- डॉ डी एम मिश्र

हमारे देश की मिट्टी, हवा और पानी में ही जैसे वह तत्व शामिल हो गया है कि वह खुद चाहे जितना गंदला या प्रदूषित हो लेकिन स्वच्छता, गुणवत्ता और ईमानदारी की अपेक्षा दूसरे से जरूर करता है। सेाशल मीडिया हो या कोई दफ्तर। चाय की दुकान हो या गाँव की चौपाल। आज जिस एक व्यक्ति की सर्वाधिक सराहना हो रही है - वह है सीबीआई स्पेशल कोर्ट का जज जगदीप सिंह।

जब यहाँ का राजनेता, मंत्री, अफसर, मीडिया सब बिकाऊ हो, यहाँ तक कि कई जज भी बिकते हुए देखे गये तो ईमानदारी जैसे हम सब के लिए कोई दुर्लभ और अजूबा चीज हो। यहाँ का मतदाता जब कुछ पैसों पर और खाने -पीने जैसी छोटी - मोटी लालचों में फँसकर अपना बहुमूल्य वोट गुंडो और बदमाशों को दे देता है तो फिर कैसे उम्मीद की जा सकती है कि इस देश में सुशासन भी आयेगा।

एक ठग, बाबा का चोला ओढ़कर करोड़ों भक्तों और अनुयायिओं की फौज खडी कर लेता है और वह किसी नेता को बनाने और बिगाड़ने की धमकी देता है तो आप कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि सत्ता पाने के बाद वह नेता ईमानदारी और स्वतंत्र रूप से कार्य करने में सक्षम होगा। वह उसके सामने घुटने टेकेगा ही जिसके इशारे पर एक साथ लाखों - करोड़ों वोट पडते हों। कहा जाता है कि हरियाणा में पहले चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो, या किसी अन्य दल की या आज बीजेपी की, सभी गुरमीत राम रहीम के आशीर्वाद पर ही टिकीं। 38 लोगों की मौत, हजारों का घायल होना और करोड़ों -अरबों की सम्पत्ति का नुकसान यह सब हरियाणा की मजबूर और बाबा के एहसानों तले दबी और डरी सरकार की विफलता का ही नतीजा है।

कोई भी पार्टी अथवा नेता चाहें वह पक्ष में हो अथवा विपक्ष में गुरमीत राम रहीम के विरूद्ध कुछ बोलने का साहस नहीं जुटा पाया। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री ने भी कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। न ही हरियाणा सरकार को ही कोई कड़ी फटकार लगायी।
ऐसे में सत्ता में बैठे नेताओं से ईमानदारी की उम्मीद करना व्यर्थ है। लेकिन अपने देश की न्यायपालिका पर हम सब को अटूट विश्वास है।

हमारे देश की न्यायपालिका में ऐसे लोग मौजूद हैं जो इस देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा करने में तत्पर हैं। कुछेक मामलों को छोडकर इधर जो भी महत्वपूर्ण फैसले सामने आये हैं वह सराहनीय हैं - चाहे वह निजता का मामला हो या तीन तलाक का।
हमें फख्र है जब तक हमारे देश में जज जगदीप सिंह जैसे न्यायाधीश मौजूद हैं, हमें डरने की जरूरत नहीं। आज पूरा देश जज जगदीप सिंह के जज्बे को सलाम कर रहा है और उनके व्यक्तित्व के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने को उत्सुक हैं। यदि एक वाक्य में उनके बारे में कहा जाय तो वह अत्यन्त ईमानदार, निडर और संवेदनशील व्यक्ति हैं। 2012 में हरियाणा जुडीशियल सर्विसेज में आने से पूर्व वह पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस कर रहे थे। उनके बारे में कहा जाता है कि वकील के रूप में भी उनकी एक अलग साख और पहचान थी। वह सिविल और क्रिमिनल मामलों के वकील थे। लेकिन वह झूठे और फर्जी मुकदमों की पैरवी करने को तैयार नहीं होते थे। यही वजह थी कि वह अपने लगभग सभी मुकदमे जीत कर दिखाते थे। मुवक्किल उनसे खूब सन्तुष्ट रहते थे। तकरीबन 12 वर्ष तक वकालत के पेशे में वह खूब जमे और कामयाब रहे।
सख्त जज व नरम दिल इंसान कहे जाने वाले जज जगदीप सिंह की पहली पोस्टिंग 2012 में बतौर जज सोनीपत में हुई थी। उनकी ईमानदारी और कर्मठता को देखते हुए पंजाब -हरियाणा हाइकोर्ट ने 2016 में उन्हें सीबीआई स्पेशल जज के रूप में नियुक्त कर दिया। वह कितने संवेदनशील और बेहतरीन इन्सान हैं इसका अंदाजा आप इससे लगा सकते हैं। एक बार 2016 में बतौर स्पेशल जज वह हिसार से पंचकुला अपनी गाड़ी से सड़क मार्ग से जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा चार लोग सड़क दुर्घटना में घायल पड़े हैं। उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और घायलों को बचाने में जुट गये। पहले उन्होंने एम्बुलेस के लिए नजदीकी अस्पताल से सम्पर्क किया। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने उन्हे एम्बुलेंस नहीं उपलब्ध करायी। मजबूर होकर उन्होंने सभी घायलों को अपनी गाड़ी में ही बैठाया और खुद अस्पताल लेकर गये। वहाँ उन्होंने घायलों का उपचार कराया और उनकी जान बचाने में मदद की। और मानवता का एक ऐसा उदाहरण पेश किया जो आज तक लोग भूले नहीं।

इस बार जज जगदीप सिंह ने एक और नयी व बड़ी मिशाल पेश की जो इस देश के लोकतांत्रिक इतिहास में सदियों तक याद किया जायेगा। जब ब्लातकार के दो मामलों में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम जिसके सामने शासन - प्रशासन पंगु बना बैठा था। कोर्ट के आदेश और धारा -144 के बावजूद लाखों लोग सडक पर बेकाबू हो रहे थे। ऐसे में राम रहीम को दोषी करार देने का फैसला देना आसान नहीं था।

जज जगदीप सिंह को भलीभाँति इस बात का अनुमान था कि इस फैसले को पढ़ते ही चारों तरफ आग लग सकती है और लोग मारे जा सकते हैं। लेकिन 25 अगस्त को अपरान्ह करीब 4 बजे अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाकर जज जगदीप सिंह ने साबित कर दिया कि संविधान से ऊपर कोई नहीं।

पहली बार ही शायद ऐसा हुआ हो जब एक अपराधी को उसके आतंक से अवाम को बचाने के लिए जेल में जाकर फैसला सुनाने की नौबत आयी हो। 28 अगस्त को एक बार फिर उन्होंने राम रहीम को 20 साल की सजा और 30 लाख जुर्माने की सजा सुनाकर अपनी न्यायप्रियता का प्रमाण दे दिया। इस अदम्य साहसी और निडर जज को य़़द्यपि कहीं से कोई खौफ नहीं है फिर भी सरकार की तरफ से उन्हे जेड स्तर की सुरक्षा प्रदान की गयी है।

लेखक कवि व साहित्यकार हैं