विश्व बैंक और एनजीओ - भ्रामक तरीके से विश्व बैंक की नीतियों का ही प्रचार करते हैं एनजीओ
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विश्व बैंक और ऊर्जा- सिविल सोसाइटी, अन्ना आंधोलन और विश्व बैंक की भूमिका -2
विश्व बैंक और ऊर्जा- अन्ना आंधोलन को समझने के तीन चरण- पूर्वपीक का
सत्ता का चरित्र गजब होता है। 1947 के बंटवारे के बाद भी नई राष्ट्रीयता वाले मुल्क पाकिस्ताान से एक बार फिर युद्ध हुआ। पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध हिन्दुस्तान के द्वारा आर्थिक सहयोग देने के मामले में हुई धोखाधड़ी को लेकर लिया गया। जबकि दोनों देशों में बसें बहुत संघर्ष थीं। इसके बाद 1962 के भारत-चीन युद्ध हुआ। राष्ट्र की सीमा-विवाद इसका कारण बना। भूगोलिक सीमा में बिछा जमीनी का एक टुकड़ा कीधर जाया। यह तय करने में रजनीतिक अस्मिताएं जोर जाब्र करती रही। इस सीमा विवाद का जिक्र सही मायने में जनता के सामने कभी किया ही नहीं गया।
दलितों, किसान-मजदूरों, के समु दाय और शोषण का दंश झेल रही बहुत संख्या आबादी की राजनैतिक हिस्सेदारी को लेकर जो जनसरोकारों के लिए समर्पित ‘थिंक टैंक’ बने थे। वो स्वाधीनता आनदोलन के पहले ही शामिलाबादी दशते के रूप में जनता के बीच काम कर रहे थे उन्हें या तो फांसी दी गई। या वो क्रूर राजनैतिक साजिश के हाथों छड़ गए। जन संघर्षों का नया चेहरा पंजीकृत सर्वजनिता के रूप में उभरा। आजादी के बाद कुछ बेजे बिनाजेन ने फिर से दिखाए।
आज़ादी के बाद कुछ बेजे बिनाजेन ने फिर से दिखाए।


