अगर आप मुलायम से सवाल नहीं पूछ सकते तो ओवैसी ने ठीक कहा हिन्दुस्तान में मुस्लिम लीडरशिप नहीं है
अगर आप मुलायम से सवाल नहीं पूछ सकते तो ओवैसी ने ठीक कहा हिन्दुस्तान में मुस्लिम लीडरशिप नहीं है
ओवैसी ने इन्डियन एक्सप्रेस में एक प्रश्न के जवाब में कहा आज हिन्दुस्तान में मुस्लिम लीडरशिप नहीं है।
क्या सच में नहीं है? अगर यह सच है तो सपा, बसपा, कांग्रेस में मुस्लिम राजनैतिक कौन है? क्या यह मुस्लिम लीडरशिप के उदाहरण नहीं हो सकते?
आज थोड़ा विचार इसी प्रश्न पर करते हैं। यूपी में इस समय सपा मुस्लिमों के लिए सबसे जिम्मेदार पार्टी मानी समझी जाती है। शायद सबसे ज्यादा मुस्लिम कार्यकर्ता इसी पार्टी में होंगे। तो क्या सपा के साथ जुड़कर मुस्लिम मुख्यधारा में खुद का बेहतर तरीके से विकास कर रहे हैं। क्या मुस्लिम विरोध की राजनीति करने वाली भाजपा को सत्ता से दूर रखने में सपा में रहकर मुस्लिम एक वोटर और राजनैतिक कार्यकर्ता के रूप में अपनी जिम्मेदारी सही से पूरी कर रहे हैं?
इस प्रश्न का फौरी जवाब बिहार के चुनाव में खोजा जा सकता है। मोदी नेतृत्व में भाजपा को सत्ता से दूर रखने के प्रयास में कांग्रेस, राजद और जदयू एक साथ मिलकर ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके बड़े नेताओं के दिल आपसे में चाहे जितना भी ना मिले हों, मगर बिहार की जनता को मोदी सरकार से असहमति का वोट देने का एक अवसर जरूर प्रदान किया है।
इस समय सपा का नेतृत्व अपनी अलग खिचड़ी पकाने में मस्त है। एक राजनैतिक दल के रूप में उनकी और ओवैसी की किसी भी मंशा पर शक करने का कोई भी आधार नहीं है। मगर सपा के मुस्लिम कार्यकर्ता अगर अपने शीर्ष नेतृत्व से इस बारे में प्रश्न नहीं पूछ सकते या विरोध का स्वर नहीं दे सकते, तो निश्चित ही ओवैसी का कथन कि देश में मुस्लिम लीडरशिप नहीं है, बिलकुल सही है।
काश, सभी पार्टियों के दलितों, अल्पसंख्यकों, पिछड़ों को यह हक़ हासिल होता कि वे अपने शीर्ष नेतृत्व से प्रश्न पूछ सकते और देश समाज के हित में निडर होकर पार्टी को दिशा निर्देश दे सकने की हालत में होते तो ओवैसी का प्रश्न हवा में उड़ा देने के लिए काफी होता।
मगर फिलहाल ओवैसी का प्रश्न जिन्दा है और उसका जवाब सपा, बसपा या राजद को नहीं बल्कि इन दलों के मुस्लिम कार्यकर्ताओ को देना है।
संदीप वर्मा
संदीप वर्मा, शिक्षक हैं व मंडल मसीहा वीपी सिंह के भक्त हैं।


