योगीजी, क्या मोदी भी नीदरलैंड के पीएम से मिली साइकिल तोड़ देंगे !
योगीजी, क्या मोदी भी नीदरलैंड के पीएम से मिली साइकिल तोड़ देंगे !
उत्तर प्रदेश में भाजपा के योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनी नई सरकार ने अब तक जो भी फैसले लिए हैं उनमें सिर्फ़ या तो सामाजिक दुर्भावना के साथ जातीय तुष्टिकरण के जरिये कुछ लोगों को खुश कर अपने साथ रखने की सोच रही है अथवा राजनैतिक बदले की भावना। साथ ही मूल रूप से असल मुद्दों जैसे वादे के अनुसार किसानो की क़र्ज़ माफ़ी का नहीं करना, 100 दिन के भीतर रोजगार देने के मुद्दे पर कोई ठोस कदम न उठाना बल्कि पहले से हो रही कई हजार भर्तियों को अनावश्यक रूप से रोक देना, ख़राब हो रही बिजली व्यवस्था, ध्वस्त हो चुकी कानून व्यवस्था आदि से जनता का ध्यान हटाने और चुपके से अपने जातिवादी एजेंडे को लागू करने की चाल रही है।
भाजपा सरकार उलूल - जलूल बातें करके जाँच इत्यादि करके अपने क़ब्ज़े के मीडिया के सहारे जनता को भ्रमित रखने का कार्य कर रही है। इसी कड़ी में अब बीजेपी सरकार ने प्रदेश में पूर्व की अखिलेश यादव सरकार द्वारा कई महानगरों और आगरा से इटावा में लायन सफ़ारी तक बनाये गए साइकिल ट्रैक को तोड़ने का शिगूफा छोड़ा है और कारण बताया है कि साइकिल ट्रैक की वजह से सड़कों के पतले होने से चार पहिया गाड़ियों के आवाजाही में दिक्कत होने और जाम की स्थिति पैदा हो रही है।
इसके ठीक उलट विकसित देशों के बड़े शहरों में जाम कम करने और पर्यावरण की दृष्टि से मोटर रहित यातायात को बढ़ावा देने और साइकिल के प्रयोग को बढ़ाने के दिशा में काम हो रहा है। कई विकसित देशों के बड़े शहरों में साइकिल ट्रैक का निर्माण किया जा चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले हफ्ते ही जब नीदरलैंड के दौरे पर गए तो वहां के प्रधानमंत्री मार्क रूट ने मोदी जी को साइकिल ही गिफ्ट में दिया और सन्देश दिया कि साइकिल यातायात को बढ़ावा देना स्वास्थ्य और पर्यावरण के दोनों लिए अत्यंत लाभकारी है।
भारत जैसे विकासशील में जहाँ अव्यवस्थित ट्रैफिक जाम के बीच में स्कूल जाने वाले बच्चों,विकलांगो और साइकिल से सफर करने वाले गरीब मजदूरों की संख्या बहुत ज्यादा है ऐसे में दुर्घटना की सम्भावना बनी रहती है। यह साइकिल ट्रैक गरीबों और बच्चों लिए अत्यंत उपयोगी और लाभकारी होने के साथ- साथ सुरक्षित है।
सड़क पर यात्रा के दौरान सुरक्षा साइकिल से और पैदल यात्रा करने वाले हर व्यक्ति का सवैधानिक अधिकार भी है।
उत्तर प्रदेश की गरीब, अल्पसंख्यक, दलित, पिछड़ा व पर्यावरण विरोधी योगी सरकार ने बड़े अमीर लोगों की चार पहिया गाड़ियों को जगह देने के लिए गरीबों के साइकिल के रास्ते को बदले की भावना से सिर्फ इसलिए तोड़ रही है कि इसे पर्यावरणप्रेमी अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार ने अपने कार्यकाल में महत्वपूर्ण योजना का दर्जा देते हुए बेहद ख़ूबसूरत रूप में बनवाया है।
यहीं पर बीजेपी का दोहरा चरित्र भी दिखाई देता है क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार की कहने को अत्यंत महत्वकांक्षी योजना स्मार्ट सिटी के प्रारूप में Mobilability और सुगम यातायात का कार्य स्मार्ट सिटी का महत्वपूर्ण अंग के रूप में दर्ज है और इसके लिए बिना मोटर की गाड़ी जैसे साइकिल यातायात को बढ़ावा देने और साइकिल ट्रैक बनाने का प्रावधान है और कई अन्य शहरों के कुछ छोटे हिस्से में स्मार्ट सिटी के अंतर्गत साइकिल ट्रैक राज्य की सरकार द्वारा बनवाया जा रहा है। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और इसके नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना राजनैतिक विरोध की भावना से पहले से बने शानदार साइकिल ट्रैक को सिर्फ इसलिए तोड़ने कि बात कर रहे है क्योंकि यह साइकिल ट्रैक पूर्व की समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार के समय बनाये गए थे।
साइकिल समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह है और गरीब कमजोर और मेहनती लोगों के परिवहन का सुलभ और सस्ता साधन है।
भारतीय जनता पार्टी की सरकार किसान, मज़दूर और पर्यावरण विरोधी सरकार के रूप प्रचलित हो रही है, जो गूलर के पेड़ों को भी अशुभ बता कर उन्हें काटने का आदेश दे चुकी है और मात्र तीन महीनों के छोटे से कार्यकाल में ही पूरी तरह से अलोकप्रिय हो चुकी है और प्रदेश की जनता आने वाले चुनावों में यक़ीनन इसका कड़ा सबक बीजेपी को सिखाएगी।
योगेश यादव, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता हैं


