अब तेरी खैर नहीं भ्रष्टा
अब तेरी खैर नहीं भ्रष्टा
कहते हैं कि बकरी की अम्मा कब तक खैर मनाएगी । हालांकि यह मुहावरा बदल गया है । अब कहा जाता है कि बाघ का बच्चा कब तक खैर मनाएगा । एक दिन मिट जाएगा पैसे के मोल । अब देखिए न कि बाघ खत्म होता होता ख्त्म नहीं होता । पता नहीं वह नीरा राडिया के प्राकृतिक संसाधन में था या नहीं । लेकिन स्पेकट्रम की दुनिया के एक मुसाफिर की तरंगो में यह भी समाया था । इस हवाई तरंग से टाटा का भी रिश्ता है । बाघ बचाने के लिए व्याकुल भारत बने एनडीटीवी की हीरोइन से भी संबंध है । लेकिन भ्रष्टा अब तेरी खैर नहीं । जैसे देश में महंगाई बढ़ी है , वैसे ही तुझे खत्म करने की मुहिम बढ़ी है । अब तो तुझे होना ही है नष्टा – नष्टा ।
कहते हैं कि जब जब इंडिया भूमि पर भ्रष्टाचार बढ़ता है , तब तब एक अवतार होता है । हुंकार कर वह कहता है , रुक रुक के न मुझे देख , मैं भी तो नहीं कहता कि मुड़मुड़ के न देख । अचानक बैकग्राउंड में बाजार का गाना बजने लगता है , ‘ देख लो आज मुझ को जी भर कर ...।‘ हुंकार बड़ी मिमियाती आवाज में बोलता है , ‘ गलतियां किससे नहीं होती । अगर न होतीं तो यह शब्द ही नहीं होता । मुझसे भी हो गई होंगी – हमका माफी देइ दो , हम हाजिर हो जाएंगे लोकलेखा


