आईएसआई के एजेंटों पर मीडिया को साँप सूँघ गया है
आईएसआई के एजेंटों पर मीडिया को साँप सूँघ गया है
मसीहुद्दीन संजरी
सुबह से इलेक्ट्रानिक चैनलों पर सूत्रों के हवाले से खबर चल रही है कि हथियार बंद आतंकवादी गुजरात में घुस आए हैं।
खुफिया एजेंसियों के बजाए इन चैनलों ने ही सर्च अभियान चला रखा है। लेकिन मध्य प्रदेश से पकड़े गए आईएसआई वालों का नाम लेने में भी शर्म आती है लोकतंत्र के इस खम्भे को।
मध्य प्रदेश की घटना से ध्यान हटाने के लिए अभी इस्राइल पोषित आईएसआईएस का विकल्प भी तो मौजूद ही है।
असली आतंकवादियों को पकड़ा जाए तो आतंकवाद के खिलाफ सालों नहीं महीनों में ही निर्णायक जीत हासिल की जा सकती है।
आईएसआई के लिए जासूसी करने के आरोप में पकड़े आरोपियों में किसी का सम्बंध संघ से है तो किसी का बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से। किसी की तस्वीर शिवराज सिंह चौहान के साथ है तो किसी की कैलाश विजयवर्गीय और प्रवीण तोगडि़या के साथ। 110 दस खातों की पहचान हो चुकी है जिनमें पाकिस्तान से पैसा आया था। यह सभी खाते बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोगों के हैं। लेकिन .... कोर्इ बड़ा हंगामा नहीं। ऐसा लगता है कि आईएसआई के एजेंट नहीं जब कतरे पकड़े गए हों। अगर इनके नाम और संगठन बदल दिए जाते तो आधी नींद में देश के सामने खड़ी चुनौती मीडिया के लोगों को दिखाई देने लगती। अब तक उस क्षेत्र का कोई खूबसूरत सा नाम भी गढ़ लिया गया होता। उनकी कुंडलियां छान मारी गई होती। खतरे के सौ संकेत सामने आ चुके होते। हां, यह तो अवश्य पता चल गया होता कि किस मदरसे में बचपन में पढ़ा करते थे।


