नई दिल्ली। आज सुबह वयोवद्ध समाजवादी नेता कैप्‍टन अब्‍बास अली का अलीगढ़ के एक अस्‍पताल में देहांत हो गया। सोशलिस्‍ट पार्टी ने कैप्‍टन अब्‍बास अली को सच्चा समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष नेता बताते हुए उनके निधन पर गहरा दुख व्‍यक्‍त करते हुए उन्‍हें श्रद्धांजलि दी है।
पार्टी प्रवक्ता और महासचिव डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि 96 साल के कैप्‍टन अब्‍बास अली समाजवादी आंदोलन की अंतिम कड़ियों में थे। उनका निधन समाजवादी आंदोलन की अपूरणीय क्षति है। वे भारत के स्‍वतंत्रता आंदोलन के ऐसे सिपाही थे जिन्‍हें सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज में काम करने का अवसर मिला था। वे आजाद हिंद फौज में कैप्‍टन थे और अंग्रेज सरकार ने उन्‍हें मुलतान किले में कैद करके फांसी की सजा सुनाई थी। देश की आजादी सुनिश्चित होने पर उनकी रिहाई हुई।
डॉ लोहिया के करीबी रहे कैप्‍टन अब्‍बास अली ने समाजवादी आंदोलन में सक्रिय भाग लिया। वे सक्रिय राजनीति से भी जुडे रहे और उत्‍तर प्रदेश विधानसभा में एमएलसी रहे। सहज व्‍यक्तित्‍व के स्‍वामी कैप्‍टन अब्‍बास अली न केवल समाजवादियों की बैठकों/कार्यक्रमों में उपस्थित रहते थे, सामाजिक न्‍याय और नागरिक अधिकारों से संबंधित कार्यक्रमों में भी बराबर हिस्‍सेदारी करते थे।