भारत की साझी संस्कृति को नष्ट कर, अतिवादियों को स्थापित करने की बहुत बड़ी योजना का एक छोटा लेकिन अत्यधिक महत्वपूर्ण हिस्सा था बाबरी मस्जिद विध्वंस

‘‘अयोध्या की वह स्याह रात’’ पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन शाने अवध के सभागार फैजाबाद में सम्पन्न
फैजाबाद। ‘‘अयोध्या की वह स्याह रात’’ पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन शाने अवध के सभागार में सम्पन्न हुआ। यह पुस्तक 23 दिसम्बर 1949 की रात बाबरी मस्जिद में रामलला की मूर्ति स्थापना की घटना से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजी शोध पर आधारित है।
इस पुस्तक के लेखकद्वय में से एक वरिष्ठ पत्रकार सुश्री कृष्णा झा ने कहा कि ‘‘अयोध्या विवाद में हाई कोर्ट के पंचायती फैसले के बाद से ही हमने इस पुस्तक पर काम शुरू कर दिया था। जैसे-जैसे हम इससे जुड़े तथ्यों की खोज में आगे बढ़ते गए वैसे-वैसे यह गुत्थी एक विशाल षडयंत्र के हिस्से के रूप में दिखाई देने लगी। पुस्तक पढ़ने पर सभी संवेदनशील बहुसंख्यक मूल विवाद की सत्यता जान पायेंगे’’।
इस पुस्तक के दूसरे सह-लेखक धीरेन्द्र कुमार झा ने कहा कि ‘‘पूरी तैयारी और सूझबूझ के साथ गढे गए इस विवाद की योजना में राजनैतिक महत्वाकांक्षा से ग्रसित व गांधी हत्याकांड से जुड़े लोग शामिल थे और यह भारत की साझी संस्कृति को नष्ट कर, अतिवादियों को स्थापित करने की बहुत बड़ी योजना का एक छोटा लेकिन अत्यधिक महत्वपूर्ण हिस्सा थी’’।
लोकार्पण कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शामिल वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह ने कहा कि ‘‘ऐसे मामलों में धार्मिक संस्थाओं को राज्यों का राजनैतिक हितों को साधने के लिए संरक्षण देना, भारत के संवैधानिक ढांचे के लिए बेहद खतरनाक है। न्यायपालिका को इस विषय पर विशेष रूप से गम्भीरता से सोचना चाहिए।’’। इसके अतिरिक्त डॉ. अनिल सिंह, जयशंकर पाण्डेय, दिनेश सिंह, खालिक अहमद खां व पुस्तक के अनुवादक अनिल राजिमवाले जी ने भी इस पुस्तक से जुड़े ऐतिहासिक व तथ्यात्मक पक्षों पर अपने विचार रखे।
इस कार्यक्रम में विशेष रूप से कामरेड जमुना सिंह, अमित सिंह, उमाकान्त विश्वकर्मा, कमलेश यादव, सूर्यकान्त पाण्डेय, मोहम्मद अनीस, विनीत मौर्या, शिल्पी चौधरी, कुमारी सुमन कौल, अरशद अफजाल, अतीक अहमद, कामरेड माताबदल, आर. डी. आनन्द, अतहर शम्सी, दानिश, तुफैल, शाहआलम, आनन्द सिंह, संजय मिश्रा, गयाप्रसाद गौतम, अखिलेश चतुर्वेदी, विनोद सिंह, सत्यभान सिंह जनवादी, धीरज कुमार सोनी, रामकरन मतिमंद, डॉ. भास्कर, विजय बहादुर वर्मा, आसाराम जागृत, सुनील मौर्या, बी. एन. पाण्डेय, एस. पी. चैबे, ज़मीर राना, दीनदयाल शर्मा, आफ़ाक़ आदि कई लोग मौजूद रहे।
के. पी. सिंह
वरिष्ठ पत्रकार
अयोध्या की वह स्याह रात
भारत की साझी संस्कृति को नष्ट कर, अतिवादियों को स्थापित करने की बहुत बड़ी योजना का एक छोटा लेकिन अत्यधिक महत्वपूर्ण हिस्सा था बाबरी मस्जिद विध्वंस
फैजाबाद। ‘‘अयोध्या की वह स्याह रात’’ पुस्तक का लोकार्पण कार्यक्रम का आयोजन शाने अवध के सभागार में सम्पन्न हुआ। यह पुस्तक 23 दिसम्बर 1949 की रात बाबरी मस्जिद में रामलला की मूर्ति स्थापना की घटना से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजी शोध पर आधारित है।
इस पुस्तक के लेखकद्वय में से एक वरिष्ठ पत्रकार सुश्री कृष्णा झा ने कहा कि ‘‘अयोध्या विवाद में हाई कोर्ट के पंचायती फैसले के बाद से ही हमने इस पुस्तक पर काम शुरू कर दिया था। जैसे-जैसे हम इससे जुड़े तथ्यों की खोज में आगे बढ़ते गए वैसे-वैसे यह गुत्थी एक विशाल षडयंत्र के हिस्से के रूप में दिखाई देने लगी। पुस्तक पढ़ने पर सभी संवेदनशील बहुसंख्यक मूल विवाद की सत्यता जान पायेंगे’’।
इस पुस्तक के दूसरे सह-लेखक धीरेन्द्र कुमार झा ने कहा कि ‘‘पूरी तैयारी और सूझबूझ के साथ गढे गए इस विवाद की योजना में राजनैतिक महत्वाकांक्षा से ग्रसित व गांधी हत्याकांड से जुड़े लोग शामिल थे और यह भारत की साझी संस्कृति को नष्ट कर, अतिवादियों को स्थापित करने की बहुत बड़ी योजना का एक छोटा लेकिन अत्यधिक महत्वपूर्ण हिस्सा थी’’।
लोकार्पण कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शामिल वरिष्ठ पत्रकार शीतला सिंह ने कहा कि ‘‘ऐसे मामलों में धार्मिक संस्थाओं को राज्यों का राजनैतिक हितों को साधने के लिए संरक्षण देना, भारत के संवैधानिक ढांचे के लिए बेहद खतरनाक है। न्यायपालिका को इस विषय पर विशेष रूप से गम्भीरता से सोचना चाहिए।’’। इसके अतिरिक्त डॉ. अनिल सिंह, जयशंकर पाण्डेय, दिनेश सिंह, खालिक अहमद खां व पुस्तक के अनुवादक अनिल राजिमवाले जी ने भी इस पुस्तक से जुड़े ऐतिहासिक व तथ्यात्मक पक्षों पर अपने विचार रखे।
इस कार्यक्रम में विशेष रूप से कामरेड जमुना सिंह, अमित सिंह, उमाकान्त विश्वकर्मा, कमलेश यादव, सूर्यकान्त पाण्डेय, मोहम्मद अनीस, विनीत मौर्या, शिल्पी चौधरी, कुमारी सुमन कौल, अरशद अफजाल, अतीक अहमद, कामरेड माताबदल, आर. डी. आनन्द, अतहर शम्सी, दानिश, तुफैल, शाहआलम, आनन्द सिंह, संजय मिश्रा, गयाप्रसाद गौतम, अखिलेश चतुर्वेदी, विनोद सिंह, सत्यभान सिंह जनवादी, धीरज कुमार सोनी, रामकरन मतिमंद, डॉ. भास्कर, विजय बहादुर वर्मा, आसाराम जागृत, सुनील मौर्या, बी. एन. पाण्डेय, एस. पी. चैबे, ज़मीर राना, दीनदयाल शर्मा, आफ़ाक़ आदि कई लोग मौजूद रहे।
के. पी. सिंह
वरिष्ठ पत्रकार