आजादी की इच्छा का विस्फोट
आजादी की इच्छा का विस्फोट
यह लेख ‘समय संवाद’ संस्थाभ के तहत 2012 के अगस्त क्रांतिदिवस के अवसर पर लिखा गया था और ‘युवा संवाद’ तथा ‘सच्ची मुच्टी’ पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ था। कल केरल के साथी जार्ज जेके ने बताया कि इस लेख का वहां कुछ साथी मलयालम में अनुवाद कर रहे हैं। आपके पढ़ने के लिए लेख फिर से जारी किया जा रहा है। लेख लंबा होने के कारण दो भाग में प्रकाशित किया जा रहा है।
अगस्त क्रांतिदिन और भारत का शाशक वर्ग-1
प्रेम सिंह
आजादी की इच्छा का विश्वास
“यह एक छोटा सा मंत्र मैं आपको देता हूँ। आप इसे हृदयपत्र पर अंकित कर लीजिए और हर सांस के साथ उसका जाप कीजिए। वह मंत्र है - ‘करो या मरो’। या तो हम भारत को आजाद करेंगे या आजादी की कोशिश में प्राण देंगे। हम अपनी आंखों से अपने देश का सदाअगुलाम और परतंत्र बना रहना नहीं देखेंगे। प्रत्येेक सच्चा कांग्रेसी, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, इस दृढ़ निश्चित से संगठित होगा कि वह देश को बंधन और दास्तां में बने रहने को देखने के लिए जिंदा नहीं रहेगा। ऐसी आपकी प्रतिबद्धता होनी चाहिए।”


