अपने लूटतंत्र को बचाने के लिये मुसलमानों को ढाल न बनाये सपा सरकार- रिहाई मंच
अपने लूटतंत्र को बचाने के लिये मुसलमानों को ढाल न बनाये सपा सरकार- रिहाई मंच
4 अगस्त रविवार को धरने के 75 वें दिन
नमाज-ए-मगरिब और संयुक्त दुआ का आयोजन
लखनऊ 3 अगस्त। रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा है कि प्रदेश सरकार जिस तरह से सियासत के लिये अवाम को दंगे की आग में झोंक रही है और जिस तरह से गौतम बुद्ध नगर की आईएएस अधिकारी के नाम पर खनन माफियाओं को बचाने और मुद्दे को सांप्रदायिक तूल देने की कोशिश की उसने अखिलेश यादव के सांप्रदायिक चेहरे को एक बार फिर सामने ला दिया कि कैसे सरकार मुसलमानों को झाल बनाकर भ्रष्टाचार का खेल-खेलने की नाकाम कोशिश कर रही है।
श्री शुऐब ने कहा कि जिस तरीके से गौतमबुद्ध नगर मामले में खनन माफियाओं की बात सामने आ रही है ऐसे में हम अखिलेश यादव से पूछना चाहेंगे कि उन्होंने जिस तरीके से सांप्रदायिकता को रोकने का झूठा तर्क व तत्परता इस मामले में की आखिर कोसी कलां दंगे में जुड़वा भाईयों कलुआ और भूरा को जिंदा जला देने के बाद, बरेली व प्रतापगढ़ के अस्थान में दो-दो बार दंगों के बाद, रुदैली, भदरसा समेत फैजाबाद शहर में हुये दंगों के बाद या फिर पिछले तीन दिनों से लखनऊ में चल रहे फसाद में क्यों नहीं दिखायी। किसी जिलाधिकारी का या वरिष्ठ पुलिस अधिक्ष को निलंबित क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बतायें कि इतनी बड़ी-बड़ी सांप्रदायिक घटनाओं और जहाँ तक बात है कि मुसलमानों के अकीदे की तो फैजाबाद में सपा व बजंरग दल-हिंदू युवा वाहिनी के सांप्रदायिक तत्वों ने प्रशासन की निगरानी में ऐतिहासिक मस्जिद हसन रजां को जिस तरह से जलाया, तोड़फोड़ किया उस घटना पर आखिर क्यों नहीं इतनी तत्परता दिखाई।
मोहम्मद शुएब ने कहा कि खालिद मुजाहिद की हत्या के बाद अखिलेश यादव ने यह तत्तपरता नहीं दिखायी और अपने पुलिस और आईबी अधिकारियों को बचाने में लग गये, जो साबित करता है कि सपा सरकार के लिये मुसलमान सिर्फ एक ढाल हैं जिसे जब चाहे तब सरकार इस्तेमाल कर सकती है।
धरने को संबोधित करते हुये मुस्लिम मजलिस के नेता जैद अहमद फारुकी ने कहा कि जिस तरह से समाजवादी सरकार के बचाव में तथाकथित उलेमा और इमाम, मौलाना खालिद मुजाहिद की हत्या के बाद सरकार के बचाव में उतरे थे ठीक उसी तरह आज फिर आईएएस अधिकारी दुर्गा नागपाल और पुराने लखनऊ फसाद पर घिरी सरकार के बचाव में खड़े हो गये हैं। ऐसी करतूतों से पूरा मुस्लिम उलेमा समाज बदनाम होता है। उन्होंने लखनऊ के अवाम से कहा कि शिया-सुन्नी का झगड़ा मजहबी झगड़ा नहीं है, सियासी पार्टियों के नफा नुकसान का झगड़ा है, जिसे अपने वक्त में अंग्रेज भी इस्तेमाल करते थे। जैद अहमद फारुकी ने कहा कि इस पूरे मसले में उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी पार्टी बसपा की खामोशी दंगे पर सरकार से गठजोड़ की साजिश लगती है।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब और मुस्लिम मजलिस के नेता जैद अहमद फारुकी ने अवाम से अपील की कि कल आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई के लिये चल रहे संघर्ष के 75 दिन पूरे हो रहे हैं इस मौके पर कल मगरिब के बाद नमाज, संयुक्त दुआ व अफ्तार का आयोजन किया गया है, इस मौके पर इंसाफ पसन्द अवाम शिरकत करे।
सामाजिक कार्यकर्ता अंकित चौधरी ने कहा सपा सरकार बेगुनाह मुस्लिम युवकों के सवाल पर हत्यारोपी दोषी पुलिस अधिकारियों को बचा रही है और मौलाना खालिद की हत्या को बीमारी साबित करने पर तुली है वो झूठी सरकार अब गौतमबुद्ध नगर की आईएएस के मामले में खनन माफियाओं के साथ खड़ी है।
इस मौके पर हरे राम मिश्रा ने कहा कि पूरे सूबे में सपा के नेताओं और अराजक तत्वों ने असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सपा नेताओं के इस लूट खसोट को चुनाव में सपा के निश्चित दिख रही हार से उपजी कुठा का परिणाम बताते हुये उन्होंने कहा कि सपा नेताओं को लग गया है कि जनता उनकी जमानत जप्त करने वाली है इसलिये उन्होंने लूटने का काम शुरू कर दिया है कि इसके बाद शायद मौका ना मिले।
हाजी फहीम सिद्दिकी ने धरने को सम्बोधित करते हुये कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार जिस तरह से अपने वादे से मुकर गयी है हम लोग रिहाई मंच के धरने के पिछले 74 दिन से रोजे की हालत में बैठने के लिये मजबूर किया है, जिस तरह से संयुक्त दुआ से एक रात पहले मंच के टेंट को उखड़वाया और हमारी धार्मिक भावनाओं को आहत किया, इससे साफ है कि इतनी मुस्लिम विरोधी सरकार आजाद भारत में देखने को नहीं मिली। इतिहास मुलायम को मोदी के साथ ही करेगा।
रिहाई मंच के प्रवक्ताओं ने बताया कि कल रिहाई मंच के संघर्ष के 75 दिन पूरे होने पर संयुक्त दुआ बाराबंकी के मौलाना सूफी उबैदुर्रहमान की सरपरस्ती में की जायेगी। उन्होंने बताया कि कल अलविदा नमाज के बाद आतंकवाद के नाम पर फँसाये गये आजमगढ़ के तारिक कासमी से मौलाना सूफी उबैदुर्रहमान ने जेल में मुलाकात की।
धरने को संबोधित करते हुये सामाजिक कार्यकर्ता आदियोग ने कहा कि धरने के 75 वें दिन से वरिष्ठ मूर्तिकार धर्मेन्द्र कुमार के नेतृत्व में कलाकरों का जत्था सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को आकार देने की शुरुआत करेगा। स्थापन कला का यह प्रयोग ईद के दिन पूरा होगा और उसी इसका लोकार्पण किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश की कचहरियों में सन् 2007 में हुये सिलसिलेवार धमाकों में पुलिस तथा आईबी के अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से फँसाये गये मौलाना खालिद मुजाहिद की न्यायिक हिरासत में की गयी हत्या तथा आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट पर कार्रवायी रिपोर्ट के साथ सत्र बुलाकर सदन में रखने और खालिद के हत्यारों की तुरन्त गिरफ्तारी की माँग को लेकर रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को 74 वें दिन भी जारी रहा।
धरने का संचालन हरेराम मिश्र ने किया। धरने को मोहम्मद सलमान, रफीक सुल्तान खान, पीसी कुरील, भवननाथ पासवान, मोहम्मद सुलेमान, एहसानुल हक मलिक, मौलाना कमर सीतापुरी, हाजी फहीम सिद्दीकी, शिवनारायण कुशवाहा, प्रबुद्ध गौतम, योगेन्द्र सिंह यादव, डॉ. मसीहुद्दीन खान, डॉ. कासिफ अहमद, मोहम्मद कासिम, हरे राम मिश्रा, बब्लू यादव, मोहम्मद फैज, शाहनवाज आलम और राजीव यादव आदि ने संबोधित किया।


