सुरेश चन्द्र शुक्ल की पत्रिका स्पाइल दर्पण के पचीस साल पूरे दिल्ली में जश्न 5 को
सुरेश चन्द्र शुक्ल की पत्रिका स्पाइल दर्पण के पचीस साल पूरे दिल्ली में जश्न 5 को
शेष नारायण सिंह
नार्वे में भारतीयों के सबसे प्रिय इंसान के रूप में सुरेश चन्द्र शुक्ल जाने जाते हैं। वे नार्वे की राजधानी ओस्लो से एक पत्रिका निकालते हैं। हिंदी और नार्वेजीय भाषाओं में। सुरेश शुक्ल जी देशबन्धु के यूरोप एडिटर भी हैं। कल 5 जनवरी को दिल्ली में उनकी पत्रिका के २५ साल के जश्न का मौक़ा है।
सुरेश चन्द्र शुक्ल का एक और नाम शरद आलोक है लेकिन ओस्लो की सडकों पर जो भी उन्हें जानता है वह उन्हें शुक्ला जी ही कहता है। हिंदी और नार्वेजी भाषा के पत्रकार और साहित्यकार होने के अलावा सुरेश शुक्ल नार्वे की राजनीति में भी दखल रखते हैं। ओस्लो की नगर पार्लियामेंट में सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी ( एस वी ) की ओर से सदस्य रह चुके हैं। २००७ में ओस्लो टैक्स समिति के सदस्य थे और २००५ में हुए पार्लियामेंट के चुनाव में सोशलिस्ट लेफ्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रीय चुनाव में शामिल हो चुके हैं। नार्वेजियन जर्नलिस्ट यूनियन और इंटरनैशनल फेडरेशन और जर्नलिस्ट्स के सदस्य हैं। इसके अलावा बहुत सारे भारतीय और नार्वेजी संगठनों के भी सदस्य हैं। डेनमार्क और कनाडा के कई साहित्यिक संगठनों से जुड़े हुए हैं।अपनी ही कहानियों पर आधारित टेलीफिल्म, तलाश, नार्वे और कनाडा की संयुक्त फिल्म ‘कनाडा की सैर’, आतंकवाद पर आधारित हिंदी लघुफिल्म ‘ गुमराह ‘ बना चुके हैं। एक शिक्षाविद के रूप में भी उनकी पहचान है। ओस्लो विश्वविद्यालय, कोपेनहेगन विश्वविद्यालय, अमरीका का कोलंबिया विश्वविद्यालय और महात्मा गांधी संस्थान, मारीशस में विजिटिंग प्रोफ़ेसर के रूप में आमंत्रित किये जा चुके हैं। नार्वे की कई साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर हैं।
यहाँ विस्तार से जानें शरद आलोक के विषय में
सुरेशचंद्र शुक्ल साकिन लखनऊ,हाल मुकाम ओस्लो की जेहादे-ज़िन्दगानी की शमशीरें


