अंग्रेजी नहीं अब हिन्दुस्तानी- तमिल तेलगु हो या संथाली भाषी- हर जन भाषी की एक कहानी
अंग्रेजी नहीं अब हिन्दुस्तानी- तमिल तेलगु हो या संथाली भाषी- हर जन भाषी की एक कहानी
संविधान की धारा 348, 343(1)&(2), 351 में संशोधन की मांग को लेकर संदस के नाम खुला पत्र
अश्विनी कुमार
नई दिल्ली
31/07/2014
सेवा में,
माननीय लोकसभा के समस्त संदस गण,
C/o लोकसभा अध्यक्षा
लोकसभा,
संदस भवन
दिल्ली 110001
विषय :- माननीय गुलामी को बनाने रखने वाले तंत्र के रूप में ‘इंग्लिश मीडियम सिस्टम’ (अंग्रेजी राज)
- संविधान की धारा 348, 343(1)&(2) में संशोधन की मांग को लेकर संदस के नाम खुला पत्र-
सादर नमस्कार,
मैं तहें दिल आपके लोकसभा में भारतीय भाषाओं के विषय पर चर्चा करने के लिए धन्यवाद देता हूँ। आपके इस प्रयास से भाषा के लिए आनंदोलन करने वाले आनंदोलनकारियों को काफी बल मिला है। 29 तारीख को भी जो हुआ उसमे, ये चौथर शामिल नहीं थे। पुलिस या सत्ताधारी वर्ग ने अपने लोगों में से कुछ को इसमें भजका हरकतें करने के लिए भेजा था। लड़कों का कहना है कि वे उनके परिचितों में से नहीं थे। आपसे अनुरोध है कि यदि संभव हो तो इस पत्र को देश के सभी संदसों (वर्तमान एवं पूर्व), विधायकों, समस्त जनप्रतिनिधियों, प्रभुद्ध जनों, देश की हर चौपाल तक पहुँचाने में मेरी मदद करें। ताकि मैं हर एक तक ये बात पहुँचा सकें कि यदि आप अंग्रेजी व्यवस्था के साथ हैं, तो आप माननीय गुलामी को बनाने रखने वाले तंत्र का हिस्सा हैं।
मैं अपनी पुस्तक जिसका शीर्षक है,- ‘इंग्लिश मीडियम सिस्टम’, डेट इज ‘अंग्रेजी राज’: भ्रष्ट्राचार, शोशण, गैरेबारी की व्यवस्था पर ‘सांसक...


