मैं आपका बहुत आदर करता हूं अटल जी, और जो लोग आपके निजी जीवन पर छींटे उछाल रहे हैं, उनसे मेरी असहमति है। आपके दीर्घ जीवन की मैं कामना करता हूं। भारत रत्न सम्मान मिलने की बधाई स्वीकार करें।
लेकिन सोचता हूं कि आपके कार्यकाल को कैसे याद करूं? क्या शांतिकाल में भारत के इतिहास में हुई एकमात्र पाकिस्तानी घुसपैठ के लिए, जिसके बाद भारतीय सैनिकों को अपनी जिंदगी की शहादत देकर अपने ही देश की जमीन को मुक्त कराना पड़ा?
या आपके कार्यकाल को याद करते हुए गुजरात हिंसा को याद करूं, जो 1984 के बाद का देश का सबसे बड़े नरसंहार था? यह हिंसा इतने दिनों तक चलती रही अटल जी, और आप मौन रहे। बोले भी तो तब, जब हिंसा थम चुकी थी। मुझे याद है आपका राजधर्म वाला वक्तव्य। इसके लिए मैं आपका आदर करता हूं।
या याद करूं कंधार विमान अपहरण कांड के लिए? अब छोड़िए वह तो बहुत शर्मनाक वाकया था आत्मसमर्पण का। उसे तो छोड़ ही देता हूं।
या याद करूं उस पोखरण-2 के लिए जिससे पाकिस्तान को भी अपना परमाणु हथियार टेस्ट करने का मौका मिल गया और भारतीय उपमहाद्वीप में भारत का एक परमाणु शक्ति संपन्न प्रतिद्वंद्वी खड़ा हो गया? पोखरण-2 के बगैर पाकिस्तान के लिए परमाणु विस्फोट करने का कोई मौका नहीं था।
या याद करूं तहलका कांड के लिए, जिसमें आपके रक्षा मंत्री के घर पर रिश्वत दिए जाने की रिकॉर्डिंग सामने आई?
या याद करूं आपके समय पहली बार गठित संविधान समीक्षा आयोग को?
या आपके कार्यकाल को याद करूं देश के इतिहास में बने पहले डिसइनवेस्टमेंट मंत्रालय के लिए? या बाल्को जैसी मालदार सरकारी कंपनी को औने-पौने दामों ने निजी हाथों में बेचने के लिए?
या हर्षद मेहता कांड के बाद सबसे बड़े शेयर घोटाले केतन पारीख कांड के लिए?
या याद करूं स्कूली बच्चों की किताबों के भगवाकरण को?
आपके कार्यकाल को कैसे याद करूं अटल जी? वैसे मैं आपका बहुत सम्मान करता हूं।
दिलीप सी मंडल
दिलीप मंडल, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।