धर्मों और उन के इतिहास पर बहुत किताबें लिखी अल-बरूनी ने
उस समय के राजाओं के बारे में अल-बरूनी ने लिखा है कि दुर्भाग्य से इन में एकता नहीं है। आपस में लड़ते हैं। लड़ते समय दुश्मनों की सहायता लेते हैं। यह लोग भारत जैसे महान देश को कमजोर कर रहे हैं
फ़िरोज़ ख़ानअपने व्यस्त जीवन में हमें अपने रिश्तेदारों और मित्रों के बारे में जानने की इच्छा नहीं होती और ना ही समय होता है तो ऐसे में औरों के बारे में जानने का समय क्सि के पास होगा? और फिर इतिहास के पन्नों में दबी हुई हस्तियों के बारे में जानने का समय किस के पास होगा? लेकिन आज ऐसे ही एक विशिष्ट व्यक्ति के बारे में बात करनी है। एक ऐसी व्यक्ति जो एक में अनेक थे। जी हाँ, आज हम बात कर रहे हैं अल-बरूनी के बारे में।
अल-बारूनी एक ट्रॅवेलर, स्कॉलर, भाषाविद, इतिहासकार, खगोलविद्, भौतिक विज्ञानी, गणितज्ञ, प्राकृतिक चिकित्सक थे। इस के अलावा उन्हें अरबी, फ़ारसी, ग्रीक, हिब्रू, सीरियक और आप नहीं मानेंगे, लेकिन यह सत्य है कि उन्हें संस्कृत भी आती थी। इस महान व्यक्ति पर आज तक कई फिल्में, नाटकें बनी हैं, कई लेख लिखे गये हैं। इन की लिखी हुई किताबें दुनिया भर के कई विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं।
दुनिया के नामी घुमक्कड़ों में इन की गिनती होती है। अफ्रीका, अरब देश, मध्य पूर्व के देश, अफगानिस्तान हो कर वह भारत आए थे। भारत में रहते हुए संस्कृत सीखी। वहीं उन्होंने 'तारिक़-ए-हिंद' नामक भारत के इतिहास पर अपनी मशहूर किताब लिखी। आज भी यह किताब कुछ जगहों पर मिलती है। इस किताब का अनुवाद कई भाषाओं में हुआ है। इस किताब में अल-बारूनी ने उन के समय में भारत में प्रचलित धर्म, भाषाएं, संस्कृतियाँ और दूसरी बातों के बारे में भी लिखा है। हिंदू धर्म के बारें में उन्हों ने लिखा है कि यह एक बहुत पुराना धर्म है। उस समय के राजाओं के बारे में लिखा है कि दुर्भाग्य से इन में एकता नहीं है। आपस में लड़ते हैं। लड़ते समय दुश्मनों की सहायता लेते हैं। यह लोग भारत जैसे महान देश को कमजोर कर रहे हैं।
अल-बरूनी का जन्म 15.9.973 मे ख्वाराजम, जो इस समय उज़बेकिस्तान में है, हुआ था। जिस जगह वे जन्मे थे आज उस जगह का नाम अल-बरूनी है! बहुत कम आयु में उन्हों ने शिक्षा प्राप्त करना शुरू कर दिया था। अपने समय के मशहूर खगोलविद् अबू मंसूर से उन्हों ने गणित और खगोल विज्ञान का ज्ञान प्राप्त किया था। 990 में वह बुखारा पहुँचे। वहीं वे उस समय के एक और स्कॉलर एवी शीना के संपर्क में आए। उन दोनों के बीच कई सालों तक पत्र लेखन हुआ। 998 में तबरिस्तान की अदालत मे नौकरी की। वहीं उन्हों ने 'अल-असर अल-बाकिया' नामक किताब लिखी। गुज़री हुई सदियों की बाकी बची असरों के बारे में लिखा। इस विषय पर ऐसी किताब लिख ने वाले वह पहले व्यक्ति थे।
1017 में महमूद ग़ज़नी उन के शहर पर चढ़ाई कर अल-बरूनी समेत कई स्कॉलरों को बंदी बना कर ग़ज़नी ले गया। वहाँ उस ने बरूनी को दरबारी खगोलविद् बनाया। ग़ज़नी ने जब भारत पर चढ़ाई की तो बरूनी भी उस के साथ भारत आए। ग़ज़नी तो वापस चला गया, लेकिन उस की इजाज़त से बरूनी भारत में ही रह गये।

अल-बरूनी को भारत बहुत पसंद आ गया था।
अल-बरूनी ने वैसे तो कई किताबें लिखी हैं। इस समय उन की लिखी हुई 146 किताबें उपलब्ध हैं जिन में से 95 गणित और खगोल विज्ञान पर ही लिखी हुई हैं। पृथ्वी के बारे में उन्हों ने लिखा है की यह गोलाकार है और सूर्य के इर्द गिर्द घूमती है। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि पृथ्वी के गोलाकार होने के बारे में उन्हें भारत के पुराने ग्रंथों से पता चली थी।
अवी शीना के साथ पत्र व्यवहार करते समय उन्होंने कई बार अरिस्टोटल के बारे में अपने विचार व्यक्त किए। अरिस्टोटल की थ्योरी से वह सहमत नहीं थे। अवी शीनाने को उन्होंने कहा था कि अरिस्टोटल कोई भगवान नहीं है जो उस की बातों को सत्य मान लिया जाए। सूर्य और चन्द्र ग्रह्णों के बारे में अल-बरूनी ने जो बातें लिखी हैं वो उससे पहले किसी ने भी नहीं लखी थी। फ़िज़िक्स और भूगोल पर भी उन्होंने किताबें लिखीं। स्वयं खोज और अभ्यास कर उन्हों ने अपनी बातें रखीं। फार्मोकॉलॉजी और खनिज शास्त्र के बारे में उन की लिखी बातें अठारहवीं और उन्नीस्वीं सदी में सत्य साबित हुईं!!
धर्मों और उन के इतिहास पर तो उन्होंने बहुत किताबें लिखी। हिंदू, बुद्ध, ईसाई, यहूदी और जर्थुस्त्र धर्मों की उन्हों ने पढ़ाई की थी। धर्मों को समझने के इरादे से धर्मों का अभ्यास किया। किसी भी धर्म को दूसरे धर्मों से बेहतर नहीं बताया। उन्हों ने कहा कि सारे धर्म कहीं ना कहीं एक दूसरे से जुड़े हैं। उन्होंने कहा की मानव धर्म ही सर्वश्रेष्ठ है। उन का मानना था की भूखे का धर्म उसकी भूख है।
हिंदू धर्म का अभ्यास कर ने के बाद उन्होंने कहा कि इस महान धर्म के मानने वाले दो गुटों में बन्टे हुए हैं। एक स्कॉलर (ब्राह्मण) और दूसरा गुट आम लोगों का है। जो लोग पढ़े लिखे हैं, वह निराकार भगवान में मानते हैं और आम लोग अनेक देवी देवताओं में मानते हैं और उन की मूर्तियाँ बना कर पूजा करते हैं।
अल-बरूनी करीब आधा भारत घूम चुके थे और उन्होंने भारत के समाजों और संस्कृतियों का गहन अध्ययन किया था। भारत पर लिखी उन की किताब 'तारिक़-ए-हिंद; के लिए अल-बरूनी दुनिया भर में जाने जाते हैं।

हिंदू-मुस्लिम संबंधों के बारे में उन्होंने लिखा है कि उन दोनों के बीच सौहार्द के संबंध थे। मुस्लिम राजा भारत पर चढ़ाई करते थे, तब इन दोनों के बीच दरार पड़ती थी। कुछ लोग मुस्लिमों से नफ़रत करते, लेकिन यह भी अस्थाई होती।
बरूनी की लिखी हुई किताबें 11 वीं और 12 वीं सदियों में योरप में बहुत मशहूर हुईं। हालांकि उन्होंने अपनी पुस्तकें अरबी और फ़ारसी में लिखी थीं, लेकिन योरप की सभी भाषाओं में उन का अनुवाद किया गया है। आज भी इंगलैंड में लंदन के पुस्तकालय में उन की लिखी हुई किताबें मौजूद हैं।
इस महान व्यक्ति ने 75 वर्ष की आयु में 13.13.1048 को इस दुनिया को अलविदा कहा। 1973 में सोवियत संघ ने इस महान स्कॉलर को सन्मान देते हुए एक डाक टिकट जारी किया।