इस अपमान ने जयललिता को बना दिया "अम्मा"
इस अपमान ने जयललिता को बना दिया "अम्मा"
इस अपमान ने जयललिता को बना दिया "अम्मा"
दक्षिण भारत की करिश्माई नेता जयललिता जयराम अब हमारे बीच नहीं रहीं...
74 दिनों से अपोलो अस्पताल में ज़िंदगी और मौत के बीच में जंग लड़ रही जयललिता ने सोमवार रात साढ़े 11 बजे अंतिम सांस ली…
और इसी के साथ ही तमिलनाडु में राजनीति के एक युग का अंत हो गया...
मज़बूत इरादों वाली जयललिता का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन जयललिता तमाम मुश्किलों का सामना करने के बाद भी डटीं रही
तमिलनाडु की सियासत में 25 मार्च 1989 के दिन विधानसभा में कुछ ऐसा हुआ, जिसने अम्मा को झकझोर कर रख दिया...और उस घटना से नाराज अम्मा ने प्रतिज्ञा ली कि जिस दिन ये जगह महिलाओं के लिए सुरक्षित हो जाएगी, उसी दिन वह विधानसभा में कदम रखेंगी।
...और शायद इसी जिद्द ने जयललिता को अम्मा बना दिया था।
तमिलनाडु की आयरन लेडी अब हमारे बीच नहीं है...
जय़ललिता के व्यक्तित्व के प्रभाव को कभी नकारा नहीं जा सकता...
उनकी नीतियां, उनके संघर्ष और अपनेपन ने लोगों को हमेशा उनसे बांधे रखा, यही वजह है कि अम्मा के जाने पर पूरा तमिलनाडु रो रहा है।
आज भले ही जयललिता हमेशा बीच न हों, लेकिन उनकी याद हमेशा लोगों को दिलों में ज़िंदा रहेगी।


