Kishan Patnaik
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‘पंडित होई सो हाट न चढ़ा’: किशन पटनायक के चिंतन में बुद्धिजीवी, बौद्धिक गुलामी और बाजारवाद

‘पंडित होई सो हाट न चढ़ा’ में डॉ प्रेम सिंह ने किशन पटनायक के चिंतन के जरिए बुद्धिजीवी-वर्ग, बौद्धिक गुलामी, बाजारवाद, आधुनिक सभ्यता और वैकल्पिक विकास...

Dr Prem Singh
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भारत छोड़ो आंदोलन: 9 अगस्त को लोहिया ने क्यों कहा था ‘भारत की जनता का दिन’?

भारत छोड़ो आंदोलन के 9 अगस्त 1942 के महत्व को लोहिया की दृष्टि से समझिए। क्यों था यह ‘भारत की जनता का दिन’ और आजादी के संघर्ष में जनता की क्या भूमिका...

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