राहुल ने मोदी सरकार को लपेटा

चुनाव गुजरात का, वार पलटवार

जेटली बोले राफेल सौदे में कोई क्वात्रोची नहीं था

गुजरात इस वक्त सियासी रण का मैदान बना हुआ है, जहां वार और पलटवार का दौर जारी है। प्रधानमंत्री मोदी के गढ़ में शनिवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष ने मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र में देरी इसीलिए हो रही है, ताकि प्रधानमंत्री को जयशाह और राफेल पर सफाई ना देनी पड़े। राहुल के वार से भाजपा बुरी तरह बौखला गई थी, जिसके बाद वित्त मंत्री अरूण जेटली ने राहुल गांधी पलटवार किया था। लेकिन जेटली के जवाब पर ही राहुल ने उल्टा तीन सवाल और खड़े कर दिए।

राफेल डील को लेकर विवादों में घिरी भाजपा से राहुल गांधी ने तीन सवाल पूछे हैं। राहुल ने सवाल किया है कि क्या राफेल के पहले और दूसरे कॉन्ट्रैक्ट के पैसों में अंतर है?

राहुल ने पूछा कि फाइटर प्लेन बनाने का 60 सालों का अनुभव रखने वाली एच.ए.एल कंपनी के बजाए किस आधार पर एक ऐसे बिजनेसमैन को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया, जिसने अपनी पूरी जिंदगी में एक भी फाइटल प्लेन का निर्माण नहीं किया?

इसके अलावा उन्होंने मोदी सरकार को लेपेटे में लेते हुए पूछा कि कि क्या पूरी कैबिनेट ने इस कॉन्ट्रैक्ट को पास किया है? क्या इसके लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अनुमति ली गई, जिसके खुद जेटली सदस्य हैं?

दरअसल कांग्रेस का कहना है कि उनके शासनकाल में भारत और फ्रांस की कंपनी देसॉल्ट एविएशन के बीच 126 राफेल क्राफ्ट का सौदा हुआ, जिसमें से भारत को 16 क्राफ्ट बने बनाए खरीदने थे और बाकी बचे हुए क्राफ्ट बनाने के लिए कंपनी को वह तकनीक भारत को देनी थी। यह क्राफ्ट भारत की सरकारी पीएसयू हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को बनाने थे। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने के बाद न सिर्फ बने हुए क्राफ्ट की तादाद 16 से 36 कर दी, बल्कि बचे हुए क्राफ्ट बनाने की जिम्मेदारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से लेकर एक निजी कंपनी रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को सौंप दी गई, जिसके मालिक अनिल अंबानी हैं। इसी को लेकर राहुल गांधी ने तमाम सवाल किए है।

वहीं राहुल से पहले वित्त मंत्री अरूण जेटली ने बोफोर्स सौदे के बहाने कांग्रेस पर वार किया था। जेटली ने कहा था बोफोर्स की तरह, राफेल सौदे में कोई क्वात्रोची नहीं था।