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‘पंडित होई सो हाट न चढ़ा’: किशन पटनायक के चिंतन में बुद्धिजीवी, बौद्धिक गुलामी और बाजारवाद
‘पंडित होई सो हाट न चढ़ा’ में डॉ प्रेम सिंह ने किशन पटनायक के चिंतन के जरिए बुद्धिजीवी-वर्ग, बौद्धिक गुलामी, बाजारवाद, आधुनिक सभ्यता और वैकल्पिक विकास...
प्रेम,प्रकृति और परम्परा की सतरंगी बारिश में भीगी डॉ. कविता अरोरा की श्रव्य - दृश्य कविताएँ
-डॉ. रमाकांत शर्मा आज की कवयित्रियों में एक नाम ऐसा भी है जो अपनी विशेष काव्यसंवेदना और रचनाशीलता के चलते अपनी सर्वथा अलग पहचान बनाने में क़ामयाब हुआ...











