वामपक्ष और अंबेडकरवादियों की आपसी दुश्मनी खत्म किये बिना कयामत का यह मंजर बदलेगा नहीं
वामपक्ष और अंबेडकरवादियों की आपसी दुश्मनी खत्म किये बिना कयामत का यह मंजर बदलेगा नहीं
फासीवाद केसरिया कार्पोरेट सुनामी के विरुद्ध।
हम मकपा पोलीत ब्यूरो में कामरेड मोहमद सलीम और कामरेड सुबाषिनी अली के जरिए हिंदू प्रदेशों को प्रतिनियधित दिए जाने से बेहंद खुश हैं और उम्मीद करते हैं कि वर्गीय सत्ता को उठाड़ने की जो नई कामरेड महासचिव सीताराम येचुरी ने घोषणा की है, उसके तहत सबसे पहले वामपक्ष को बहुजनोें से जोड़ने का काम करें और अंबेडकरी आंदोलन का मतलब भी समझें।
हमारी समझ से भारत में नस्ली कारपोरेट केसरिया की वर्गीय फासिस्ट सत्ता को उठाड़ने के रास्ते सबसे बड़ा अवरोध लाल और नीले झंडे का विरोध है।
वामपक्ष और अंबेडकरवादियों की आपसी दुश्मनी खत्म किए बिना कयामत का यह मंजर बदलेगा नहीं।
इसके केसरिया फासीवाद के लिए जिम्मेदार वाम पक्ष भी है, फासीवाद के खिलाफ लड़ाई से पहले यह आत्मालोचना का काम करें।
फिर बहुजन और वाम पक्ष के प्रेस्पर विरोधी अवस्था की वजह से फासीवाद के खिलाफ प्रतिरोध असंभव है तो इस रसायन को तोड़ें।
इसलिए मैं दिवास के खिलाफ तमाम रंगों का इंद्रधनुष चाहिये, ताकि पहचानने की तिलसिम से निकलकर भारतीय मेहन्तकश आवाम लामबंद हो जनसंख्या के विरुद्ध, बेदखली के विरुद्ध।
इसलिए हम चाहते हैं कि मैं दिवास सर्फ वामपंथी नहीं, बढ़ चढ़कर बहुजन अंबेडकरवादियों भी मनाएं।
हमने मैं दिवास की तैयारियां शुरू कर दी है।
कोलकाता में खास तैयारी है।
दक्षिण भारत से लेकर कश्मीर तक के साथी, जो देशभर में बामसेफ में हमारे साथ थे और अब बामसेफ में नहीं हैं, वे भी तैयारी में हैं।
बंगालुरु के जो साथी बामसेफ एकीकरण की हमारी शुरुआत मुहिम से नाराज़ थे और बामसेफ के विसर्जन के पक्ष में थे, उन्होंने भी कल तमाम मुद्दों पर फोन पर लंबी बातचीत की।
प्रभाकर ने अंबेडकरी आंदोलन की दिशा दिखा, बामसा, नेताजी और संगठनों से जुड़े मुद्दों पर बातें कीं किन तो संगठ न के बारे में।


