अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पर कतरने की तैयारी, भाजपा नेता बनेंगे सदस्य
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पहली बार होगा किसी नेता का ‘प्रवेश’, भाजपा उपाध्यक्ष को दिया जाएगा पद

नई दिल्ली। संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बनाने की सरकार की मुहिम के तहत अब कई बड़े मसलों पर सरकार के लिए सिरदर्द साबित हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की बारी है।

भारतीय जनता पार्टी के नेता अविनाश राय खन्ना को जल्द ही नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन (NHRC) का सदस्य चुना जा सकता है।
ऐसा होता है तो अविनाश वह पहले नेता होंगे जो NHRC के सदस्य बनेंगे क्योंकि अब तक इसमें किसी राजनेता को शामिल नहीं किया जाता था।
इंडियन एक्सप्रेस ने In a first, NHRC prepares for a political appointee शीर्षक से एक खबर प्रकाशित की है, जिसके मुताबिक कि अगले कुछ दिनों में अविनाश राय खन्ना को सदस्य के रूप में चुन लिया जाएगा।
खबर के मुताबिक, अविनाश को जिस पोस्ट पर रखा जा रहा वह पिछले दो साल से खाली पड़ी थी। अविनाश भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष हैं। वह जम्मू कश्मीर में पार्टी के इंचार्ज भी हैं। वह इस साल के अप्रैल तक राज्य सभा के सदस्य भी रहे हैं।
गौरतलब है कि NHRC के मेंबर चुनने के लिए उच्च स्तरीय बैठक होती है। उस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। उनके अलावा बैठक में लोकसभा अध्यक्ष, केंद्रीय गृहमंत्री, लोकसभा में विपक्षी के नेता, राज्यसभा में विपक्ष के नेता और राज्यसभा के उपसभापति शामिल होते हैं।
खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिछले महीने यह बैठक हुई थी। बैठक में अविनाश राय खन्ना के अलावा कुछ और नामों पर चर्चा की गई थी लेकिन उनमें से अविनाश के नाम पर मुहर लगाई गई।

खबर में कहा गया है कि पैनल के एक सदस्य ने बताया कि अविनाश राय खन्ना का नाम बिना किसी विरोध के फाइनल किया गया था।
खबर के मुताबिक सदस्य ने आगे बताया कि नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन के संविधान के मुताबिक भारत का कोई भी पूर्व चीफ जस्टिस NHRC का चेयरपर्सन चुना जा सकता है। इसके अलावा चार पूर्णकालिक सदस्य होते हैं। उनमें सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज, उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के अलावा दो और सदस्य शामिल होते हैं। लेकिन उन दो लोगों को मानव अधिकार से संबंधित ज्ञान होना चाहिए।
खबर के मुताबिक NHRC के एक पूर्व सदस्य ने अविनाश का नाम सामने आने पर विरोध जाहिर किया। उन्होंने कहा,

‘किसी राजनेता के इसमें शामिल होने पर कोई रोक नहीं है। लेकिन फिर भी उनको चुनना सवालों के घेरे में है। यह गलत संदेश देता है। क्या कमेटी को कोई ऐसा नहीं मिला जिसका राजनीति से कोई संबंध ना हो?’

खन्ना ने उनकी होशियारपुर सीट के रिजर्व हो जाने के बाद 2009 से चुनाव नहीं लड़ा है।
पंजाब में शिरोमणि आकाली दल और बीजेपी की गठबंधन सरकार ने अविनाश को पंजाब राज्य के ह्यूमन राइट कमीशन का सदस्य बनाया था। हालांकि, उन्होंने 13 महीने बाद राज्यसभा सांसद चुने जाने के बाद ही उस पद से इस्तीफा दे दिया था।
गौरतलब है कि जब भाजपा विपक्ष में थी तब उसकी तरफ से सरकार पर दवाब डाला जाता था कि वह किसी ऐसे को ना चुने जिसके राजनीति से संबंध हों। 2013 में तब के राज्यसभा के विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज Cyriac Joseph को ना चुनने के लिए कहा था। बताया जाता है कि इसके लिए जेटली ने लिखित में दिया था कि जोफस कुछ राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के करीबी हैं। हालांकि, तब से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनकी बात नहीं मानी थी और जोसफ को चुन लिया गया था।
This is the first time an active politician is being appointed to the post, which has remained vacant for over two years now.