इस बार नौजवानों का शिकार तय हुआ है
बाश्शा ने नरम गोश्त और गरम लहू को चखने की ख्वाहिश की है
संध्या नवोदिता
हमला ज्ञान पर है
हमला तर्क पर है
हमला भविष्य पर है
आर पार की लड़ाई है
जवाब बताएगा कि भविष्य शून्य होगा या सैकड़ा
साजिश अमावस्या की रात से भी गहरी है हत्यारे कत्ल का हर सामान ले आए हैं
वे रौशनी के हर जुगनू तक को कुचल देने का मनसूबा लिए खतरनाक तरीके से हाँका लगा रहे हैं
इस बार नौजवानों का शिकार तय हुआ है
बाश्शा ने नरम गोश्त और गरम लहू को चखने की ख्वाहिश की है
आखेट पर निकल पड़ा है बाश्शा
मंत्री, सिपहसालार, प्यादे, लग्गू भग्गू, चेले चपाटे
सब साथ
ढोल बज रहे हैं
धूर्त शिकारियों ने जाल बिछा दिया है
आखेट पर निकला है बाश्शा
खाली हाथ तो वापस नहीं जाएगा
बाश्शा निकला है
इस बार जंगल नहीं, नगर में चलाना है तीर
जानवर नहीं, इंसान की निकलेगी चीख