इरोम शर्मिला के समर्थन में धरना व उपवास
इरोम शर्मिला के समर्थन में धरना व उपवास
नई दिल्ली,6 नवम्बर। मणिपुर में आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट, 1958 के खिलाफ एवं मणिपुर की आयरन लेडी इरोम चानू शर्मिला के समर्थन में दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्ट्स फैकल्टी में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति के निकट सुबह 10.00 से सायं 05.00 तक दिल्ली के अनेक जनसंगठनों ने उपवास रखा एवं धरना दिया। इसमें मुख्य रूप से छात्र ,युवा एवं नागरिकों ने भाग लिया। प्रो. वी. पी. श्रीवास्तव, सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, युवा भारत के कार्यकारिणी सदस्य तथा युवा संवाद पत्रिका के संपादक डॉ. ऐ. के. अरुण,सेव शर्मीला कैम्पेन की देविका मित्तल, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र हिदाम पीटर, राजेश मेहता, मो. अनस, सहित दर्जनो लोगों ने उपवास एवं धरना में भाग लिया।
उलेखनीय है कि विगत 13 सालों से लंबे अनशन पर बैठे रहने के बाद भी मणिपुर की आयरन लेडी इरोम चानू शर्मिला के हौसले आज भी उसी तरह बुलंद हैं जैसे अपने अनशन के शुरुआती समय में थे। 2 नवंबर, 2000 से वह मणिपुर में आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट, 1958, जिसे सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (Armed Forces Special Powers Act, 1958) भी कहा जाता है, को हटाए जाने की मांग पर अनशन करने के लिए बैठी हुई हैं। इस एक्ट के तहत मणिपुर में तैनात सैन्य बलों को यह अधिकार प्राप्त है कि उपद्रव के अंदेशे पर वे किसी को भी जान से मार दें और इसके लिए किसी अदालत में उन्हें सफाई भी नहीं देनी पड़ती है। साथ ही सेना को बिना वॉरंट के गिरफ़्तारी और तलाशी की छूट भी है।
डॉ. ऐ. के. अरुण ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें अपने स्वार्थ और कार्पोरेट के हितों के लिए काम कर रही हैं। दागी सांसदों को बचाने तथा कारपोरेटों के हितों की रक्षा के लिए ये कुछ भी कर सकतें हैं लेकिन देश की जनता पर जुल्म ढाने के लिए आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट, 1958 जैसा काले कानून का इस्तेमाल करते हैं।
इस मौके पर सत्याग्रह पर बैठे लोगों ने मणिपुर एवं उत्तर पूर्व में आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट, 1958 को अविलम्ब वापस लेने की मांग की।


