अविनाश वाचस्पति

अन्ना के रूप में देश में अब इंक्लाब आ चुका है और इसकी वायस खुद सरकार बनी है। उसने अन्ना को अनशन करने के लिए स्थान और अनुमति न देकर अपने लिए बिना पैसे के मुसीबत ले ली है। आज अन्ना हजारे बन गए हैं आंधी। जबकि कोई कह रहा है उन्हें दूसरा गांधी। परन्तु आज जो ताकत अन्ना की दिखलाई दे रही है, वो आंधी नहीं, सुनामी है। भ्रष्टाचारियों और उसके कर्ताधर्ताओं को अब सांप सूंघ गया है। सूंघने से चढ़े इस जहर का कोई तोड़ नहीं मिल रहा है। अन्ना का भ्रष्टाचार विरोधी यह मामला अब इतना तूल पकड़ चुका है कि इससे सरकार को निजात मिलती नहीं दिख रही है।
उधर राखी सावंत ने टीवी के अपने एक कार्यक्रम में अन्ना हजारे के समर्थन में उल्टे पांव दौड़ते हुए जाने की बात कहकर युवाओं में जोश भर दिया है। उल्टे पांव तो भूत और भूतनियों के होते हैं। आज जबकि लोगों में इतनी ताकत नहीं रही है कि कहीं सीधे पांव भी दौड़ लगाते हुए जा सकें, ऐसे में राखी ने उल्टे पांव दौड़ने की घोषणा करके गजब ढा दिया है। आज सब अपने अपने रुतबे के अनुसार वाहनों में दौड़ लगाते हैं। घर के द्वार से ही अपने वाहन में चढ़ जाते हैं। उससे पहले भी लिफ्ट में उतर कर आते हैं। उस पर राखी ने उल्टे पांव दौड़ने की बात कह कर अन्ना को अपना भाई स्वीकार कर लिया है।
बहरहाल, मुद्दा यह है कि वे भ्रष्टाचार के विरोध में भूतनी बनकर उतर आई है और प्रमाण स्वरूप उल्टे पांव दौड़ लगाकर साबित करने की मंशा से सराबोर है। भ से भ्रष्टाचार के मुकाबले में भ से भूतनी के उल्टे पांव देखकर ही अगर भ्रष्टाचार से छुटकारा मिल जाता है तो सौदा महंगा नहीं है। वैसे यह भी हो सकता है कि वे अन्ना की मर्दानगी को अब भी जांचना चाह रही हों कि कहीं वे भूत-भूतनियों से डरते तो नहीं हैं, तो उन्हें इतना जान लेना चाहिए कि जो भ्रष्टाचार की खिलाफत करने से नहीं डरा, वो भला इन नजर न आने वाले, ऊधमियों से क्या डरेगा। वे कितनी ही शैतानी ताकतें क्यों न हों, वे आजकल के भ्रष्टाचार विरोधी सत्तासीन नेताओं से तो उन्नीस ही बैठेंगी। सरकार और अन्ना के बीच रस्साकसी जारी है। लेकिन इस कसावट में सरकार का गला बुरी तरह कसता जा रहा है। इस समय भ्रष्टाचार और उसके हितैषियों के हाथ पांव फूले हुए हैं।
इससे राखी सावंत की उस दीवानगी का भी पता चलता है कि वे सदा सुर्खियों में बने रहने की चाहत से लवरेज रहती हैं और कोई मौका नहीं चूकती हैं। पर मैं हैरान हूं कि रा से राहुल और रा से रामदेव के बाद गणितीय आकलन के अनुसार अब रा से राजू श्रीवास्तव का नंबर होना चाहिए था परंतु बीच में अ से अन्ना हजारे पर उनकी दीवानगी आजकल अन्ना जी के सुर्खियों में बने रहने का कमाल ही है। भ्रष्टाचार की टीआरपी चाहे कम हो गई है परंतु अन्ना हजारे की टीआरपी में तीव्र गति से इजाफा हो रहा है।