अखिलेश जी आपने हमारे ज़ख्म कुरेदे हैं, मुआवजा तो आपने अख़लाक़ के कातिलों भी दिया था
अखिलेश जी आपने हमारे ज़ख्म कुरेदे हैं, मुआवजा तो आपने अख़लाक़ के कातिलों भी दिया था
अखिलेश जी आपने हमारे ज़ख्म कुरेदे हैं, मुआवजा तो आपने अख़लाक़ के कातिलों भी दिया था
अखिलेश यादव को एक बच्चे का खुला ख़त
अहमद खबीर
ज़ियाउल हक़, तंज़ील अहमद और अख़लाक़ ये सारी मौतें हमें याद हैं।
हाँ मेने वो मंज़र अपनी आँखों से देखा है जब मुज़फ्फरनगर दंगे के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं की गाड़ियां उन सड़कों पर रह रहे दंगा पीड़ितों की आँखों में धूल उड़ाती हुई निकल गईं।
जिन लोगों के घरों को नेस्तनाबूद कर दिया गया कई सारे बच्चों को अनाथ कर दिया गया, कई सारी औरतों को बेवा कर दिया गया था, आप मुआवज़ा देने की बात करते हैं अखिलेश यादव जी।
जी हां मुआवज़ा तो आपने अख़लाक़ के क़ातिल को भी दिया है।
आपने ‘अखलाक’ के हत्यारोपी को बीस लाख मुआवजा दे दिया और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा की थी।
इससे आप क्या संदेश देना चाहते थे ? यही कि आपकी हुकूमत ने एक अखलाक जैसे बेक़सूरों को मारने की कीमत बीस लाख रुपये रखी है।
हक़ीक़त में आपने हमारे ज़ख्म कुरेदे हैं, अपने कितनों को मुआवज़ा दिया कितनों के घर बसाये सबको हक़ीक़त पता है।
मेरे पास आपके नेताओं की धूल उड़ाती हुई, निकलती हुई गाड़ियों की वो तस्वीर है जिसमे कुछ नंगे बदन बच्चे बड़ी आस लगाए हुए उन गाड़ियों के पीछे भागते हैं, और उनकी माएं पीछे से नंगे पैर उन्हें दौड़ा रही हैं और रो रही हैं।
उन यतीमों के सीने पर लग्ज़री गाड़ियों के टायरों और सायरन की आहटों से दहशत पैदा कर देने वाले नेताओं सब पता है जनता को कि कितनी हमदर्दी है आपको हमसे।
बुलंदशहर जिले में हुई गैंगरेप की घटना भी हमारी आँखों में हशाहजहांपुर जा रहे एक परिवार को बुलंदशहर में एंट्री करते ही कुछ बदमाशों ने उनकी कार को लोहे की रॉड से पीटना शुरू कर दिया. जैसे ही चालक ने गाड़ी रोकी, वैसे ही बंदूक की नोक पर हमलावर उन्हें बंधक बनाकर ले गए और कार में मौजूद मां और बेटी के साथ गैंगरेप किया.
यह घटना करीब रात डेढ़ बजे की थी जबकि पुलिस मौके पर करीब पांच बजे पहुंची.
पीड़ित महिला के पति का कहना था कि उन्होंने कई बार 100 नंबर पर फ़ोन किया लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया.
पुलिस की लचरता का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि वारदात पुलिस पोस्ट से महज़ 100 मीटर दूरी पर हुई लेकिन पुलिस को घटनास्थल पहुंचने में करीब साढ़े तीन घंटे लग गए.
इस घटना से सहमा और बुरी तरह टूट चुका परिवार जब पास के सरकारी अस्पताल पहुंचा, तो वहां मौजूद महिला डॉक्टर के संवेदनहीन रवैये से उनका आघात और गहरा हो गया.
35 साल की रेप पीड़िता ने बताया था कि 'मेरा पूरा शरीर कट-छिल गया था और मेरी बेटी का खून निकल रहा था लेकिन डॉक्टर को हम पर यकीन नहीं हुआ, उसने कहा कि हम उसकी ऐसी हालत के बारे में झूठ बोल रहे हैं.'
यही नहीं जब किशोरी ने अपनी आप बीती सुनाई तब भी डॉक्टरों ने उसे डांटकर कोने में बैठने को बोल दिया था क्योंकि वो लोग मुसलमान थे।
सीएम साहब ने अभी तक पीड़ित परिवार से मिलने की ज़हमत तक नहीं उठायी।
भोपाल एनकाउंटर के बाद प्रोटेस्ट करने जा रहे रिहाई मंच कार्यकर्ताओं को भी कितनी बेदर्दी से पीटा था आपकी पुलिस ने, वो मंज़र भाई हम नहीं भूले हैं, वो तस्वीर भी क़ैद हैं हमारी आँखों में।
बहुत मुहब्बत है न आपको मुसलमानों से, आपने उप्र टेक्निकल यूनिवर्सिटी का नाम कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी रख दे दिया वाक़ई अगर आपको इतनी मुहब्बत थी कलाम साहब से तो उनके नाम से एक नई टेक्निकल यूनिवर्सिटी तामीर क्यों नहीं करवा देते।
जी आपकी मुहब्बतों का बहुत बड़ा सबूत ये भी है आपके चचा शिवपाल यादव जी मोलाना जावेद आबादी साहब को मंच धक्का भी दे देते हैं। वाक़ई इससे और बड़ा सबूत क्या हो सकता है मुस्लमानों से मुहब्बत, अपने ने हमारी इज़्ज़त के राष्ट्रीय स्तर तक तार कर दिया, हमें बहुत उम्मीदें थीं आपसे।
सिर्फ ज़ियाउल हक़ ही नहीं तंज़ील भी मारे जाते हैं
और अख़लाक़ क के क़ातिल भी पैसों से नवाज़े जाते हैं
फुर्सत ही नहीं नेताओं को दर्द हमारा जो समझें
वो तो हमारे ज़ख्मों पर भी धूल उड़ाते जाते हैं
अहमद खबीर


