इन टोपियों की क़ीमत न चुकानी पड़े !
इन टोपियों की क़ीमत न चुकानी पड़े !
आदरणीय केजरीवाल साहब,
सादर नमस्कार
हमें इस बात से सच में कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप अपनी रिहाइश कहाँ बनाएँगे। कमरे चाहे कितने हों आपके घर में या लोकेशन चाहे जो हो उसकी... फर्क नहीं पड़ता हमें। आदत है बड़े लोगों को बड़े घरों में देखने की।
फर्क इस बात से पड़ता है कि कहीं आप इस पानी-बिजली वाली सब्सिडी को हम जैसों की जेब से न वसूलने लगें। कहीं आपके राज में भी दिल्ली वालों को घूस देकर काम न करवाना पड़े। कहीं आप उनके बीच रहते रहते उन जैसे न हो जाएँ।
मुझे आपसे बहुत उम्मीद नहीं है, पर वो हमारे आफिस वाले सिन्हा साहब, वो हमारे एक पुराने कॉमरेड और वह हमारे घर की सहायिका... इन सबको आपसे बड़ी उम्मीद है। इसीलिए जब यह रायल बैंक आफ स्काटलैंड की इण्डिया हेड मीरा सान्याल से लेकर बड़े-बड़े लोग टोपी लगाए दिख रहे हैं तो मुझे डर लगता है कि कहीं सिन्हा साहब, कामरेड और हमारे घर की उम्रदराज़ सहायिका को इन टोपियों की क़ीमत न चुकानी पड़े।
जब आप मुजफ्फरपुर पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, आपके साथी प्रशांत भूषण को सी पी एम से तो दिक्कत होती है पर कांग्रेस का समर्थन नहीं खलता... जब आपके लोग निजी बातचीत में पी एम के लिए साहेब की वक़ालत करते नज़र आते हैं और जब वह आपका कवि मित्र अपने बड़बोलेपन में अपनी भयावह स्त्रीविरोधी सामन्ती चुटकुलेबाजी पेश करता है तो उन लोगों को भले फर्क न पड़े पर मुझे डर लगता है। लेकिन मेरी छोड़िये... मेरा डर आपसे दूर नहीं हो सकता। हाँ ... हमारे आफिस वाले सिन्हा साहब, वो हमारे एक पुराने कामरेड और वह हमारे घर की सहायिका.. इन सबको आपसे बड़ी उम्मीद है।
आपका
दिल्ली का एक ताजातरीन रहवासी


