अपनी खबरों के स्रोत का खुलासा करें समाचारपत्र
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नई दिल्ली। मीडिया स्टडीज़ ग्रुप ने प्रेस काउंसिल ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष जस्टिस मार्कण्डेय काटजू को पत्र लिखकर माँग की है कि समाचार पत्रों को ये निर्देश दिये जायें कि वे खबरों व सामग्री के स्रोत के लिये केवल एजेंसी लिखने के बजाय एजेंसी के नाम का उल्लेख करें। ऐसा करने से पाठकों के अधिकारों की हिफाजत भी की जा सकेगी। नाम लेने से एजेंसियों की जिम्मेदारी भी तय हो सकेगी।
ग्रुप की ओर से लिखे पत्र में वरिष्ठ पत्रकार अनिल चमड़िया ने कहा है कि “आमतौर पर आप भी यह देखते होंगे कि समाचार पत्रों में खबरों के स्रोत के रूप में एजेंसी शब्द का तो इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन एजेंसी के नामों का उल्लेख नहीं किया जाता है। आखिर इसके पीछे क्या इरादे हो सकते हैं ? हमने अब तक इस विषय पर कोई विघिवत अध्ययन तो नहीं किया है लेकिन मौटे अध्ययन के बाद यह कहने की स्थिति में हैं कि खबरों के स्रोत के रूप में एजेंसी के नामों का उल्लेख नहीं करने के पीछे कोई स्वस्थ्य इरादा नहीं दिखाई देता है। कई तरह के फर्जीवाड़े के खपने की संभावनाएं इसमें बनी रहती है।"
श्री चमड़िया ने लिखा, "पाठकों का यह अधिकार है कि वह जिन खबरों या सामग्री को पढ़ रहा है उसके स्रोत क्या है। स्रोत की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण होती है। अपने देश में कुछ विषयों को छोड़कर अभी तक विदेशी समाचार एजेसियों के सीधे समाचार पत्रों के साथ व्यापार करने की स्वतंत्रता नहीं है। देश की एजेंसियों के जरिये उन्हें अपना करोबार करना होता है। लेकिन एजेंसी के नामों का उल्लेख नहीं होने के कारण ये भी पता नहीं चल पाता है कि प्रस्तुत सामग्री के लिए कौन किस हद तक जिम्मेदार हैं। देश की एजेंसियों के नाम की ख्याति भी पाठकों के बीच खत्म होती हैं।“


