नई दिल्ली। सियासी गलियारे में सवाल पूछा जा रहा कि क्या भारतीय जनता पार्टी उन शख्सियतों का बड़ी शिद्दत के साथ स्मरण करती है, जो उसे या उसकी मातृ संस्था आरएसएस को सबक सिखाते हैं ?
दरअसल ऐसा सवाल भाजपा के क्रियाकलाप को देखकर ही पूछा जा रहा है। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया तो भाजपा उनके गुणगान करती है। इंदिरा गांधी ने आपात्काल में संघियों को पकड़कर जेलों में ठूँसा, तो ये आपातकाल को अनुशासन पर्व कहते हुए माफीनामे लिखकर रिहा हुए। संजय गांधी आरएसएस की शाखाओं पर लाठियां चलवाया करते थे तो आज उनकी पत्नी मेनका गांधी और पुत्र वरुण गांधी भाजपा के पूजनीय बने हुए हैं।
ऐसे ही पूजनीयों की सूची में एक नया नाम राजा महेंद्र प्रताप सिंह का भी जुड़ गया है। दरअसल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के लिए जमीन दान देने वाले जिन राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म दिन मनाने के लिए भाजपा के नेता अड़े हुए हैं और एएमयू को सांप्रदायिकता की नयी प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं उन्हीं राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने किसी जमाने में अटल बिहारी बाजपेयी की जमानत जप्त करा दी थी।
युवा पत्रकार वसीम अकरम त्यागी कहते हैं कि अब अलीगढ़ मुस्लिम वि.वि. को केंद्र बनाकर एक और विवाद को जन्म दिया जा रहा है। भाजपा चाहती है कि विश्वविद्यालय को जमीन देने वाले राजा महेंद्र प्रताप की जयंती को इस बार वहाँ मनाया जाये जिसके लिये विश्वविद्यालय प्रशासन ने मना कर दिया है । जाहिर यह एक इशारा है 2017 की तरफ जिसके लिये जमीन अभी से तैयार की जा रही है। वह सवाल करते हैं कि क्या हर बार यह जयंती विश्वविद्यालय परिसर में ही मनाई जाती है ? क्या हर साल इसका आयोजन भाजपा ही करती है ? क्या इस बार ही याद आया कि राजा महेंद्र प्रताप ने विश्वविद्यालय को जमीन दी थी ? क्या इस बार ही मालूम हुआ कि वे स्वतंत्रता सेनानी भी थे ?
उधर अलीगढ़ में बुद्धिजीवियों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर राजा महेन्द्र प्रताप सिंह को केन्द्र बिन्दु बनाकर राजनीतिक दलों द्वारा बयानबाजी एवं ध्रुवीकरण की कोशिशों के प्रति सचेत किया है।
मिल्लत बेदारी मुहिम कमेटी के जसीम मोहम्मद ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अलीगढ़ को लिखे पत्र में कहा है, “भारतीय जनता पार्टी (अलीगढ़) राजा महेन्द्र प्रताप सिंह जी को केन्द्र में रख कर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पर निरन्तर आरोप लगाने मे संल्गन है। अमुवि कुलपति द्वारा हर सम्भव प्रयास किया गया कि भाजपा सहित किसी भी राजनीतिक दल अथवा किसी भी नागरिक वर्ग से अमुवि प्रशासन अथवा अमुवि छात्रों का सीधा टकराव न हो परन्तु भाजपा के नेता एवं स्वयं अलीगढ़ सांसद सतीश गौतम निरन्तर नकारात्मक गतिविधियों में संलग्न हैं तथा न केवल धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे है बल्कि अमुवि छात्रों से सीधा टकराव करने की योजना पर कार्यरत हैं।“
पत्र में जसीम मोहम्मद ने ध्यान दिलाया है कि, “समाचार पत्रों के आधार पर भाजपा के नेता इस बात पर अडिग हैं कि वे अमुवि के मुख्य द्वार बाब-ए-सैयद पर राजा महेन्द्र प्रताप सिंह का 01 दिसम्बर 2014 को जन्म दिवस समारोह आयोजित करेंगे। समाचार पत्रों की रिपोर्ट के आधार पर भाजपा के स्थानीय नेता जिले भर से हजारों कार्यकर्ताओं को अमुवि के मुख्य द्वार बाब-ए-सैयद पर जमा करने की योजना बना चुके हैं।“
पत्र में कहा गया है कि आतंकवादी स्वामी असीमानन्द ने अपने हलफिया कुबूलनामें में आंतकवादी प्रज्ञा ठाकुर आदि की योजना पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा था कि ‘‘हमारे निशाने पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भी है।‘‘ स्वामी असीमानन्द के इस हलफिया कुबूलनामे को हल्के मे नहीं लिया जा सकता है। अलीगढ़ नगर संवेदनशील है और कोई भी छोटी सी घटना नगर मे
साम्प्रदायिक सद्भाव पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
जसीम मोहम्मद ने कहा है कि भाजपा नेतृत्व की अमुवि छात्रों से सीधे टकराव की योजना को विफल करने की आवश्यकता है।