अन्ना की जान को खतरा- आप का दावा
अन्ना की जान को खतरा- आप का दावा
नई दिल्ली। क्या तथाकथित समाजसेवी अन्ना हजारे की जान को खतरा है ? वह भी किसी और से नहीं अन्ना की नई ईजाद जनतंत्र मोर्चा से ? यह हम नहीं कह रहे बल्कि आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता होने का दावा करने वाले लोगों की ओर से ऐसे संदेश भेजे जा रहे हैं।
दरअसल दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी ने बहुत तेजी के साथ पकड़ बनाई और बहुत कम समय में वह सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन गई जबकि अभी तक मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी तीसरे पायदान पर खिसक गई। समझा जाता है कि दिल्ली में उसी दिन तय हो गया था जिस दिन भाजपा ने विजय गोयल को धकियाकर हर्षवर्धन को अपना कमाणडर घोषित किया था कि अब मुख्य मुकाबला कांग्रेस और “आप” के बीच है। विजय गोयल के अपमान से क्षुब्ध भाजपा का परंपरागत वैश्य वोटर अपने स्वजातीय केजरीवाल की ओर झुक गया था। जाहिर है यह भाजपा के लिए चिंता का विषय था, वह भी तब जब उसने गुजरात से कोई शेर पकड़कर देश में छोड़ दिया हो। लिहाजा भाजपा और आप में टकराहट बढ़ने लगी। लेकिन पत्रकार अनुरंजन झा के पोर्टल मीडिया सरकार द्वारा “आप” के बड़े नेताओं खास कर कुमार विश्वास व शाजिया इल्मी के किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन से आप को जबर्दस्त धक्का लगा और भाजपा को तगड़ा फायदा हुआ। इसी बौखलाहट में “आप” समर्थक कुछ मीडियाकर्मियों ने अनुरंजन झा के खिलाफ अशिष्ट भाषा में (जिस पर आप व संघ कबीले का कॉपीराइट है) कुत्सा अभियान भी चलाया।
हालांकि भाजपा और “आप” एक ही स्कूल के विद्यार्थी समझे जाते हैं और गोयबिल्स दोनों के आदर्श समझे जाते हैं। सोशल मीडिया और न्यू मीडिया पर जिस तरह आजकल मोदी समूह हावी है दरअसल यह तकनीक केजरीवाल ने ही भाजपा को समझाई थी।
प्रोपेगंडा में आप कितना आगे है इसको एक उदाहरण से समझा जा सकता है। पंकज चतुर्वेदी, वरिष्ठ पत्रकार हैं और उस समय से अन्ना-केजरीवाल की नीतियों का विरोध कर रहे हैं जब अच्छे-अच्छे तीसमारखां इस सियासी गैंग के सामने नतमस्तक हो रहे थे। पंकज जी के नाम से प्रख्यात कार्टूनिस्ट और लेखक आबिद सुरती (धर्मयुग का ढब्बू जी याद हो) को लगातार एसएमएस आ रहे थे जिसमें आप व केजरीवाल के समर्थन के नारे होते थे। आबिद भाई को लगा कि पंकज जी का कोई समर्थन केजरीवाल को है, सो वे दिल्ली आ रहे थे तो उन्होंने संदेश दिया कि वे भी केजरीवाल के पक्ष में दो दिन प्रचार के लिए दे सकते हैं। पंकज चतुर्वेदी बताते हैं कि “निहायत मेरे नाम के कारण उन्होंने ऐसा संदेश दिया” लेकिन केजरी पार्टी ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया।
पंकज चतुर्वेदी कहते हैं, “आबिद भाई इस फर्जीवाड़े से बेहद दुखी हैं। मैंने भी केजरी को मेल किया है लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। आप लोग चाहें तो आबिद भाई से इसकी हकीकत पूछ सकते हैं। बड़ा फ्राड है भाई यह तो।”
अब “आप” के सदस्यों की ओर से एक ईमेल अभियान चलाया गया है। उस अभियान का एक मेल हमें भी मिला है जो “आप” का कार्यकर्ता होने का दावा करने वाले किन्हीं R S तरफ से भेजा गया है। एकबारगी तो लगा कि यह कोई फर्जी मेल अभियान है लेकिन तहकीकात करने पर पता चला कि यह किन्हीं रमेश सिंह की आईडी है और भेजे गए मेल की कथावस्तु रमेश सिंह के फेसबुक पेज पर भी उपलब्ध है।
“ANNA’S LIFE IN DANGER” शीर्षक से जारी इस मेल में दावा किया गया है कि चुनाव प्रचार के इस पखवाड़े के आखिरी में “आप” के ऊपर कई प्रकार के आरोप लगना शुरू हो जाएंगे। वे सभी लोग जो भ्रष्टाचारसंपन्न हैं और जिन्हें इस व्यवस्था में हिस्सा मिल गया है (वे राजनेता, नौकरशाह व अन्य हो सकते हैं), “आप” को पटरी से उतारने के लिए भरसक प्रयत्न कर रहे हैं और वे ऐसा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। इन दिनों (विशेष रूप से पिछले तीन से चार दिनों में) जो भी हो रहा है वह उनके द्वारा रची कि भयावह डिजाइन का हिस्सा है।
मेल में दावा किया गया है कि प्रेषक के पास कई महत्वपूर्ण सूचनाएं हैं और इनमें सबसे महत्वपूर्ण है कि अगले चार या पांच दिन में अन्ना के आंदोलन के नए संगठन जनमोर्चा की ओर से धमाके किए जाएंगे अगर इससे पहले आम आदमी पार्टी की ओर से कुछ भी नहीं किया गया तो। मेल में कहा गया है कि आम आदमी पार्टी को नेस्तनाबूद करने के लिए यह समूह सब कुछ व्यवस्थित ढंग से कर रहा है। सर्वप्रथम विदेशी कोष के दुरुपयोग के आरोप, फिर आईएसी के फण्ड के हेराफेरी के आरोप और उन पर अन्ना के विचार, लेकिन अन्ना खुद इतना असंगत हैं कि यह पार्टी के लिए ज्यादा नुकसान नहीं कर पा रहे।
आर एस कहते हैं कि वह दावे के साथ तो नहीं कह सकते कि हालिया सटिंग ऑपरेशन इस षडयंत्र का हिस्सा था अथवा नहीं। हो सकता है यह विचार बीच में आया हो। मान लीजिए अगर अभी भी इसको न रोका गया तो इस समूह का आगे क्या कदम होगा? आर एस कहते हैं यह बहुत उद्दंड (drastic) हो सकता है क्योंकि चुनाव के कुछ दिन ही शेष बचे होंगे। वह लिखते हैं, चिंता कीजिए यह इन अनैतिक तत्वों के लिए जीवन-मरण का प्रश्न है। यह निष्कर्ष निकाला क्यों नहीं जा सकता कि वे अन्ना को इस तरह मारना चाहेंगे कि या तो यह आत्महत्या लगे या अन्ना के किसी भूतपूर्व विश्वासपात्र द्वारा की गई हत्या मालूम पड़े ? वह सवाल छोड़कर कि “अगर ऐसा होता है?” अपने पत्र की इति श्री कर लेते हैं। (Why can’t it be concluded that they will try to eliminate Anna in such a way that it either looks likes suicide or murder by one of his erstwhile confidants? If that happens?)
आर एस का यह मेल अन्ना से जुड़े लोगों खासकर जनतंत्र मोर्चा के लोगों पर गंभीर आरोप है। इस मोर्चा में भाजपा और नरेंद्र मोदी के नजदीकी पूर्व सेनाअध्यक्ष जनरल वीके सिंह, वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय और पूर्व पुलिस अधिकारी किरन बेदी जुड़ी हुई हैं। इन तीनों को ही भाजपा की बी टीम समझा जाता है और आप के बढ़ने से नुकसान भी भाजपा को ही हो रहा था क्योंकि दिल्ली में मुकाबला “आप” और कांग्रेस के बीच सिमटता जा रहा था। क्या यह समझा जाए कि “आप” समर्थकों का यह नया अभियान भाजपा और “आप” के बीच जारी तू डाल-डाल, मैं पात-पात की अगली कड़ी है। बहरहाल आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को इस मेल अभियान पर अपना रुख स्पष्ट करना चहिए कि क्या यह उनकी पार्टी की रणनीति का हिस्सा है?


