नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस के अंदर जबर्दस्त उठापटक चल रही है। अब पार्टी के बुजुर्ग नेतृत्व और युवा नेतृत्व के बीच म्यान में से तलवारें निकल आई हैं। एक तरफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता युवा नेतृत्व पर प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर निशाने साध रहे हैं, तो दूसरी ओर पार्टी के युवा नेता खासकर सचिव लामबंद होकर राहुल गांधी का बचाव करने में जुट गए हैं।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी है कि मंगलवार को दिल्ली में पार्टी के 16 सचिवों की एक बैठक हुई, जिसमें मौजूदा स्थिति से निपटने की रणनीति पर विचार विमर्श हुआ। इसमें तय किया गया कि बयानबाजी रोका जाए और राहुल गांधी का बचाव किया जाए। युवा सचिवों ने पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व को लक्ष्मण रेखा न लाँघने की नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें एक ऐसे संकटग्रस्त समय में जब पार्टी के सामने जनता का पुनः विश्वास जीतने का कठिन लक्ष्य हो, सार्वजनिक बयान देकर पार्टी को कमजोर नहीं करना चाहिए।
कांग्रेस सचिव प्रकाश जोशी ने कहा कि अगर राहुल गांधी पार्टी के संचालन में कार्यकर्ताओं की आवाज़ शामिल करना चाहते हैं, तो इसमें गलत क्या है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं ने राहुल जी के खिलाफ बयान दिए हैं उन्हें आत्मविश्लेषण करना चाहिए कि क्या उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का सही से निर्वहन किया। प्रकाश जोशी उन नेताओं में से एक हैं, जिन्हें राहुल गांधी ने यूथ कांग्रेस के संघठनात्मक चुनावों के पर्यवेक्षण का कार्यभार सौंपा था और बाद में वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव नियुक्त हुए।
बताया जाता है कि अगले एक या दो दिन में फिर से सभी 16 सचिव मिल कर राहुल गांधी के बचाव की रणनीति को अंतिम रूप दे सकते हैं। बताया जाता है कि मंगलवार को हुई मीटिंग में प्रकाश जोशी, गिरीश चोडनकर, शकील अहमद खान, नसीब सिंह, हरीश चौधरी, जुबेर खान, परेश धनानी, सूरज हेगड़े जैसे सचिव शामिल थे।
पिछले दिनों कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा था कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर राहुल गांधी की चुप्पी लोकसभा में हार का कारण बनी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी बयान दिया कि राहुल गांधी को केंद्र सरकार में मंत्री पद ले लेना चाहिए। केरल व राजस्थान के नेताओं ने भी राहुल पर सवाल खड़े किए। राहुल गांधी की नेृतत्व क्षमता के साथ-साथ, टीम राहुल और उनकी कार्यशैली को लेकर पार्टी में सवाल उठते रहे हैं। चुनाव के बाद विपक्ष में आने के बाद भी राहुल गांधी की भूमिका को लेकर बीच-बीच में पार्टी के भीतर से सवाल उठते रहे हैं।
उधर पार्टी प्रवक्ता शोभा ओझा का बयान मीडिया में आया है जिसमें उन्होंने ने कहा है, ‘राहुल जी हमारे नेतृत्व हैं। पार्टी उनके नेतृत्व के तहत आगे बढ़ेगी और हम सत्ता में वापसी करेंगे, राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर कोई शंका नहीं है। हम उनके अधीन काम करेंगे और पार्टी को आगे ले जायेंगे।’
कुछ युवा पार्टी महासचिवों ने निजी तौर पर बैठक पर ओझा कहा ‘मुझे इस बारे में पता नहीं है। मैं इस बैठक के बारे में अनभिज्ञ हूँ। मैं इस बारे में पता करके आपको बाताउँगी।’
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