अखबारों का जादू प्रेम
अखबारों का जादू प्रेम
झारखंड तथा जम्मू और कश्मीर में वोटों की गिनती के बाद एक बड़े हिंदी दैनिक की पहली खबर है – झारखंड, जम्मू में मोदी मैजिक, घाटी में फेल। खबर के शीर्षक के बारे में पत्रकारिता के विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है कि वह खबर का आइना होता है। शीर्षक देखकर ही पाठक खबर को पढ़ने या छोड़ने का फैसला करता है। इस लिहाज से अगर उपर्युक्त शीर्षक का विश्लेषण करें तो एक पल के लिए यह शीर्षक रूचिकर लग सकता है। म अक्षर की आवृत्ति के साथ इसमें ध्वनि साम्यता दी गई है। लेकिन इसके साथ ही यह शीर्षक और भी बहुत कुछ कहता है जिसे समझना जरूरी है।
शीर्षक, खबर के झुकाव को स्पष्ट करता है। वह खबर के लेखक, संपादकीय टीम, और अखबार की मनोदशा और उनके झुकाव को भी बताता है। चुनावों में बीजेपी को मिली सीटों की बढ़त को अखबार मोदी का मैजिक बता रहा है। मैजिक शब्द का अर्थ होता है जादू। जादू वो चीज है जिसमें कोई असंभव घटना होती हुई प्रतीत तो होती है पर वास्तव में होती नहीं। अखबार की संपादकीय टीम और खबर का लेखक यहां बीजेपी के प्रदर्शन को मोदी का जादू बताकर दरअसल मतदाताओं की महत्ता को खत्म कर रहे हैं। लोकतंत्र में कहने को तो नेता सेवक हैं और जनता मालिक है और इन चुनावों में जनता ने अगर बीजेपी की तरफ रूझान दिखाया है तो यह उसकी इच्छा है, न कि मोदी ने कोई जादू बिखेरा है। लोकतंत्र की एक प्रमुख प्रक्रिया को एक शख्स का जादू करार देना न सिर्फ नकारात्मक है बल्कि इससे लोकतंत्र में आस्था की कमी का संकेत भी मिलता है। अगर सचमुच चुनाव जादू से जीते जा सकते तो जादूगरों की ही पौ-बारह होती, नेता कहीं धूल फांक रहे होते।
दरअसल इस शीर्षक के मार्फत अखबार भी आम जनमानस की एक गलत प्रवृत्ति को ही आगे बढ़ा रहा है। भारतीय समाज जादू का बढ़ा प्रशंसक है। वह उसे मनोरंजन की बजाए आस्था की तरह ग्रहण करता है। यही कारण है कि जादू दिखाकर भ्रम फैलाने वाले बाबाओं का हमारे यहां बड़ा जाल फैला है। जनता भी इन तमाम तरह के बाबाओं के जाल में आसानी से फंस जाती है। लोग यह समझने को तैयार ही नहीं हैं कि जादू सिर्फ एक हाथ की सफाई है और इसका वास्तविकता से कुछ भी लेना देना नहीं है। अगर वाकई ऐसा ही होता तो दुनिया में कोई समस्या नहीं होती। अखबारों को अपने शब्द चयन पर सावधानी बरतनी चाहिए।
O- अवनीश
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