अमिलिया में नई ग्राम सभा से पहले उठने लगे कई सवाल
अमिलिया में नई ग्राम सभा से पहले उठने लगे कई सवाल
सिंगरौली। विवादित महान कोल ब्लॉक को महान जंगल क्षेत्र आवंटित करने के प्रयास के तहत प्रशासन ने एक बार फिर से अमिलिया में नया ग्राम सभा करवाने का फैसला किया है लेकिन इस ग्राम सभा से पहले ही कई सवाल उठने लगे हैं।
दूसरी तरफ दूसरे चरण की पर्यावरण मंजूरी पर भी सवाल उठने लगे हैं। यदि यह मंजूरी फर्जी ग्राम सभा के आधार पर दी गयी है तो क्या वन व पर्यावरण मंत्रालय इस मंजूरी को रद्द कर सकता है।
सिर्फ अमिलिया ही क्यों?
प्रशासन ने अमिलिया में ग्राम सभा करवाने का फैसला किया है जबकि कोयला परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से 54 गाँवों के लोगों की जीविका प्रभावित होगी। ऐसे में क्षेत्र के दूसरे ग्रामीण असमंजस की स्थिति में हैं। उनका कहना है कि महान जंगल में वो सदियों से अपनी जीविका के लिए निर्भर रहे हैं लेकिन आज प्रशासन सिर्फ अमिलिया वालों से जंगल के भविष्य का निर्णय करवा रहा है।
वनाधिकार कानून पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
वनाधिकार कानून 2006 के तहत प्रस्तावित ग्राम सभा से पहले स्थानीय जंगलवासियों को सामुदायिक वनाधिकार दिया जाना जरूरी है लेकिन अमिलिया सहित दूसरे गांवों में वनाधिकार को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक तरफ प्रशासन के अनुसार अमिलिया में सामुदायिक वनाधिकार की प्रक्रिया पूरी हो गई है वहीं दूसरी तरफ महान संघर्ष समिति का आरोप है कि अभी तक किसी भी ग्रामीण को वनाधिकार का पट्टा नहीं दिया गया है। अगर प्रशासन की बात सच भी है तो जानकार बताते हैं कि परियोजना से 54 गांव प्रभावित होंगे फिर सिर्फ अमिलिया में वनाधिकार की प्रक्रिया पूरी करने की बजाय 54 गांवों में यह प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए इसके बाद ग्राम सभा का आयोजन करवा कर इन गांवों से जंगल पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
फिलहाल नया ग्राम सभा की घोषणा करने वाले जिला कलेक्टर एम सेलेवेन्द्रन का तबादला हो चुका है और बहुत कुछ नये जिला कलेक्टर पर निर्भर करेगा, जिन्होंने अभी-अभी कमान अपने हाथ में ली है।


