रूस्तावली नेशनल थिएटर में भारतीय लेखिका कविता अरोरा की पुस्तक ‘शाम की टपरी’ का अंतरराष्ट्रीय विमोचन

रूस्तावली नेशनल थिएटर, जॉर्जिया में भारतीय लेखिका कविता अरोरा की पुस्तक ‘शाम की टपरी’ का अंतरराष्ट्रीय विमोचन भारत–जॉर्जिया सांस्कृतिक संवाद का प्रतीक बना

By :  Hastakshep
Update: 2026-02-03 17:00 GMT

The international launch of Indian author Kavita Arora's book 'Sham Ki Tapri' took place at the Rustaveli National Theatre.

भारत–जॉर्जिया सांस्कृतिक संवाद का सशक्त मंच बना रूस्तावली नेशनल थिएटर
  • प्रयोगधर्मी जॉर्जियन नाटक और सहभागी दर्शक: एक विशिष्ट अनुभव
  • ‘शाम की टपरी’ का प्रतीकात्मक अंतरराष्ट्रीय विमोचन
  • जॉर्जियन भाषा में अनुवाद और भविष्य के सांस्कृतिक सहयोग की पहल
  • ‘शाम की टपरी’: स्मृतियों, रिश्तों और ठहराव की साहित्यिक अभिव्यक्ति
  • वर्ल्ड बुक फ़ेयर और जयपुर पिंक फेस्ट में भी प्रस्तुत होगी पुस्तक
  • कविता अरोरा की साहित्यिक यात्रा और पूर्व प्रकाशित कृतियाँ
  • CDPF की भूमिका और भारत–जॉर्जिया सांस्कृतिक मैत्री

रूस्तावली नेशनल थिएटर, जॉर्जिया में भारतीय लेखिका कविता अरोरा की पुस्तक ‘शाम की टपरी’ का अंतरराष्ट्रीय विमोचन भारत–जॉर्जिया सांस्कृतिक संवाद का प्रतीक बना।

रूस्तावली नेशनल थिएटर में भारतीय लेखिका कविता अरोरा की पुस्तक ‘शाम की टपरी’ का अंतरराष्ट्रीय विमोचन

त्बिलिसी (जॉर्जिया) 3 फरवरी 2026। भारत और जॉर्जिया के बीच सांस्कृतिक सेतु को वर्षों से मज़बूत करते आ रहे CDPF (कल्चरल डायलॉग एंड पीस फ़ोरम) के चेयरमैन दारिस्पन पाराशर के विशेष आमंत्रण पर बरेली की भारतीय लेखिका कविता अरोरा को जॉर्जिया के प्रतिष्ठित रूस्तावली नेशनल थिएटर में आमंत्रित किया गया। यह आमंत्रण मूल रूप से एक जॉर्जियन नाट्य प्रस्तुति के लिए था लेकिन आगे चलकर यह अवसर भारतीय साहित्य, भारतीय संस्कृति और जॉर्जियन कला के गहरे संवाद का ऐतिहासिक क्षण बन गया।

रूस्तावली नेशनल थिएटर (The Shota Rustaveli National Theatre of Georgia, located on the historic Rustaveli Avenue in Tbilisi) में प्रस्तुत नाटक अपने प्रयोगधर्मी स्वरूप के लिए विशेष रूप में था जहाँ दर्शक और कलाकार एक ही मंच पर सहभागी बने। लाइव ओपेरा गायन, प्रभावशाली लाइटिंग और साउंड डिज़ाइन ने पूरे वातावरण को कलात्मक ऊँचाई प्रदान की।

नाट्य प्रस्तुति के उपरांत भारतीय लेखिका डॉ कविता अरोरा की पाँचवीं पुस्तक ‘शाम की टपरी’ का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतीकात्मक विमोचन किया गया। यह विमोचन रूस्तावली नेशनल थिएटर के डायरेक्टर श्री गियोर्गी तेवज़ाद्ज़े, मैनेजर लाली तबागारी तथा जॉर्जिया के प्रतिष्ठित कलाकारों निकोलोज़ त्सुलुकिद्ज़े, लेला अरबिद्ज़े और आना मकात्सारिया द्वारा सामूहिक रूप से संपन्न हुआ।

चूँकि पुस्तक भारत में प्रकाशित है और कार्यक्रम के दिन मुद्रित प्रति उपलब्ध नहीं हो सकी, इसलिए आई-पैड पर पुस्तक की छवि प्रदर्शित कर विमोचन किया गया। यह नवाचार जॉर्जियन कलाकारों लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना और इसे भारतीय रचनात्मकता के प्रतीक के रूप में देखा गया।

विमोचन के साथ ही रूस्तावली नेशनल थिएटर के डायरेक्टर गियोर्गी तेवज़ाद्ज़े ने ‘शाम की टपरी’ को जॉर्जियन भाषा में अनूदित कराने की इच्छा प्रकट की और लेखिका कविता अरोरा को आगामी 19 तारीख़ को होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। साथ ही भविष्य में थिएटर के अन्य अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भी सहभागिता का प्रस्ताव दिया गया।

‘शाम की टपरी’ की रचनाएं

व्यक्ति के जीवन की उन शामों को शब्द देती है, जो आज की तेज़ रफ्तार दुनिया में कहीं पीछे छूट गई हैं—मोहल्लों की टपरियाँ, छतों पर बैठकर होती बातचीत, रिश्तों की गर्माहट और वह ठहराव, जहाँ जीवन अपने पूरे अपनत्व के साथ साँस लेता था।

यह पुस्तक पिछली चार पुस्तकों के साथ जनवरी 2026 में आयोजित वर्ल्ड बुक फ़ेयर में पाठकों के बीच प्रस्तुत की जा चुकी है और 6, 7 तथा 8 फ़रवरी 2026 को जयपुर पिंक फेस्ट में भी साहित्य-प्रेमियों के सामने लाई जा रही है।

कविता अरोरा की चार अन्य पुस्तकें—

‘पैबंद की हँसी’ (महिला जीवन के विविध पक्ष),

‘चाँद का शरगा’ (प्रकृति और संवेदना),

‘काग़ज़ के नीले साहिल’ (अंतर्मन के भाव),

और ‘स्याही सने सपने’ (समाज के विविध वर्गों की कहानियाँ)—

पहले ही पाठकों और आलोचकों के बीच अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

यह पूरा सांस्कृतिक आयोजन CDPF चेयरमैन दारिस्पन पाराशर के नेतृत्व में संपन्न हुआ। उल्लेखनीय है कि निकोलोज़ त्सुलुकिद्जे जॉर्जिया के प्रतिष्ठित कलाकारों में शुमार हैं दारिस्पन पाराशर जॉर्जियन सांस्कृतिक समूहों को लेकर भारत में वर्षों से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं। उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार द्वारा उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।

इस अवसर पर जॉर्जियन कलाकारों का भारत-प्रेम अत्यंत भावपूर्ण रूप में सामने आया। यह कलाकार समूह बरसों से भारत के राष्ट्रीय पर्व और त्योहार—गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस, दिवाली, होली, गरबा—को पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाता रहा है। कार्यक्रमों में भारतीय वेशभूषा, भारतीय संगीत और नृत्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहते हैं। उल्लेखनीय तथ्य यह भी है कि भारत का राष्ट्रीय गान इन्हें पूर्ण रूप से कंठस्थ है, जिसे वे अत्यंत सम्मान के साथ गाते हैं।

वर्तमान में कविता अरोरा पिछले ढाई महीनों से जॉर्जिया में प्रवासरत हैं। रूस्तावली नेशनल थिएटर में हुआ यह विमोचन भारत और जॉर्जिया के बीच साहित्यिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय आत्मीयता का एक जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया।

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