ बना चुका है।
भारतीय एकता पार्टी के नेता सैयद मोइद और जैद अहमद फारुकी ने कहा कि आज इस देश की सुरक्षा नीतियाँ मोसाद जैसी कुख्यात इजायली खुफिया एजेंसियाँ बना रही हैं। आज इस देश में पैसे और ताकत के बल पर मोसाद अपनी मनमानी कर रही है। लेकिन जब तक हम जैसे लोग जिंदा हैं इस देश के अमन पसंद ढाँचे पर आँच नही आने देंगे चाहे हमें कितने और दिन धरने पर न बैठना पड़े।
भागीदारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक पीसी कुरील ने कहा कि रिहाई मंच के इस धरने से सरकार बेहद डर गयी है। बेगुनाह मुसलमानों की रिहाई के सवाल पर अखिलेश यादव के पास अब जवाब ही नही हैं। चूँकि समूची सपा सरकार ही लुटेरों और गुण्डों की सरकार है। जब तक ये लुटेरे लोकतांत्रिक तरीके से खत्म नही किये जायेंगे तब तक खालिद जैसे बेगुनाह लोगों की हत्या को रोका नहीं जा सकता। जरूरी है कि लोकतंत्र की रक्षा में इस देश के अमन पसंद लोग सामने आयें ताकि मानवता की हत्या को रोका जा सके।
पिछड़ा महासभा के एहसान-उल-हक मलिक तथा शिवनारायण कुशवाहा ने कहा कि आज सपा सरकार के खिलाफ प्रदेश का हर तबका खड़ा हो चुका है। सरकार इन विरोधों को पुलिस के बल पर दबाना चाहती है। अपनी छवि को बचाने के लिये आज सरकार आम जनता के बीच भेद पैदा कर रही है। साजिश के तहत इस प्रदेश में दंगे फैलाए जा रहे हैं। लेकिन इस समाज को बाँटने के किसी भी मकसद में सरकार कामयाब नहीं होगी। जब तक खालिद के हत्यारे पुलिस अधिकारी पकड़े नहीं जाते तब तक पिछड़ा महा सभा के लोग रिहाई मंच के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इंसाफ के हक में लड़ते रहेंगे।
यूपी की कचहरियों में 2007 में हुये धमाकों में पुलिस तथा आईबी के अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से फँसाए गये मौलाना खालिद मुजाहिद की न्यायिक हिरासत में की गयी हत्या तथा आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट पर कार्रवायी रिपोर्ट के साथ सत्र बुलाकर सदन में रखने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को छोड़ने की माँग को लेकर रिहाई मंच का धरना सोमवार को 83 वें दिन भी जारी रहा।
धरने का संचालन हरेराम मिश्र ने किया। धरने को भारतीय एकता पार्टी (एम) के सैयद मोईद अहमद, इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी फहीम सिद्दीकी, भागीदारी आंदोलन के पीसी कुरील, पिछड़ा समाज महासभा के एहसानुल हक, मुस्लिम मजलिस के जैद अहमद फारुकी, शिवनारायण कुशवाहा, अनिल आजमी, रईस मियाँ, मजाहिद, जाकीर, महबूब अली, नुसरत अली, अनवर हुसैन, बबलू यादव, लक्ष्मण प्रसाद, इरफान शौकत, असद उल्लाह, मोहम्मद फैज, के के शुक्ला, इरफान सादिक, वारिफ शाह, राजीव यादव ने संबोधित किया।


