दुनिया को बेहद करीब से देखते हैं गुलज़ार
जन्मदिन मुबारक गुलज़ार साहब...
अतुल सिन्हा

‘उम्र के खेल में इकतरफा है ये रस्साकशी

इक सिरा मुझको दिया होता तो इक बात भी थी’

(जन्म दिन पर गुलज़ार साहब का ट्वीट)

एक संवेदनशील शायर और आसपास की दुनिया को बेहद करीब से देखने वाले गुलज़ार साहब के लिये जन्मदिन का मायना भले ही ये हो सकता है लेकिन अपने बेहतरीन लफ्ज़ों की बदौलत उन्होंने साहित्य और संगीत को जो दिया है, वो एक बेमिसाल ख़ज़ाना है।

गुलज़ार यानी संपूर्ण सिंह कालरा को एक अलग पहचान बेशक फिल्म इण्डस्ट्री से मिली हो लेकिन उनके भीतर का कवि और लेखक छोटी सी उम्र में ही आकार लेने लगा था। तब जब वो मुंबई के एक गैराज में मैकेनिक का काम करते थे। जिसने नन्हीं सी उम्र में आज़ादी के आन्दोलन का दौर देखा हो और जिसने अपनी किशोरावस्था में विभाजन का दर्द महसूस किया हो और जिसने भरे पूरे परिवार में अकेलेपन का मर्म सहा हो। उसके हर लफ्ज़ में वो कशिश साफ़ झलकती है।

उनकी रचनाओं के चंद नमूने देखिए :-

वो जो शायर था, चुप सा रहता था..., ज़िन्दगी यूँ ही बसर तन्हा..., आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ..., हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं तोड़ा करते..., मौत तू एक कविता है और हिन्दुस्तान में दो हिन्दुस्तान दिखाई देते हैं..., इन शीर्षकों से ही आप गुलज़ार को समझ सकते हैं। उनके भीतर की गहराई को महसूस कर सकते हैं। फिल्मों में लिखे उनके गीतों में तो उनकी दुनिया साफ दिखती ही है।

उनकी चंद लाइनें देखिएः-

हिंदुस्तान में दो-दो हिंदुस्तान दिखाई देते हैं

अतुल सिन्हा, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। ज़ी न्यूज़ मध्य प्रदेश/ छत्‍तीसगढ़, राजस्थान के आउटपुट एडिटर हैं

एक है जिसका सर नवें बादल में है

दूसरा जिसका सर अभी दलदल में है,

एक है जो सतरंगी थाम के उठता है

दूसरा पैर उठाता है तो रुकता है

फिरका-परस्ती तौहम परस्ती और गरीबी रेखा

एक है दौड़ लगाने को तय्यार खड़ा है

‘अग्नि’ पर रख पर पांव उड़ जाने को तय्यार खडा है

हिंदुस्तान उम्मीद से है!

और यही उम्मीद गुलज़ार को हिन्दुस्तान की सोंधी मिट्टी की खुशबू से जोड़ता है, एक आम आदमी से जोड़ता है, संवेदना और तरक्की की नई इबारत लिखता है और बेशक हम सबमें एक नई ऊर्जा भरता है। गुलज़ार साहब के जन्मदिन पर उनके जिस ट्वीट का ज़िक्र हमने सबसे पहले किया। उसके जवाब में यही कहना चाहूंगा

उम्र के हर पड़ाव पर नए मंज़र हैं,

उस मंज़र में ज़िंदगी के नए एहसास हैं।

जन्मदिन मुबारक गुलज़ार साहब...