अमिलिया में निष्पक्ष ग्राम सभा के लिए विदेश में भी हुए संगठन लामंबद
अमिलिया में निष्पक्ष ग्राम सभा के लिए विदेश में भी हुए संगठन लामंबद
सिंगरौली। 18 अगस्त। महान कोल ब्लॉक के आवंटन के लिए अमिलिया में प्रस्तावित ग्राम सभा को निष्पक्ष कराने की मांग को लेकर ग्रीनपीस इंटरनेशल ने आज ग्रीनपीस इंडिया के साथ खड़े होते हुए भारतीय सरकार से पारदर्शी ग्राम सभा करवाने की मांग की है।
सिंगरौली के स्थानीय प्रशासन ने इस महीने अमिलिया में विशेष ग्राम सभा करवाने की घोषणा की है, जिसमें वन समुदाय खदान के बारे में राय देंगे। ग्रीनपीस इंडिया और स्थानीय समुदाय के द्वारा पिछले साल हुए फर्जी ग्राम सभा के खुलासे के बाद यह दूसरी बार है जब प्रशासन ने दुबारा ग्राम सभा करवाने का निर्णय लिया है।
ग्रीनपीस इंडिया की प्रिया पिल्लई ने कहा कि ग्राम सभा की घोषणा के बीच स्थानीय समुदायों को डराने-धमकाने की कोशिश भी की जा रही है। इसी के तहत ग्रीनपीस के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार और उनके सामान को जब्त भी किया गया है। महान कोयला खदान से सिर्फ पर्यावरण को ही भारी नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा बल्कि महान जंगल पर जीविका के लिए निर्भर हजारों लोगों का जीवन भी खतरे में पड़ जाएगा। इस बीच प्रशासन द्वारा जिस तरह से हमें दबाये जाने की कोशिश की जा रही है उससे हम और मजबूत होकर महान जंगल को बचाने की लड़ाई की तरफ केन्द्रित हो रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अगर हम भारतीय अपने देश को समावेशी विकास और लोकतंत्र वाले देश के रुप में दिखाना चाहते हैं तो ग्राम सभा को पर्दे के पीछे करवाने की साजिश को खत्म करना ही होगा। हम सरकार से मांग करते हैं कि सामुदायिक वनाधिकार को पहले लागू करवाने के बाद एक निष्पक्ष और स्वतंत्र ग्राम सभा का आयोजन करवाया जाय और यही प्रक्रिया परियोजना से प्रभावित होने वाले सभी 54 गांवों में लागू किया जाये।
महान जंगल सिंगरौली के बचे-खुचे जंगलों में से एक है, जिसमें हजारों आदिवासियों और जंगलवासियों की जीविका निर्भर है। यह जंगल दुर्लभ साल के वृक्षों के साथ-साथ कई तरह के वन्यजीवों से भी भरा हुआ है।
सुश्री पिल्लई ने बताया कि ग्रीनपीस इंडिया पिछले तीन सालों से स्थानीय समुदाय का समर्थन कर रही है जो अपने जंगल को खदान से बचाने के लिए और जंगल पर वनाधिकार पाने के लिए प्रयासरत हैं। ग्रीनपीस के इस प्रयास के बदले एस्सार ने उसपर 500 करोड़ के मानहानि का मुकदमा दर्ज कर रखा है।
ग्रीनपीस इंटरनेशलन के कार्यकारी निदेशक कुमी नायडू ने कहा कि यह कोयला खदान पर्यावरण और लोगों के लिए खतरनाक है। ग्रीनपीस महान के समुदाय के साथ खड़ी है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयासरत है। सरकार को अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने वाले समुदायों की आवाज को सुनना चाहिए और एक निष्पक्ष तथा पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर ग्रामीणों की आवाज को सम्मान देना चाहिए।
नायडू ने आगे कहा कि ग्रीनपीस इंडिया वैश्विक समस्या से निपटने के लिए कुछ हिस्सा विदेशी चंदे का लेती है। इसके बावजूद पर्यावरण के मुद्दे पर अलार्म बचाने वाले सीविल सोसाइटी की आलोचना की बजाय सरकार को अक्षय ऊर्जा के बारे में सोचना चाहिए, जिससे देश के करोड़ों लोगों तक बिजली पहुंचाया जा सकता है।


