नई दिल्ली। उत्तराखण्ड के रुद्रपुर सिडकुल, पन्तनगर स्थित टाटा वेण्डर ऑटोमोटिव स्टम्पिंग एण्ड असेम्बलिंग लिमिटेड (असाल) के संघर्षरत 98 मज़दूरों को 6-7 जून की आधी रात पुलिसिया दमन के साथ गिरफ्तार करके हल्द्वानी, नैनीताल व अल्मोड़ा की जेलों में बन्द कर दिया गया है। उन पर शांति भंग की आशंका (धारा 151) थोपा गया है। इस बर्बर घटना के बाद स्थानीय मज़दूरों में बेहद रोष व्याप्त बताया जा रहा है। इस दमन के किलाफ जहाँ जिला मुख्यालय पर मज़दूर पंचायत का ऐलान किया गया वहीं दिल्ली में उत्तराखण्ड निवास, चाणक्य पुरी (निकट चाणक्य पुरी थाना), पर विरोध-प्रदर्शन कर उत्ताखण्ड के मुख्यमन्त्री के नाम ज्ञापन दिया।

इंकलाबी मजदूर केन्द्र का कहना है कि अन्य राज्यों की तरह उत्तराखण्ड में भी शासन-प्रशासन मजदूरों का शोषण-उत्पीड़न में पूँजीपतियों के साथ खड़ा है। अपने शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ लड़ रहे मजदूरों का दमन किया जा रहा है। यह खुली चर्चा है कि मज़दूरों के दमन की यह पूरी कार्यवाही मुख्यमन्त्री बहुगुणा की टाटा प्रबन्धन से डील का परिणाम है। असाल के मजदूर अपने अधिकारों के लिये लगातार संघर्ष कर रहे थे।

उधर रुद्रपुर में असाल के मजदूरों का संघर्ष दमन के बाद और मजबूत हुआ बताया जाता है। 11 जून को महापंचायत आयोजित की गयी जिसमें सिडकुल की सभी ट्रेड यूनियनों ने भागेदारी की और आगे की रणनीति बनायी।

इंकलाबी मजदूर केन्द्र के मुताबिक सुबह से हो रही बरसात में भीगते हुये लगभग 400 मजदूरों ने अपनी शिफ्टों के हिसाब से भागेदारी की। इस बीच जेल से छूटकर आये मजदूरों ने भी नारेबाजी करते हुये अपने उत्साह को जाहिर किया।

सूचना है कि 14 जून को मुख्यमन्त्री विजय बहुगुणा के गदरपुर आगमन पर ट्रेड यूनियनों द्वारा पर्चा व काले झण्डे लेकर प्रदर्शन करने की योजना बनायी गयी है। असाल के मजदूरों सहित अन्य फैक्टरियों में हो रहे अन्याय के खिलाफ डी.एम. कोर्ट पर क्रमिक अनशन शुरु करने की घोषणा भी की गयी जिसमें सभी ट्रेड यूनियनों ने सिडकुल मजदूर यूनियन संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में भागेदारी करने की घोषणा की। यूनियनों द्वारा आर्थिक सहयोग भी किया गया। 16 जून को होने वाली हल्दूचौड़ की महापंचायत को और अधिक भागेदारी के साथ सिडकुल में आम हड़ताल की घोषणा पर विचार चल रहा है।

महापंचायत में, ब्रिटानिया श्रमिक संघ, नेस्ले कर्मचारी संगठन, पारले मजदूर संघ, वोल्टाज श्रमिक संगठन, सिरडी श्रमिक संगठन, थाई सुमित नील ऑटो कामगार संगठन, भूमिहीन मजदूर किसान संघर्ष समिति,सी.पी.एम.,एक्टू, वेरोक वर्कर्स यूनियन, इन्डोरेन्स वर्कर्स यूनियन, टाटा मोटर्स मजदूर संगठन, आनन्द निशिकावा क. इम्पलाइज यूनियन, क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा, संयुक्त रोडवेज परिषद शामिल थे।