मनरेगा क्यों संविधान की आत्मा मानी जाती है

जवाहर भवन में कांग्रेस और मनरेगा यूनियनों का जुटान

  • राहुल गांधी का आरोप: मोदी सरकार मनरेगा की मूल सोच खत्म कर रही है
  • किसान आंदोलन जैसा मॉडल अब मजदूरों पर?
  • केंद्रीकरण से कैसे छीना जाएगा मजदूरों का अधिकार
  • दलित, आदिवासी और ओबीसी समाज पर हमले का आरोप
  • संविधान, लोकतंत्र और ‘वन मैन वन वोट’ पर खतरा

राहुल गांधी का आह्वान: मजदूर एकजुट हों, मनरेगा बचे

राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। बोले— यह संविधान, मजदूर अधिकार और लोकतंत्र पर सीधा हमला है...

नई दिल्ली, 22 जनवरी 2026. जिस योजना ने गरीब को काम के लिए दर-दर भटकने से रोका, जिसे संविधान की आत्मा कहा गया — वही मनरेगा आज खतरे में है।

राहुल गांधी ने साफ शब्दों में आरोप लगाया है कि नरेंद्र मोदी और बीजेपी मनरेगा के मूल विचार को खत्म करना चाहते हैं, ताकि गरीबों का अधिकार छीना जा सके और ताकत फिर से कुछ चुनिंदा हाथों में सिमट जाए।

आज कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता विपक्ष राहुल गांधी के साथ देश से सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और मनरेगा यूनियन के नेता जवाहर भवन पहुंचे।

राहुल गांधी के भाषण का मुख्य केंद्र मनरेगा योजना और सरकार द्वारा इसे कमजोर करने के कथित प्रयासों पर है।

राहुल गांधी ने मनरेगा के कांसेप्ट पर बात की, जो गरीबों को काम का अधिकार देने के लिए था। इसका उद्देश्य था कि जिसे भी काम की जरूरत हो, उसे सम्मान के साथ काम मिले। यह योजना पंचायती राज सिस्टम के माध्यम से चलाई जानी थी, जिसमें मजदूरों की आवाज और सम्मान शामिल था, और हर गरीब व्यक्ति को रोजगार का अधिकार मिलता था।

राहुल गांधी के अनुसार, नरेंद्र मोदी और बीजेपी इस कांसेप्ट को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे कुछ साल पहले किसानों पर काले कानून लाकर हमला किया गया था, लेकिन किसानों ने दबाव डालकर उन कानूनों को रद्द करवा दिया। अब वही तरीका मजदूरों के साथ अपनाया जा रहा है।

उनका कहना है कि अब दिल्ली की सरकार तय करेगी कि पैसा कहां जाएगा, कितना जाएगा, किस राज्य और जिले को मिलेगा। बीजेपी शासित राज्यों को ज्यादा पैसा मिलेगा और विपक्षी राज्यों को कम। वे तय करेंगे कि किस तरह की मजदूरी चाहिए और इसे केंद्रीकृत तरीके से लागू करेंगे। इससे मजदूरों का अधिकार खत्म हो जाएगा और पैसा ठेकेदारों और नौकरशाही को मिलेगा।

राहुल गांधी ने बीजेपी की विचारधारा पर भी प्रकाश डाला, जिसमें हिंदुस्तान का धन और संपत्ति चुने हुए लोगों के हाथों में केंद्रित होती है, ताकि वे देश को चला सकें। गरीब लोग, खासकर दलित, आदिवासी और ओबीसी वर्ग के लोग, अदानी और अंबानी जैसे अमीरों पर पूरी तरह निर्भर हो जाएं। उनका मॉडल यह है कि अगर गरीब उनकी बात न मानें तो वे भूखे मर जाएं।

उन्होंने कहा कि यह संविधान पर हमला है, जैसा कि किसान बिल, नोटबंदी और गलत जीएसटी के साथ हुआ था। उनका मानना है कि बीजेपी संविधान, 'वन मैन वन वोट' के कांसेप्ट और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। वे आजादी से पहले के हिंदुस्तान जैसा माहौल बनाना चाहते हैं, जहां एक व्यक्ति (राजा-महाराजा) सब कुछ तय करता था और सारी संपत्ति उसके हाथ में होती थी।

राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें रोकने का एक ही तरीका है: मजदूरों को किसानों से प्रेरणा लेनी चाहिए और एकजुट होकर खड़े होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी डरपोक लोग हैं और अगर सब एक साथ खड़े हो जाएं, तो मोदी हट जाएंगे और मनरेगा फिर से चालू हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा का आंदोलन हिंदुस्तान के उन सभी गरीब लोगों के लिए एक बड़ा मौका है जो 'आइडिया ऑफ इंडिया', संविधान और लोकतंत्र में विश्वास करते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी देश के मजदूरों के साथ खड़ी रहेगी।