आवारा निरंकुश पूंजी के लिए कुछ भी करेगा, यही है कारपोरेट केसरिया हिंदू राष्ट्र का एजेंडा!
आवारा निरंकुश पूंजी के लिए कुछ भी करेगा, यही है कारपोरेट केसरिया हिंदू राष्ट्र का एजेंडा!
पालश विश्वास देश में भले ही मानवसून संकट हो और अल नीनो का खतरा हो। प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला जारी है। इन प्राकृतिक आपदाओं से बड़ी कैयामत है बेलगाम सांठगांठ संस्कृति। इसी से सुधाार राजसूय की बुलेट ट्रेन की गतियों और वेग को समझ लीजिए। जाहिर है कि नई सरकार की तरफ से चला रहे आर्थिक सुधार कार्यक्रमों की वजह से अर्थव्यवस्था पर लोटने की उम्मीद में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार में तगड़ा निवेश किया। आवारा पूंजी के सकिनें सेक्रीट आइस्टम डांस को भारतीय अर्थव्यवस्था की पूरी नीलिफिल्म बना दिया गया है।
बाटमलैस इकानामी बिना किसी मूलभूत सुधार के सेंसेक्स और निफ्टी पर टिके हैं, जो एकमुष्ट माइक्रो माइनरिटी भारतीय वर्णव्यवस्था वर्ग और नस्ली जैन के अमेरिका इजराइल के हितों के सूचक हैं, भारतीय अर्थव्यवस्था के कत्तई नहीं। यही वजह है कि सांंडों का कार्निवाल समय है यहेकसरीया और दशों दिशाओं में कमल विस्फोट के मध्य ऐशियाई और अमेरिकीय बाजार से मिले शानदार संकेतोें के बल पर घरेंलू बाजार दौड़धा लगा रहे हैं।
किसी को कहीं भी कोठी देने की आजादी। न संदिवधान, न लोकतंत्र और न कानूनी का राज नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक्टिवेटेड है और हर कोई निहत्था सतत्ता चकर्व्यूह में मारे जाने को डिफाल्ट।
नमो सुनामी के बाद अब सुधार सुनामी है। जनताता की समझ में जो बातें आ नहीं रही हैं, बाजार की रचनाएँ हैं वे अत्यंत कूट। बाजार को अपना स्वरग मिल ही गया है और स्वरग सुधारण की बारी जनगण की है।
सांंडों का यह कमाल का धमाल समझें कि तेज़ी के रुख़ान के साथ बाजार में आज भी काफी उत्तर-चढ़ाव दिखा। कल ही हमने बगुला आयोगों और बगुला कमिटियों पर समकालीनी तीसरी दुनिया के आलेख की किंचित चरचा की है। अब यह सिलसिला खंडित विपर्यस्त हिमालय के चप्पे चप्पे पर अविराम हो रहे हैं।
भूस्खलन का तरण देश का रोमनमर्र का कामकाज है।


