वैश्विक तापमान में वृद्धि को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने को आईपीसीसी की बैठक कोरिया में शुरू
वैश्विक तापमान में वृद्धि को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने को आईपीसीसी की बैठक कोरिया में शुरू
आईपीसीसी की छठी आकलन बैठक आज से कोरिया में शुरू
Intergovernmental Panel on Climate Change from 1-5 October 2018, in Incheon, Republic of Korea
जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की छठी बैठक आज कोरिया में शुरू हो गई। इस बैठक में आईपीसीसी 1.5 ºC की ग्लोबल वार्मिंग पर अपनी विशेष रिपोर्ट पर विचार करेगी। आकलन रिपोर्ट आगामी 7 अक्टूबर को कोरिया में जारी होनी है। इस रिपोर्ट में हर किसी के लिये कुछ न कुछ मौजूद है। इसमें वे सभी बातें हैं जिनका सभी से कोई न कोई सरोकार जुड़ा हुआ है। पांच शोध इकाइयों ने ऐसी गैर-ब्रांडेड रपट तथा विज्ञान सम्बन्धी उपयोगी पत्र तैयार किये हैं, जो पिछले साल की आईपीसीसी रिपोर्ट और इस रिपोर्ट के बीच के अंतर को दर्शाती हैं।
क्या है आईपीसीसी
जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) जलवायु परिवर्तन से संबंधित विज्ञान का आकलन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र निकाय है। इसका गठन 1988 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएन पर्यावरण) और विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) ने जलवायु परिवर्तन, इसके प्रभाव और संभावित भविष्य के जोखिमों के साथ-साथ अनुकूलन और शमन को आगे बढ़ाने के लिए नियमित वैज्ञानिक आकलन के साथ नीति निर्माताओं को प्रदान करने के लिए किया था। इसमें 119 सदस्य देश हैं।
वैश्विक तापमान में वृद्धि को डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने से वायु प्रदूषण में फायदा
- ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती होने पर स्थानीय तथा क्षेत्रीय स्तर पर वायु प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी, परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन को सीमित करने से सबसे बड़ा स्वास्थ्य सह-लाभ मिलेगा। यह बहुत बड़ा फायदा है, मगर आर्थिक नजरिये से देखें तो यह लाभ प्रदूषणकारी तत्वों का उत्सर्जन करने वाले देशों में कार्बन उत्सर्जन के कारण चुकायी जाने वाली कुल कीमत से भी ज्यादा बड़ा हो सकता है।
- तापमान वृद्धि के लक्ष्य को 2 के बजाय 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने का लक्ष्य तय किये जाने से वर्ष 2100 तक दुनिया भर में वायु प्रदूषण के कारण होने वाली 15 करोड़ 30 लाख लोगों की असमय मौत को रोका जा सकता है। यह अगले 40 वर्षों के दौरान होने वाली मौतों के 40 प्रतिशत के बराबर है।
- उत्सर्जन सम्बन्धी उदार परिस्थिति (आरसीपी4.5) में जहां इस शताब्दी के अंत तक तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने पर वर्ष 2050 में सिर्फ अमेरिका में ही पीएम2.5 के कारण होने वाली औसतन 16 हजार मौतों तथा ओजोन से सम्बन्धित 8000 मौतों को रोका जा सकता है।
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