इंसाफ से वंचित मुजफ्फरनगर जहां दो साल बाद भी सरकार फेल, रिपोर्ट हुई जारी
इंसाफ से वंचित मुजफ्फरनगर जहां दो साल बाद भी सरकार फेल, रिपोर्ट हुई जारी
मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा पर गठित सहाय कमीशन की रिपोर्ट को पूरा कर शीतकालीन सत्र में सरकार करे सार्वजनिक
लखनऊ, 09 सितंबर 2015। रिहाई मंच ने मुजफ्फरनगर-शामली सांप्रदायिक हिंसा के दो साल पूरे होने पर वहां के सामाजिक और राजनैतिक हालातों का जायजा लेती एक रिपोर्ट जारी की है।
मंच ने इस रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा है कि मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा पर गठित विष्णु सहाय न्याययिक जांच आयोग को छह महीने में रिपोर्ट देनी थी लेकिन आज उस घटना के दो साल पूरे हो जाने के बावजूद रिपोर्ट पूरी नहीं हो सकी है। आयोग का कार्यकाल लगातार बढ़ाया जाता रहा है। यह स्थिति मुजफ्रनगर समेत देश की इंसाफ पसंद आवाम को राजनैतिक साजिश लग रही है।
रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा को जिस तरीके से राज्य सरकार द्वारा भड़कने दिया गया और उसके कसूरवारों को जिस तरीके से राजनैतिक संरक्षण दिया गया, उसका परिणाम यह रहा कि देश में फासीवादी शक्तियां मजबूत हुईं और केन्द्र में नरेन्द्र मोदी की जीत के रूप में सामने आयीं।
श्री शुऐब ने कहा कि आज जब हाशिमपुरा जनसंहार के दोषियों को उत्तर प्रदेश की इंसाफ विरोधी सरकारों की वजह से बरी कर दिया गया है तो ऐसे समय में देश की इंसाफ पसंद आवाम के सामने यह चुनौती है कि वह देश में इंसाफ का राज कैसे कायम करे। जिस तरह से प्रदेश में जांच आयोगों के नाम पर नाइंसाफी का खेल खेला जाता रहा है, उसके खिलाफ रिहाई मंच ने जिस तरीके से आरडी निमेष जांच आयोग को न सिर्फ कैबिनेट द्वारा मंजूर करवाया और रिपोर्ट को सरकार को सदन में सार्वजनिक करने पर मजबूर किया और उस पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की लड़ाई जारी है वैसी ही लड़ाई की जरूरत आज मुजफ्फरनगर के इंसाफ के लिए विष्णु सहाय कमीशन की रिपोर्ट को लेकर है। मोहम्मद शुऐब ने सरकार से मांग की कि वह शीतकालीन सत्र तक विष्णु सहाय कमीशन रिपोर्ट पूरी होने और उसे सार्वजनिक करने की गारंटी करे।


