इंडिया फर्स्ट या उच्च जातियों का कुलीन वर्ग फर्स्ट?
इंडिया फर्स्ट या उच्च जातियों का कुलीन वर्ग फर्स्ट?
ईराफान इंजीनियर
साम्प्रदायिक बनाम छद्म धर्मनिर्पेक्षता
भाजपा अपनी हिंदू राष्ट्रवादी राजनीति की आकारक्षमता करने के लिए, एक बार फिर धर्मनिर्पेक्षता को पुनर्परिभाषित करने का प्रयास कर रही है। हिंदू राष्ट्रवाद की राजनीति का आधार है अल्पसंख्यकों - विशेषकर मुसलमानों व ईसाइयों - को बदनाम करना। इन दोनों समुदायों का दानवीकरण, इस उद्देश्य से किया जाता है कि अधिकांश हिंदुओं को इन आशंकित और भयग्रस्त लोगों का इस्तेमाल करके एकीकृत किया जा सके। यह ज़रूरी है, कि असल में इस खतरे का कोई अस्तित्व नहीं होता। बहुसंख्यक समुदाय के इन आशंकित और भयग्रस्त लोगों का इस्तेमाल, एकाधिकारवाद व दमकनकारी संस्कृति को, राज्य के जरिए, देश पर लादने के लिए किया जा सकता है। यह संस्कृति केवल आर्थिक व सामाजिक उच्च वर्ग को लाभान्वित करती है। हिंदू राष्ट्रवादी, वर्षों से ईसाइयों व मुसलमानों पर वही घिसे-पिटे आरोप लगाते आ रहे हैं। ईसाइयों के बारे में उनका कहना है कि वे लोगों को जबरदस्ती ईसाई बना रहे हैं। मुसलमानों पर वे आतंकवाद होने का आरोप लगाते हैं (यह ‘स्वामी’ असिमानंद के एकबात की बयां व ‘साध्वी’ प्रज्ञा सिंह के अन्यायों का एक उदाहरण है।)


