लाइफ़ स्टाइल - Page 6
आह गुलज़ार देहलवी ! जहाँ इंसानियत वहशत के हाथों ज़िबह होती है
आह गुलज़ार देहलवी ! जहाँ इंसानियत वहशत के हाथों ज़िबह होती है
लेकर चली मां हजारों मील मासूमों को/ शर्म नहीं आती हुक्मरानों को और कानूनों को
लेकर चली मां हजारों मील मासूमों को/ शर्म नहीं आती हुक्मरानों को और कानूनों को












