यादों के झरोखे से : सामाजिक न्याय के पहरुआ केदारनाथ सिंह
यादों के झरोखे से : सामाजिक न्याय के पहरुआ केदारनाथ सिंह
सामाजिक न्याय के पहरुआ केदारनाथ सिंह
यादों के झरोखे से
13 दिसंबर को पुण्य तिथि पर विशेष
बात 18 दिसम्बर 1990 की है। मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू किए जाने के बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी) की सरकार गिर गई थी। गोरखपुर के तमकुही कोठी मैदान में मांडा के राजा और 1989 के चुनाव के पहले देश के तकदीर विश्वनाथ प्रताप सिंह की सभा होने वाली थी। मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद वीपी सरकार गिर गई। उसके बाद सामाजिक न्याय के मसीहा का पहला और मेगा शो गोरखपुर में हुआ।
पिपराइच के विधायक केदारनाथ सिंह को सभा का संयोजक बनाया गया, महराजगंज के सांसद हर्षवर्धन सिंह कार्यक्रम करा रहे थे। कुल मिलाकर कार्यक्रम में तत्कालीन विधायक केदारनाथ सिंह, हर्षवर्धन और मार्कंडेय चंद की अहम भूमिका थी।
प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी, जो जनता दल (स) में चले गए थे। इसका गठन चंद्रशेखर ने जनता दल को तोड़कर किया था। चंद्रशेखर करीब 40 सांसदों के साथ कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री थे।
गोरखपुर में सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई। इसी बीच 17 दिसंबर को एक अज्ञात सा संगठन सवर्ण लिबरेशन फ्रंट उभरा। उसने चेतावनी दी कि किसी भी हालत में वीपी की सभा नहीं होने दी जाएगी। अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) का आरक्षण लागू होने का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पिछले दरवाजे से विरोध कर रही थी। यही हाल कांग्रेस का था। आरएसएस और उसके अनुषांगिक संगठन खुलेआम आरक्षण के विरोध में मैदान में कूद पड़े थे।
सवर्ण लिबरेशन फ्रंट ने सिर्फ धमकी ही नहीं दी, बल्कि सभा के एक दिन पहले केदारनाथ सिंह के आवास परिसर में बम विस्फोट भी कराया। इस मामले में न तो किसी का नाम सामने आया, न गिरफ्तारी हुई। हालांकि पुलिस व्यवस्था और सख्त कर दी गई। केदारनाथ सिंह ने मीडिया में बयान जारी कर ऐलान किया कि सभा हर हाल में और हर कीमत पर होगी। इस तरह की कायराना हरकत करने से अब पिछड़ा वर्ग दबने वाला नहीं है।
कुल मिलाकर आरक्षण विरोधियों व आरक्षण समर्थकों के बीच सीधी जंग शुरू हो चुकी थी। निशाने पर थे सैंथवार समाज से आने वाले पिछड़े वर्ग के एकमात्र ताकतवर नेता केदारनाथ सिंह।
सभा के रोज सवर्ण लिबरेशन फ्रंट ने जनता कर्फ्यू लगा दिया। हंगामे को देखते हुए प्रशासन ने भी स्कूल कॉलेजों को बंद कराना ही उचित समझा। सुबह सबेरे से आरक्षण विरोधियों व आरक्षण समर्थकों के बीच जंग छिड़ चुकी थी।
सवर्ण लिबरेशन फ्रंट ने जगह जगह बम विस्फोट कराए। यहां तक कि जनसभा के स्थल तमकुही कोठी मैदान में भी सभा में आए लोगों को निशाना बनाकर बम फेंके गए। प्रशासन के हाथ पांव फूले हुए थे। जनता दल के स्थानीय नेताओं और आरक्षण समर्थकों की एक दिन पहले से ही शिकायत आने लगी थी कि डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति रोक दी गई है, जिससे कि ट्रैक्टर ट्रालियों में भरकर लोग तमकुही मैदान में न पहुंच सकें। इसके बावजूद किसी न किसी माध्यम से शहर और आसपास के इलाकों से पचास हजार से ऊपर लोग जनसभा में पहुंच चुके थे।
उस समय केदारनाथ सिंह के समर्थन में पहुंचने वाले संजय कुमार सिंह बताते हैं कि उनके पिता जी खुद ट्रैक्टर ट्राली में लोगों को भरकर तमकुही मैदान आए थे। डीजल की कमी की बात स्वीकार करते हुए बताते हैं कि उनके ट्रैक्टर में इत्तेफाक से तेल भरा हुआ था, साथ ही दो रोज पहले ही कंटेनर में भी डीजल भरकर लाया गया था, क्योंकि गेहूं की सिंचाई का मौसम चल रहा था।
संजय बताते हैं कि उनके पिताजी ने पूरा डीजल कई रिश्तेदारों, परिचितों के ट्रैक्टर में डलवाया। यहां तक कि अपने ट्रैक्टर में से भी डीजल निकालकर जीप और ट्रैक्टरों में डालने के लिए दिया, जिससे कि लोग सभा स्थल तक पहुंच सकें और वहां से वापस लौट सकें। लेकिन हंगामा बढ़ते देख प्रशासन ने 12 बजे के बाद गोरखपुर के चारों तरफ शहर में प्रवेश करने वाली सड़कों की नाकेबंदी कर दी और जनता दल के झंडे डंडे से लैस आम लोगों की गाड़ियों, ट्रैक्टरों को बाहरी इलाके में रोका गया और उन्हें वापस भेजा जाने लगा।
तमकुही कोठी मैदान के बगल में ही केदारनाथ सिंह का सरकारी बंगला था, जिसमें दर्जनों गाड़ियों की पार्किंग थी। संघी ब्रिगेड के जितने छोटे मोटे समूह थे, सभी आरक्षण के विरोध में सक्रिय थे। जिधर से जनता दल नेताओं के वाहन निकलते, पथराव शुरू हो जाते।
केदारनाथ सिंह के पुत्र अजय सिंह ने खुद मोर्चा संभाल रखा था। सभा के संयोजक के रूप में सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को उनका निर्देश था कि मांडा नरेश को एक पत्थर नहीं लगना चाहिए, उसके लिए जो भी करना पड़े, वह करें। अपनी जान पर खेलकर उन्हें बचाया जाए।
इसी बीच अजय सिंह को सूचना मिली कि कुछ संघी गुंडे बंगले में घुसने की कोशिश कर रहे हैं और हाते में खड़े वाहनों पर पत्थर फेंकने की कवायद में हैं।
अजय ने अपने ड्राइवर से तत्काल आवास की ओर गाड़ी मोड़ लेने को कहा। जैसे ही वाहन रुका, उन्हें निशाना बनाकर बम फेंका गया। किसी तरह से वह बचे, लेकिन एक छर्रा उनके पैर में लग गया था।
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| मंच पर भाषण देते डॉ संजय सिंह। दाएं से पहले मुलायम सिंह यादव, दूसरे विश्वनाथ प्रताप सिंह और तीसरे केदारनाथ सिंह। |
पुरानी याद दिलाने पर अजय सिंह ने हंसते हुए बताया कि उनका ड्राइवर डर के मारे बेहोश हो गया था। लगा चिल्लाने, साहब हम मर गए, बाल बच्चेदार आदमी हैं, मेरे परिवार का क्या होगा। हालांकि बाद में पता चला कि उसे बम का एक छर्रा भी नहीं लगा था।
अजय सिंह पर बम फेके जाने तक जीप में बैठे युवा धड़ाधड़ उतर चुके थे। यह तो नहीं पता चला कि बम किसने फेंका था, लेकिन सामने पड़ा विश्व हिंदू परिषद का महानगर मंत्री आनंद कुमार गुप्ता। उसे युवाओं ने पीटना शुरू किया और पथराव कर रहे उसके अन्य सहयोगियों को भी दौड़ाया, जो एकाध हॉकी और थप्पड़ खाने के बाद भागने में सफल हो गए। गुप्ता की जमकर पिटाई हो गई।
उस समय के अखबारों का रुख देखें। स्थानीय अखबार स्वतंत्र चेतना ने “विश्व हिंदू परिषद के मंत्री की असमाजिक तत्वों द्वारा पिटाई” शीर्षक से खबर चलाई। इसमें लिखा गया...
“विहिप महानगर मंत्री आनंद कुमार गुप्त आज अपराह्न लगभग ढाई बजे अपने व्यक्तिगत कार्य से पार्क रोड की सड़क से होते हुए जा रहे थे। जनता दल विधायक केदारनाथ सिंह के घर के सामने उनके लड़के और भतीजे जो कि 8-10 लोगों के साथ सड़क के किनारे खड़े थे, उन्होंने आनंद कुमार गुप्त को देखते ही कहा कि यह विश्व हिंदू परिषद का महामंत्री है, बचकर जाने न पाए। और इतना कहते ही सब लोगों ने स्कूटर धर लिया और आनंद कुमार को ईंटों से मारने लगे। जिससे उनका सर फट गया तथा अन्य जगहों पर भी गंभीर चोटें आईं। भारतीय जनता पार्टी सिविल लाइंस के वार्ड मंत्री श्री रविंद्र कुमार मौर्य ने इस घृणित कृत्य की घोर निंदा करते हुएए कहा कि तुरंत ही अपराधियों को गिरफ्तार किया जाए अन्यथा हम आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”
स्वतंत्र चेतना अखबार ने सर पर पट्टी बांधे गुप्ता की फोटो भी छापी। अखबार ने कथित रूप से पिटाई करने वाले लोगों का नाम दिया, मौर्य के हवाले से अपराधी लिखा। लेकिन अखबार ने विधायक के पुत्र से बात करने की जहमत भी नहीं उठाई कि आखिर वहां पर क्या हुआ। केवल स्वतंत्र चेतना ही नहीं, करीब सभी अखबारों का रुख सवर्ण लिबरेशन फ्रंट को हीरो बताने वाला था। वीपी की सभा की रिपोर्टिंग भी उसी लहजे में की गई। जनसभा को फ्लॉप शो बताया गया।
वीपी सिंह ने उस रैली में कहा, “भूख एक ऐसी आग है कि जब वह पेट तक सीमित रहती है तो अन्न और जल से शांत हो जाती है और जब वह दिमाग तक पहुंचती है तो क्रांति को जन्म देती है। इस पर गौर करना होगा। गरीबों के मन की बात दब नहीं सकती और अंततः उसके दृढ़ संकल्प की जीत होगी।” सिंह ने कहा, “गरीबों की कोई बिरादरी नहीं होती। दंगों में मारे जाने वाले लोग हिंदू और मुसलमान नहीं, हिंदुस्तान के गरीब लोग हैं। गरीबों के साथ हमेशा अत्याचार होते रहे हैं। इस शोषण अत्याचार को बंद करके समाज के पिछड़े तबके के लोगों को ऊपर उठाना होगा।”
इस सभा के दौरान चौधरी अजीत सिंह का सर फट गया, शरद यादव को भी चोटें आईं। अजीत सिंह ने कहा कि सामाजिक न्याय की ओर कदम बढ़ाने पर इस तरह की बाधाएं आती रहेंगी और हम इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं। बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने भी सामाजिक न्याय के प्रति निष्ठा जताते हुए घोषणा की कि बिहार सरकार हर हाल में ओबीसी आरक्षण लागू करेगी। लालू प्रसाद और पूर्व गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के भाषण के दौरान सभा स्थल पर बम फेके गए, जिसमें दर्जनों लोग घायल हो गए।
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| कांग्रेस (जे) के जनता दल में विलय के मौके पर केदारनाथ सिंह, हरवंश सिंह भल्ला, विश्वनाथ प्रताप सिंह और मुलायम सिंह यादव (बाएं से दाएं) |
इस बीच सभा स्थल पर मंच पर चढ़ने की कवायद कर रहे लिबरेशन फ्रंट के गुंडों को पीटने के लिए विधायकों तक को सामने आना पड़ा। यह आश्यर्यजनक, लेकिन सत्य है कि मीडिया में खबरें भरी पड़ी हैं कि पुलिस ने आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन, पथराव, बमबाजी कर रहे छात्रों की पिटाई की, लेकिन यह भी खबर है कि पूर्व प्रधानमंत्री, दर्जनों पूर्व कैबिनेट मंत्री, बिहार तत्कालीन मुख्यमंत्री के मंच पर गुंडे चढ़ गए और वह बम और पत्थर मारते रहे। पुलिस उन्हें रोकने में नाकाम रही।
जब मंच पर गुंडे चढ़ गए तो विधायक केदारनाथ सिंह ने मोर्चा संभाला और गुंडों को पीटना शुरू कर दिया। उसके बाद मार्कंडेय चंद ने भी मंच पर चढ़े गुंडों की पिटाई करनी शुरू की और मंच से उन्हें खदेड़ दिया गया।
फिर क्या था! जनसभा में आए लोगों ने भी मोर्चा संभाल लिया। जिन लाठियों में झंडे बांधकर लाए गए थे वे लाठियां, बांस निकल गए और पिछड़े वर्ग के लोगों ने मोर्चा संभालकर गुंडों को रोका। पत्थरबाजों को दौड़ा दौड़ाकर मारा। शरद यादव ने जनसभा में ही कहा कि आज की घटनाओं के पीछे भाजपा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तथा विश्व हिंदू परिषद का हाथ है।
उस दौर में पहले नंबर पर रहे आज अखबार की रिपोर्टिंग का भी रुख जानना जरूरी है, जिसे कांग्रेसी अखबार माना जाता रहा है। अखबार ने “वीपी सिंह के राजनीतिक उत्थान के बाद पतन का भी साक्षी बना गोरखपुर” शीर्षक से खबर लिखी, जो कुछ इस तरह थी..
“पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह के राजनीतिक उत्थान का जहां गोरखपुर साक्षी रहा, वहीं उसने आज उनका पतन भी देख लिया। वोट की राजनीति के चलते सैकड़ों निर्दोष छात्र छात्राओं को अग्निस्नान तथा आत्महत्या के लिए मानसिक रूप से बाध्य करने के जिम्मेदार वीपी सिंह ने जब 15 माह पहले गोरक्षनाथ की धरती पर कदम रखा था तो यहां की जनता ने उन्हें सिर आंखों पर बैठाया था। लेकिन मंडल के चक्कर में देश में जातिवाद की खाईं पैदा करने वाले वीपी और उनके सहयोगियों ने यहां के लोगों का गुस्सा भी आज देखा और अनुभव किया।
| सत्येंद्र पीएस, लेखक सामाजिक न्याय कार्यकर्ता व पत्रकार हैं। |
लोकतांत्रिक वामपंथी मोर्चा के बैनर पर आज स्थानीय तमकुही मैदान में बने सभास्थल पर बैठे वीपी सिंह, अजित सिंह, शरद यादव, मुफ्ती मोहम्मद सईद और शरद यादव के अंगरक्षक समेत कई लोग घायल हो गए।
आज नगर के पूर्वी भाग में बम, कट्टा, आंसू गैस, लाठी, ईंट, पत्थर आदि दोपहर से सायंकाल तक चलते रहे। जगह जगह छात्रों ने सड़कों पर अवरोध खड़े किए। गड़बड़ी उस समय शुरू हुई जब आरक्षण विरोधियों द्वारा सभा में व्यवधान डालने की कोशिश की गई और महराजगंज के सांसद हर्षवर्धन ने मंद से लठैतों को पूर्व मंत्रियों की सुरक्षा के लिए चलने को ललकारा।
सभास्थल पर कार से आ रहे पूर्व केंद्रीय मंत्रियों पर पथराव किया गया और बम फेंके गए। परिणामस्वरूप शरद यादव और मुफ्ती मोहम्मद सईद घायल हो गए। जिस समय अजित सिंह मंच पर चढ़ रहे थे, तभी एक पत्थर से उनके सिर में चोटें आईं। शरद यादव का अंगरक्षक टॉमस गंभीर रूप से घायल हो गया। अपराह्न लगभग ढाई बजे जिस समय अजित सिंह घायल होने के बाद मंच पर बैठे, मंच के पास तेज विस्फोट हुआ। सौभाग्य से कोई घायल नहीं हुआ।
इससे पूर्व आज अपराह्न 12.20 बजे तमकुही मैदान के पश्चिमी सड़क पर जमी भीड़ पर जब पुलिस ने लाठी चार्ज किया, उसी समय पहला बम विस्फोट हुआ। यह स्थान मंच से लगभग 200 गज दूर था। इसके बाद सभास्थल के पूर्वी छोर से आरक्षण विरोधियों की बड़ी भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया, जिससे मंच पर भी कुछ पत्थर आए और वहां बैठे जद नेता रणजीत सिंहराज घायल हुए। मंच पर भगदड़ मच गई और देखते देखते पूरा मंच खाली हो गया। इसी पथराव में बिहार से आए एक वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विष्णु प्रसाद यादव भी घायल हो गए।
सवर्ण आर्मी लिबरेशन फ्रंट ने आज जनता कर्फ्यू का एलान किया था। कल राज भी कई बम विस्फोट हुए थे।
वीपी सिंह तथा बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को हवाई अड्डे से भारी पुलिस सुरक्षा व्यवस्था में सभास्थल तक लाया गया। लालू यादव के भाषण के समय भी बम विस्फोट और सभा में पथराव की अनेक घटनाएं हुईं।
आज अपराह्न 12 बजे से आंदोलनकारी सक्रिय हो गए। पथराव, बमबाजी कर सभा को कई बार भंग करने का प्रयास किया। आंदोलनकारियों ने आज नगर में अनेक वाहनों को आग लगा दी तथा जिलाधिकारी आवास पर जमकर पथराव किया जिससे जिलाधिकारी की कार का शीशा टूट गया।
वीपी सिंह के भाषण के समय पूर्ण शांति रही, लेकिन इससे पूर्व शरद यादव के भाषण के समय से ही पुलिस ने लोगों को सभा स्थल पर जाने से रोक दिया था। भय और आतंक के माहौल के कारण लोग धीरे धीरे सभा स्थल से खिसकने लगे। शरद यादव के भाषण के समय सभास्थल पर जमकर ढेलेबाजी हुई।
बाहर से लाए गए जद कार्यकर्ता डंडों में झंडा लगाकर मुकाबले के लिए पूरी तरह से तैयार होकर आए थे। वीपी के भाषण के समय सभास्थल पर श्रोताओं की संख्या बहुत कम रही। पुलिस द्वारा लाठीचार्ज तथा आंदोलनकारियों के पथराव में दर्जनों घायल हो गए। घायलों में कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
श्री सिंह को सभास्थल तक नहीं पहुंचने देने की धमकी दे चुके छात्रों को हटाने के लिए विश्वविद्यालय छात्रावासों में घुसकर पुलिस ने छात्रों की पिटाई की। उत्तेजित छात्रों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया। बाद में सब इंसपेक्टर की मोटरसाइकिल पर बम फेका, जिससे उसमें आग लग गई। हॉस्टल रोड को पूरी तरह घेर लिया। वीपी इसी मार्ग से सभास्थल तक गए।”
यह उस दौर की सबसे संतुलित रिपोर्ट थी, जिसे पढ़कर अहसास किया जा सकता है कि अखबार, उसमें लिखने वालों व लोकतंत्र के अन्य कथित झंडाबरदारों का उस दौर में क्या रुख था।
यह पिछड़े वर्ग की सामाजिक


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